'कानपुर... हमारा शहर’ मुहब्बत भरा यह भाव लगभग हर शहरवासी के दिल में है। अपनी जमीन से प्यार तो सभी को है, लेकिन समस्याओं को लेकर झल्लाहट भी कम नहीं। गौरवशाली इतिहास गर्व का अहसास कराता है और वर्तमान हालात चिंतित करते हैं। 'माय सिटी माय प्राइड’ अभियान में 'जागरण’ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत सुविधाओं, वित्त और सुरक्षा की विषयवार कमजोरियां और ताकत का आकलन किया। इन क्षेत्रों में सुधार करने वाले 'रीयल हीरो’ से पाठकों को रूबरू कराया, साथ ही विशेषज्ञों से सुधार के सुझाव भी संकलित किए।

इसी क्रम में शनिवार को राउंड टेबिल कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें प्रतिभाग कर शहर के जनप्रतिनिधि, प्रमुख संगठन, संस्थाओं के प्रतिनिधि, उद्यमी, शिक्षक, चिकित्सक आदि प्रबुद्धजनों ने सिर्फ समस्याओं को ही रेखांकित नहीं किया बल्कि कानपुर को संभावनाओं का शहर मानते हुए सुधार के सुझाव दिए और अपनी भागीदारी की इच्छा भी जाहिर की। बैठक के प्रतिभागी वक्ताओं का मानना था कि यह संभावनाओं का शहर है, जरूरत है कि सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाएं। यह दायित्व सरकार, प्रशासन के साथ आमजन का भी है।

निजी अस्पतालों पर हो नियंत्रण
पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी का कहना था कि शहर में कई चिकित्सालय बंद पड़े हैं। इन्हें फिर संचालित करने की जरूरत है। सभी सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं सरकार दुरुस्त करे। एक निजी अस्पताल की मनमानी का उदाहरण देते हुए बोले कि निजी अस्पतालों पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। मरीज के इलाज को लेकर इनकी जिम्मेदारी तय हो। साथ ही शहर की सुंदरता के लिए जरूरी है कि डिवाइडर बनाकर उनमें हरियाली विकसित की जाए। पूर्व सांसद ने कानपुर दक्षिण को अलग जिला बनाने की जरूरत भी बताई। 

सीएसआर फंड की कमी नहीं, सरकार ठोस योजना बनाए
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य का कहना था कि औद्योगिक घरानों ने शहर को बहुत कुछ दिया है। आइआइए ने भी स्कूल, चौराहे सुधारे, लेकिन सरकार उनका रखरखाव नहीं कर पाई। उद्यमी विकास के लिए सीएसआर फंड देना चाहते हैं, लेकिन सरकार का रवैया सहयोगी नहीं रहता। सरकार हमारी भागीदारी का सम्मान करे, ठोस योजना बनाए तो सीएसआर फंड की कमी नहीं है।

बने एक स्थायी 'को-ऑर्डिनेशन सेल’
मर्चेंट्स चैंबर ऑफ उप्र के अध्यक्ष बालकृष्ण लाहोटी को लगता है कि यहां के बाशिंदों को शहर से बहुत लगाव है। व्यवस्थाओं में सुधार हो सकता है, लेकिन समन्वय की कमी है। जरूरी है कि शहर में विकास योजनाओं के लिए स्थायी रूप से 'को-ऑर्डिनेशन सेल’ का गठन किया जाए, ताकि अधिकारियों के तबादले के साथ योजनाएं प्रभावित न हों। सरकार बहुत धन दे रही है, उसका सदुपयोग होना चाहिए।

सरकार दे डंप यार्ड, उद्यमी खुद करेंगे कूड़ा निस्तारण
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष दिनेश बरासिया ने कूड़ा निस्तारण की अव्यवस्था को गंभीरता से उठाया। उनका कहना था कि नगर निगम अभी तक औद्योगिक कचरे के निस्तारण के लिए कोई डंप यार्ड ही नहीं बना सका है। सरकार अगर जमीन दे दे तो आइआइए से जुड़े सदस्य उद्यमी अपने संसाधनों से ही कूड़ा उठान और निस्तारण के लिए यार्ड तक पहुंचाने के लिए तैयार हैं।

कानपुर बने 'सिटी ऑफ अपॉर्च्युनिटी’
पीपीएन कॉलेज में गणित विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह का कहना था कि विभागों में समन्वय न होने की वजह से ही सभी परेशानियां हैं। यहां आधारभूत सुविधाओं का अभाव है, जाम की बहुत समस्या है। समन्वय स्थापित कर एक रोडमैप बनाएं। देश के अच्छे शहरों का अनुसरण करते हुए कानपुर को 'सिटी ऑफ अपॉर्च्युनिटी’ बनाने की जरूरत है। साथ ही युवाओं का पलायन हर हाल में रोका जाना चाहिए।

