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ईद से पहले बढ़ी टेंशन: US-Israel-Iran युद्ध का असर, धागों के दाम में उछाल, कानपुर कपड़ा बाजार पर संकट

Published: Sat, 14 Mar 2026 06:49 AM (IST)

ईरान-इजराइल युद्ध के कारण कानपुर के कपड़ा बाजार पर संकट गहरा गया है। सूरत से पुराने ऑर्डर की डिलीवरी धीमी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सूरत से पुराने ऑर्डर की डिलीवरी में देरी।

  2. यार्न के दामों में 15% तक की बढ़ोतरी।

  3. कानपुर के ईद बाजार पर गहराया संकट।

जागरण संवाददाता, कानपुर। मध्य पूर्व में जारी ईरान -इजराइल युद्ध का असर अब टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ता दिखाई दे रहा है। शहर के कपड़ा बाजार में सूरत से आने वाले पुराने आर्डर की डिलीवरी में देरी होने लगी है। इसका असर ईद के बाजार पर पड़ सकता है।

युद्ध से उत्पन्न स्थितियों का असर स्थानीय कपड़ा व टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ता दिख रहा है। होजरी व गारमेंट व्यापारियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में यार्न के दामों में 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे उत्पादन लागत में भारी उछाल आया है। टेक्सटाइल व्यापारियों का कहना है कि युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. जिसका असर यार्न और अन्य कच्चे माल की कीमतों पर पड़ा है। पहले जो यार्न स्थिर कीमतों पर मिल रहा था. अब उसकी कीमत तेजी से बढ़ रही है।

यार्न के दाम बढ़ने से फैब्रिक उत्पादन की लागत सीधे प्रभावित हो रही है। छोटे और मध्यम स्तर के पावरलूम पर इसका सर्वाधिक असर होने की आशंका है। सूरत तथा लुधियाना से आने वाले तैयार माल की आपूर्ति भी धीमी हुई है। कई फैक्ट्रियों ने तो काम बंद होने की सूचना दे दी है। ऐसे में केवल पुराने आर्डर की सप्लाई ही मिल रही है। उसमें भी विलंब होने लगा है।

होजरी और गारमेंट कारोबार को लगा झटका

होजरी और गारमेंट का कारोबार शहर में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में है। 1,500 से 2,000 छोटी-बड़ी गारमेंट और होजरी निर्माण इकाइयां में हजारों की संख्या में कारीगर भी काम कर रहे हैं। अधिकांश इकाइयां दादा नगर, पनकी, फजलगंज और जाजमऊ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हैं। रूमा में लगभग 50-60 बड़ी इकाइयां सीधे तौर पर धागा और कपड़े के उत्पादन में लगी हुई हैं। गारमेंट और टेक्सटाइल क्षेत्र का अनुमानित सालाना कारोबार लगभग 3,000 से 4,000 करोड़ के बीच है। कुल निर्यात में टेक्सटाइल और परिधान का हिस्सा लगभग 15-20 प्रतिशत रहता है। धागों के दाम में आई तेजी के कारण उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है। उद्यमियों का कहना है कि पिछले एक साल से उद्योगों को पहले से ही प्रतिकूल स्थिति का सामना करना पड़ रहा था । अब युद्ध से उत्पन्न हालात और भी भारी पड़ रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में मुश्किल बढ़ जाएगी।


सूरत की फैक्ट्रियों से अब पुराना आर्डर भी देरी से मिल रहा है। कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन बंद कर देने की सूचना दे दी है। नए आर्डर भी नहीं बुक हो रहे हैं।
रूमित सिंह सागरी, निदेशक कानपुर कपड़ा कमेटी

सूती धागे के दाम में तीन से चार रुपये प्रति किलो और प्लास्टिक धागे में 20 रुपये प्रति किलो तक वृद्धि पिछले 12 दिन में हुई है। इससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। बाजार पहले से ही संकट के दौर से गुजर रहा था और अब समस्या विकराल होती दिख रही है।
- बलराम नरूला, एमडी जेट निटवियर्स