नेवी में नौकरी के साथ जारी रखी पढ़ाई, कड़ी मेहनत से UPSC परीक्षा पास कर कानपुर के मयंक ने पूरा किया पिता का सपना
कानपुर के मयंक सचान ने नौसेना में नाविक रहते हुए कई असफलताओं के बाद भी हार नहीं मानी और यूपीएससी सीएपीएफ में 343वीं रैंक हासिल की।
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मयंक सचान
HighLights
नौसेना में नाविक रहते हुए मयंक सचान ने यूपीएससी सीएपीएफ क्रैक किया।
15 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता के बाद मिली सफलता।
कड़ी मेहनत, नौसेना अनुशासन से 343वीं ऑल इंडिया रैंक पाई।
जागरण संवाददाता, कानपुर। असफलताओं का लंबा समय देखने के बाद भी कभी हार न मानने की जिद पर अड़े रहने वाले सफलता की राह पर आगे बढ़ते हैं। जी हां, कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कानपुर निवासी मयंक सचान ने। उन्होंने नौसेना में नाविक की नौकरी करते हुए 15 से ज्यादा प्रतियोगी परीक्षाएं दी लेकिन सभी में असफल रहे।
सैन्य अफसर बनने के लिए दो बार सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) का साक्षात्कार दिया और फिर सिविल सेवा की प्रीलिम्स परीक्षा दी तो उसमें भी असफल हो गए। यही नहीं, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की लिखित परीक्षा में भी उन्हें शुरुआती दो प्रयासों में असफलता ही हाथ लगी।
कमियों को चिह्नित किया और तीसरी बार फिर प्रयास किया और इस बार उनका सपना पूरा हुआ। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 343 के साथ यूपीएससी सीएपीएफ 2025 क्वालीफाई कर लिया।
इंटरनेट मीडिया इंस्टाग्राम पर अपनी कहानी को साझा करते हुए मयंक ने कहा कि मन में बचपन से ही यूपीएससी क्वालीफाई करके प्रशासनिक सेवा करने की चाह थी। पिता प्राइवेट फैक्ट्री में इलेक्ट्रीशियन थे। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने से इंजीनियरिंग की महंगी फीस भरना मुश्किल था।
नौकरी के साथ की परीक्षा की तैयारी
माता व पिता पर दो भाई-बहनों की परवरिश की जिम्मेदारी थी। ऐसे में प्रारंभिक पढ़ाई सरकारी स्कूल से हुई। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति संभालने के लिए कम उम्र में ही नौसेना में नाविक पद पर नौकरी ज्वाइन की। नौसेना की नौकरी के साथ वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे रहे।
15 से ज्यादा प्रतियोगी परीक्षा में असफलता मिली लेकिन निराश नहीं हुए। सरकारी नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखी और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से लोक प्रशासन में स्नातक व परास्नातक किया। मयंक का मानना है कि भारतीय नौसेना में 15 साल के कार्यकाल में हर रोज कुछ नया सीखने को मिलता था।
जैसे चारों तरफ पानी की उफनती लहरों के बीच नौसेना के सख्त अनुशासन ने धैर्य और मानसिक रूप से शांत रखना सिखाया। यही वजह रही कि लगातार असफलताएं मिलने के बाद भी पीछे नहीं हटा और अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार प्रयासरत रहा। परिणामत: आज अपना सपना पूरा करने में सफल रहा।