चाह लें तो कोई काम नामुमकिन नहीं
पनकी हनुमान मंदिर के महंत श्रीकृष्ण दास बोले कि शहर में जहां भी जाएं, जाम ही मिलता है। सड़कें बनते ही खोद दी जाती हैं, इसलिए हाल ज्यादा खराब हुआ। वहीं, सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं खराब हैं और निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर गरीबों का शोषण हो रहा है। शहरवासी समाज के लिए कुछ करने की ठान लें तो कोई भी कार्य नामुमकिन नहीं है।

व्यवस्थाओं के सहयोगी बनें आमजन
टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष कुमार गुप्ता का मानना है कि आमजन की इच्छाशक्ति से ही शहर का विकास होगा। सरकार के साथ जनता भी सोचे। कानपुर कमजोर नहीं है। कुछ उद्योग बंद हुए हैं तो कुछ उद्यमियों की इच्छाशक्ति से ही नए रूप में स्थापित हुए हैं। शहरवासी व्यवस्था में सहयोगी बनें, यातायात सहित सभी नियमों का पालन करें तो सुधार ज्यादा जल्दी नजर आएगा।

शिक्षा का हो राष्ट्रीयकरण
सीए इंस्टीट्यूट के रीजनल काउंसिल मेंबर दीप कुमार मिश्रा का कहना था कि भारत में सीएसआर फंड नहीं था, तब भी कई औद्योगिक घराने समाज के लिए दान देते थे। शासन प्रशासन के स्तर पर भ्रष्टाचार अधिक होने से मन खट्टा होता है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षा का राष्ट्रीयकरण हो। इसमें भेदभाव नहीं होना चाहिए। सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं पहले की तरह बेहतर की जाएं।

डॉक्टर और मरीज के बीच हो भरोसे का रिश्ता
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि वह जब से सचिव बने हैं, तभी से डॉक्टर और मरीज के बीच संबंधों को लेकर गंभीर हैं। अक्सर चिकित्सकों पर आरोप लगते हैं, उनसे मारपीट होती है। समाज समझे कि डॉक्टर अपने मरीज को धोखा नहीं दे सकता। दोनों के बीच पहले की तरह भरोसे का रिश्ता मजबूत करने की जरूरत है।

व्यवस्था बने तो उसका पालन भी कराएं
गुमटी के व्यापारी नेता अनुराग बलूजा ने कुछ पुराने कड़वे अनुभव साझा किए। बताया कि गुमटी बाजार में पार्किंग और सुरक्षा सहित तमाम मुद्दों के लिए प्रशासन से समझौता हुआ था, लेकिन उनमें से एक का भी पालन नहीं हुआ। बाजार में 16 सीसीटीवी कैमरे व्यापारियों ने लगवाए, लेकिन पुलिस ने देखभाल नहीं की। पुलिस अतिक्रमण नहीं हटाती। जो भी व्यवस्था एक बार बने, उसका पालन हो तो सुधार हो।

समस्याओं के बीच कैसे होगा औद्योगिक विकास
भारती महिला उद्यमी परिषद की शशि ठाकुर का कहना था कि हम शहर की आधारभूत सुविधाओं से असंतुष्ट हैं। इंडस्ट्री चलाने के लिए हमें बिजली चाहिए। अघोषित बिजली कटौती बड़ा नुकसान कराती है। सरकार महिलाओं को प्रोत्साहन की बात करती है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं। महिला उद्यमियों का भी शोषण होता है। रिश्वतखोरी पर तो लगाम कसनी ही चाहिए।

समन्वय के लिए बने एक फोरम
भारती महिला उद्यमी परिषद की वंदना मिश्रा का कहना था कि सरकारी विभागों की ओर से कोई सहयोग नहीं मिलता। उद्योग अपने बलबूते चल रहे हैं। 'कानपुर’ नाम से एक समन्वय का फोरम बने। सभी औद्योगिक संस्थाएं और संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारी उससे जुड़कर समस्याओं का समाधान करें। उद्योग बंधु में उठने वाले मुद्दों का त्वरित निस्तारण भी हो।

