कानपुर, जेएनएन। इस बात से किसे इन्कार है कि विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में पठन-पाठन की लगातार खराब हो रही व्यवस्था के लिए मोबाइल फोन जिम्मेदार हैं। चाहे विद्यार्थी हों या शिक्षक जिम्मेदारों की नजर इधर-उधर होते ही हाथ मोबाइल पर ही चला जाता है। कक्षा में छात्र-छात्रएं पढ़ने के बजाय मोबाइल से बात करने, फेसबुक चलाने व वाट्सएप पर चैटिंग करने में व्यस्त रहते हैं। इससे पढ़ाई पर विपरीत प्रभाव पढ़ता है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए परिसर में मोबाइल फोन का प्रयोग करने पर रोक लगा दिया है। सीएसजेएमयू की कुलपति और डिग्री कॉलेज के प्राचार्यो ने मुक्त कंठ से इसकी सराहना की। आयोग की इस पहल की कामयाबी के लिए आपका सहयोग भी जरूरी है।छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय सहित अन्य महाविद्यालयों में भी यह आदेश लागू हो रहा है। इस निर्णय से डिग्री कक्षाओं में बाधा रहित पढ़ाई हो सकेगी।

किसने क्या कहा

-ये फैसला बेहद अच्छा है। मोबाइल पर चैटिंग, सोशल मीडिया पर समय देने से अच्छा है कि छात्र पढ़ाई करें। गुरुवार से विश्वविद्यालय में आदेश प्रभावी हो जाएगा। छात्र-छात्राओं को यह भी बताया जाएगा कि मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने से क्या-क्या नुकसान होते हैं। मोबाइल रखने पर पाबंदी नहीं है, लेकिन यदि कोई मोबाइल का प्रयोग करते पकड़ा जाएगा तो उस पर कार्रवाई होगी। -प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता, कुलपति सीएसजेएमयू 

-उच्च शिक्षा निदेशालय के आदेश को सख्ती से लागू करेंगे। कई बार कक्षा में छात्रों के मोबाइल पर व्यस्त रहने की शिकायतें मिलती हैं। यह निर्णय इसलिए अच्छा क्योंकि यदि विद्यार्थी कक्षा में मोबाइल का प्रयोग करेंगे तो शिक्षक की बात पर ध्यान ही नहीं देंगे। कई बार कक्षा के दौरान फोन की घंटी बजने से भी व्यवधान होता था। इससे अन्य छात्र भी प्रभावित होते थे। अब ऐसा नहीं होगा। - डॉ.आरके सिंह, प्राचार्य , डीबीएस डिग्री कॉलेज 

-यह फैसला तो पहले ही हो जाना चाहिए था। निश्चित ही इस निर्णय के बाद सुधार दिखेगा। अक्सर देखने में आता है कि छात्र मोबाइल पर जुटे रहते हैं। चैटिंग उनके लिए नशे की तरह है। बार-बार मोबाइल चेक करना ऐसे छात्रों की आदत बन जाती है। जल्द ही इसे लागू भी कर छात्रों को इस फैसले के फायदे बताएंगे। -डॉ.अमित श्रीवास्तव, प्राचार्य,डीएवी कॉलेज 

-आदेश अच्छा है, माता-पिता को भी चाहिए कि वे बच्चों को मोबाइल न दें। अब तो तकरीबन सभी छात्र-छात्राओं के हाथ में मोबाइल होता है। कक्षा में भी ज्यादातर छात्र सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। निदेशालय के इस फैसले से सुधार होगा। जल्द ही इसे लागू करके शिक्षकों को आदेशित करेंगे कि वे छात्रोंं को प्रेरित करें ताकि कॉलेज के बाहर भी छात्र-छात्राएं कम से कम मोबाइल का प्रयोग करें। -डॉ.मृदुला शुक्ला, कानपुर विद्या मंदिर पीजी कॉलेज 

Posted By: Abhishek

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