जागरण संवाददाता, कानपुर : ध्वनि प्रदूषण के मानक नए सिरे से तैयार करने की योजना है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) मुख्यालय के निर्देशों पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने काम शुरू कर दिया है। अब शहर के अलग अलग हिस्सों में मोबाइल सैंपलर लगाकर ध्वनि प्रदूषण की जांच की जाएगी। सबसे पहले शांत क्षेत्र को आधार बनाया जाएगा। वहां पर 72 घंटे के लिए मोबाइल साउंड सैंपलर इंस्टॉल होगा। उस जगह की सुबह और शाम के वक्त ध्वनि प्रदूषण की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके लिए चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), चिड़ियाघर, कैंट और आइआइटी में से किसी को चयनित किया जाएगा। वहां के रिकार्ड आने के बाद दूसरे मोहल्ले की स्थिति देखी जाएगी।

क्यों आ रही दिक्कत

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आवासीय, शांत, औद्योगिक और व्यवसायिक क्षेत्रों की मॉनीट¨रग करता है। वहां पर मॉनीट¨रग स्टेशन लगाए गए हैं। इन क्षेत्रों में स्कूल, कालेज, हॉस्पिटल भी स्थित है। नियमत: स्कूल कालेज और हॉस्पिटल के बाहर ध्वनि प्रदूषण नहीं होनी चाहिए, लेकिन काफी शोर हो रहा है। हॉस्पिटल परिसर में रात के समय 45 और दिन के समय 55 डेसीबल तक ही शोर मान्य है, लेकिन उससे अधिक ध्वनि प्रदूषण की शिकायतें आ रही हैं वहीं दूसरी ओर अगर वह अस्पताल औद्योगिक क्षेत्र के नजदीक बना हुआ है तो मॉनीट¨रग स्टेशन के मुताबिक वहां आवाज का स्तर बढ़ जाता है। यही स्थिति व्यवसायी क्षेत्र में स्थित स्कूलों की रहती है।

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''अब अलग अलग मोहल्लों में ध्वनि प्रदूषण के स्तर की जांच की जाएगी। उसकी रिपोर्ट तैयार होगी। उसके आधार पर नए सिरे से मानक तैयार किए जा सकते हैं।

- कुलदीप मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

Posted By: Jagran

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