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लेह-लद्दाख में तैनात सेना के जवानों के लिए OEF कानपुर ने भेजे 3500 जोड़ी स्पेशल बूट, देखें क्या है इनकी खासियत

Published: Sun, 27 Sep 2026 10:01 AM (IST)

ओईएफ कानपुर ने लेह-लद्दाख में तैनात सैनिकों के लिए 3500 जोड़ी मल्टीपर्पज स्पेशल बूट की आपूर्ति की है।

पहली तस्वीर एआई जेनेरेडेट है, दूसरी तस्वीर में ओईएफ द्वारा तैयार किए गए बूट मल्टीपर्पज

पहली तस्वीर एआई जेनेरेडेट है, दूसरी तस्वीर में ओईएफ द्वारा तैयार किए गए बूट मल्टीपर्पज

HighLights

  1. ओईएफ कानपुर ने 3500 जोड़ी स्पेशल बूट लेह-लद्दाख भेजे।

  2. ये बूट माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी प्रभावी हैं।

  3. भारत अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

जागरण संवाददाता, कानपुर। सर्दी शुरू होने से पहले आयुध उपस्कर निर्माणी (ओईएफ), कानपुर ने देश की सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए 3500 जोड़ी बूट की आपूर्ति कर दी है। ओईएफ में बने मल्टीपर्पज बूट लेह-लद्दाख में तैनात जवानों के लिए मददगार साबित हो सकेंगे।

सर्दी के दिनों में लेह-लद्दाख में तापमान माइनस में चला जाता है, ऐसे में जवानों के लिए विशेष बूट की जरूरत होती है। ओईएफ में निर्मित ये मल्टीपर्पज बूट बर्फीले और दुर्गम इलाकों में जवानों के पैरों को ठंड से बचाने के साथ-साथ चलने में भी सहूलियत देते हैं।

सैनिकों को समय पर बूट उपलब्ध कराने के लिए उत्पादन तेज कर दिया गया है। अगले दो महीनों में शेष 11 हजार 14,500 जोड़ी बूट की भी सप्लाई भेज दी जाएगी। इसके लिए फैक्ट्री में काम चल रहा है, ताकि कड़ाके की ठंड से पहले सभी जवानों तक बूट पहुंच सकें।

ओईएफ और स्कार्पा कंपनी के संयुक्त पहल पर बनाया गया बूट मल्टीपर्पज एक ऐसा सैन्य रक्षा उत्पाद है जो पहले इटली से आयात किया जाता था। सेना की मांग पर दोनों संस्थानों ने मिलकर विशेष बूट को बनाया। भारतीय सेना को ये बूट पसंद आने पर ओईएफ को 14,500 जोड़ी बूट मल्टीपर्पज का सप्लाई ऑर्डर मिला।

क्या है इन बूट की खासियत

ये बूट 18 हजार फीट की ऊंचाई और माइनस 50 डिग्री सेल्सियसत तक के तापमान (40 किमी प्रति घंटा की हवा की गति के साथ) वाले बर्फीले और ग्लेशियर वाले इलाकों में हाइकिंग के लिए बनाए गए हैं। ये बूट क्रैंपन (बर्फ पर चलने के लिए जूते के नीचे लगने वाला उपकरण) के साथ इस्तेमाल किए जा सकते हैं और ग्लेशियर में की जाने वाली सभी गतिविधियों के लिए उपयुक्त हैं।

ये गर्मी, अच्छी फिटिंग, आराम और सुविधा प्रदान करते हैं। शरीर की गर्मी को बनाए रखने के लिए थ्रीडी इंसुलेशन और साथ ही ईपीटीएफई (विस्तारित पालीटेट्राफ्लोरोएथिलीन) मैटीरियल का इस्तेमाल किया गया है जो हवा आने-जाने देता है और पानी से बचाता है।

अंदर वाले बूट (इनर बूट) का निचला हिस्सा मोल्डेड रबर से बना है ताकि अंदर (जैसे टेंट या बेस कैंप में) आसानी से चला जा सके। यह रबर माइनस 50 डिग्री सेल्सियस के कठोर मौसम को झेल सकता है और इस्तेमाल के दौरान इसमें कोई दरार या टूट-फूट नहीं होगी।

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बाहरी बूट (आउटर बूट) पेबैक्स से बना है, जो माइनस 50 डिग्री सेल्सियस जैसे बहुत कम तापमान में भी लचीला बना रहता है। बाहरी बूट का सोल रबर से बना है। आसानी से चलने के लिए सोल पर स्नो लग्स (बर्फ पर पकड़ बनाने वाले उभार) डिज़ाइन किए गए हैं। ये बूट सैनिकों को बर्फीले क्षेत्रों में पेट्रोलिंग के दौरान ठंडक से बचाएंगे।

सेना से 14,500 जोड़ी बूट मल्टीपर्पज का ऑर्डर के सापेक्ष 3500 जोड़ी बूट बनाकर लेह लद्दाख के लिए भेज दिए गए हैं। शेष 11 हजार जोड़ी बूट बनाने का काम चल रहा है। उम्मीद है कि अगले दो महीने में बूट की आपूर्ति कर दी जाएगी। रक्षा क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

                                                                     डॉ. अनिल रंगा, मुख्य महाप्रबंधक, ओईएफसी