हम सुधारेंगे स्कूल और अस्पताल
कानपुर कपड़ा कमेटी के अध्यक्ष काशी प्रसाद शर्मा ने बताया कि हमने नगर निगम से एक-एक जर्जर स्कूल और अस्पताल मांगा था। उसका जीर्णोद्धार कर हम संचालित कराएंगे, लेकिन दिया नहीं। अफसर हमारी निगरानी करें, हमें बांधें नहीं। साथ ही कहा कि सरकार और अधिकारी कर्मचारियों की कमी का रोना न रोयें। जो संसाधन हैं, उनसे ही जनता को सुविधाएं मुहैया कराएं।

पढ़ाने के लिए तय हो शिक्षकों की जिम्मेदारी
कानपुर कपड़ा कमेटी के श्रीकृष्ण गुप्ता बोले कि कानपुर को यूपी का मेनचेस्टर कहा जाता था, लेकिन विश्व प्रसिद्ध मिलें भी बंद हो गईं। शिक्षा की बात करें तो नई भर्तियां करने के बजाय पहले से तैनात शिक्षकों की जिम्मेदारी तय की जाए कि वह पूरे समय स्कूल में पढ़ाएं। सरकार का नियंत्रण शिक्षकों पर हो, उन पर दबाव बनाया जाए।

चाहिए जनभागीदारी और बेहतर प्रबंधन : एमएलसी
विधान परिषद सदस्य डॉ. अरुण पाठक ने स्वीकार किया कि शहर में कई समस्याएं हैं, जिनमें सुधार की जरूरत है। उनका कहना था कि कूड़ा निस्तारण की ठोस योजना अमल में नहीं आ पाई है। यह विषय जन स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। गरीबों के इलाज के लिए इंतजाम बेहतर होने चाहिए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी है। निजी विद्यालयों में शिक्षा महंगी है, लेकिन उस पर नियंत्रण के लिए सरकार नया अध्यादेश लाई है। उन्होंने बैठक में हुई परिचर्चा में आए मतों के आधार पर सुधार के यह सुझाव भी प्रस्तुत किए-

- कूड़ा प्रबंधन की ठोस योजना के साथ ही जनता कम कूड़ा फैलाए। घर की तरह आसपास का वातावरण साफ रखे।
- गरीब निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की महंगी फीस नहीं दे सकते। शहर के वरिष्ठ डॉक्टर जिम्मेदारी निभाते हुए अपने-अपने क्षेत्र के किसी सार्वजनिक स्थल पर सप्ताह में एक दिन निश्शुल्क मरीज देख सकते हैं।
- स्कूल में दाखिले से पहले घर ही बच्चे का पहला स्कूल होता है। बच्चों को संस्कार जरूर दें। शिक्षा कभी किसी स्कूल के ढांचे पर ही निर्भर नहीं करती। हां, यह सही है कि सरकार के प्रयासों से व्यवस्थाएं और बेहतर हो सकती हैं।
- सरकारी योजनाओं का अमल सही हो, इसके लिए सरकारी और प्राइवेट संस्थाओं के लिए एक समन्वय केंद्र बने।
- सड़कें बनने के बाद जल्दी न खोदनी पड़ें, इसके लिए हर सड़क पर एक डक्ट बनाया जाए।
- कानपुर को पर्यटन शहर के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। कानपुर से बिठूर तक प्रधानमंत्री की ओर से एक माह के लिए एक बस चलवाने का प्रयास करेंगे। फिर कोशिश करेंगे कि उसकी निरंतरता भी हो जाए।
- धार्मिक आयोजनों की तरह ही युवाओं के प्रोत्साहन के लिए संस्थाएं कार्यक्रम करती रहें।

यह लिया संकल्प
एमएलसी अरुण पाठक ने संकल्प लिया कि शहर की विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से किसी एक सड़क को मॉडल रोड के रूप में विकसित किया जाएगा। फिर सरकार को दिखाया जाएगा कि अन्य सड़कें इस तरह व्यवस्थित बनाई जाएं। जल्द ही सड़क का चयन कर लिया जाएगा।

यह भी महत्वपूर्ण सुझाव
- नगर निगम के बंद हो चुके सभी अस्पताल शुरू किए जाएं। मोहल्ला क्लीनिक खोले जाएं।
- लखनऊ हवाई अड्डे का नाम लखनऊ-कानपुर हवाई अड्डा रख दिया जाए, ताकि विश्व मानचित्र पर शहर का नाम आ जाए।
- लखनऊ और कानपुर के बीच मेट्रो ट्रेन की शुरुआत की जानी चाहिए।
- पनकी मंदिर में भूमि उपलब्ध

 

By Gaurav Tiwari