कानपुर, [ऋषि दीक्षित]। देश भर के सरकारी तथा निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस फाइनल ईयर की परीक्षा एक साथ कराई जाएगी। इसे ही कॉमन एग्जाम माना जाएगा। परीक्षा को उत्तीर्ण करने के बाद छात्र-छात्राएं मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए पात्र हो जाएंगे। उन्हें एग्जिट परीक्षा देने की जरूरत भी नहीं होगी। केंद्र सरकार ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के नए मसौदे पर मुहर लगा दी है।

देश भर के सरकारी तथा निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की परीक्षाएं अलग-अलग विश्वविद्यालय कराते हैं। एमबीबीएस करने के बाद छात्र-छात्राओं की योग्यता में एकरूपता लाने के लिए अलग से एग्जिट एग्जाम का प्रस्ताव था, जिसे पास करने पर ही मेडिकल प्रैक्टिस का लाइसेंस प्रदान किए जाने का सुझाव दिया गया था। एनएमसी के इस सुझाव का देश भर के मेडिकल छात्र-छात्राओं ने विरोध किया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिलकर एतराज जताया था। विरोध को देखते हुए सरकार संशोधन के लिए बाध्य हुई। अब सभी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस फाइनल ईयर में कॉमन परीक्षा कराई जाएगी।

क्या है एग्जिट एग्जाम

एनएमसी ने पहले एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा पास करने के बाद छात्र-छात्राओं को एग्जिट एग्जाम देने का प्रावधान किया था। उसे पास करने पर ही उन्हें प्रैक्टिस का लाइसेंस मिल पाता।

विदेशी छात्रों के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट

विदेशों से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं का स्क्रीनिंग टेस्ट लिया जाता है। इसमें उत्तीर्ण होने पर ही उन्हें प्रैक्टिस का लाइसेंस प्रदान किया जाता है। ऐसे छात्र-छात्राओं को एग्जिट एग्जाम में शामिल होना पड़ेगा। तभी प्रैक्टिस का लाइसेंस मिलेगा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में एमसीआइ के नोडल अफसर प्रो. जलज सक्सेना ने बताया कि एमबीबीएस के बाद अलग से एग्जिट एग्जाम का देशव्यापी विरोध हुआ था, जिसके बाद संशोधन किया गया। अब देश में एक साथ एमबीबीएस फाइनल ईयर की परीक्षा होगी, जिसे एग्जिट एग्जाम या पात्रता परीक्षा माना जाएगा।

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