जागरण संवाददाता, कानपुर : सड़क निर्माण घोटाले में फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजे गए यूपीसीडा के प्रधान महाप्रबंधक अरुण मिश्रा के खिलाफ बचे अधिकारियों व कर्मचारियों के भी गुरुवार को बयान दर्ज कर लिए गए। एक दो दिन में आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके बाद पुलिस गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करेगी। चार्जशीट लगने के बाद बाकी आरोपितों के खिलाफ गिरफ्तारी पर लगा स्टे खत्म हो जाएगा तो पुलिस उन्हें भी जेल भेजेगी।

वर्ष 2012 में पीडब्ल्यूडी की ओर से बनाई गई सड़क को यूपीसीडा का निर्माण बताकर 2.11 करोड़ रुपये का घोटाला करने के आरोपित अरुण मिश्रा को दो दिन पूर्व पुलिस ने रामादेवी से गिरफ्तार करके जेल भेजा था। इससे तीन दिन पहले ही शासन से उसके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की गई थी। आरोपित के जेल जाने के बाद पुलिस जल्द विवेचना पूरी करने वाली है। गुरुवार को सीओ ने यूपीसीडा के एक जेई समेत करीब आधा दर्जन कर्मचारियों को बुलाकर बयान दर्ज किए। कर्मचारियों ने बताया है कि अरुण विभाग में केवल अपनी मर्जी चलाते थे। कई बार कर्मचारी काम करने से मना कर देते थे तो वही काम किसी और से कराते थे। एसपी पूर्वी राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि मुकदमे में कुछ लोगों के बयान बाकी रह गए थे। गुरुवार को उन्हें बुलाकर बयान लिए गए। कोशिश है कि इसी सप्ताह चार्जशीट भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) कोर्ट में दाखिल की जाए। आरोपपत्र लगने के बाद विधिक राय लेकर मुकदमे में बाकी आरोपितों तत्कालीन एक्सईएन, एई, जेई व ठेकेदार को भी गिरफ्तार किया जाएगा।

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संपत्तियों का ब्योरा नहीं जुटा सकी पुलिस

पुलिस अब तक अरुण मिश्रा व उनके परिवार की संपत्तियों का पूरा ब्योरा नहीं जुटा सकी है। ईडी से इस बाबत दस्तावेज मांगे गए हैं, लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया है। अधिकारियों ने बताया कि अरुण मिश्रा के तमाम बैंक खातों का पता लगा है, लेकिन सभी बैंकों से जानकारी लेने के लिए वक्त लग सकता है। आरोपित की दिल्ली, देहरादून, हरिद्वार, लखनऊ, कानपुर में भी संपत्तियां बताई जा रही है। इसका ब्योरा मांगा गया है।

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