फर्क योजनाओं में हो सकता है, काम करने का तरीका अलग हो सकता है। सोच के साथ प्राथमिकताएं बदल जाती हैं, लेकिन इसमें कतई संदेह नहीं है कि हर सरकार का मकसद विकास ही होता है। सत्य यह भी है कि सरकारों द्वारा लगातार मंशा जताए जाने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं उतनी विकसित नहीं हो सकी हैं, जितनी हो जानी चाहिए थीं। चिंता का विषय है कि जिस शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का ख्वाब संजोया जा रहा है, वहां सबसे बड़ी चिंता के रूप में आज भी सड़क, पानी, सीवर, सफाई जैसी समस्याएं हैं। सरकारी स्कूल जर्जर हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं नासाज हैं। औद्योगिक शहर में रोजगार के साधन कम हो गए।

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'माय सिटी माय प्राइड' अभियान के तहत 'जागरण' ने स्वास्थ्य, शिक्षा, आधारभूत सुविधाएं, वित्त और सुरक्षा मुद्दे के सकारात्मक-नकारात्मक पहलुओं को छुआ। साथ ही विशेषज्ञों से सुधार के सुझाव भी लिए। इसी कड़ी शनिवार को शहरी क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया, ताकि वह भी इस फिक्र में शामिल होकर शहर के विकास की दिशा में अपने प्रयासों को रफ्तार दे सकें। उचित मंच पर बात पहुंचा सकें।

वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों की शिकायत खास तौर पर नौकरशाही से थी। सभी का एकराय होकर मानना था कि शासन और प्रशासन मिलकर काम करेंगे तभी सार्थक परिणाम सामने आएंगे। कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन संपादकीय प्रभारी आनंद शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन यूनिट हेड अवधेश शर्मा और संचालन रेडियो सिटी के आरजे राघव ने किया।

जरूरी है आबादी देखते हुए कानपुर का विस्तार
स्वास्थ्य में योग और स्वच्छता मूलभूत विषय हैं। इनके प्रति सरकार का प्रयास भी है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी संचालित हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए हाल ही में कानपुर को 200 करोड़ रुपये दिलाए भी हैं। स्पीच एंड हियरिंग इंस्टीट्यूट भी बनने जा रहा है। आधारभूत सुविधाओं की बात करें तो राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तारीकरण भी हो रहा है। जरूरत है कि आबादी को देखते हुए कानपुर का विस्तार किया जाए।
- देवेंद्र सिंह भोले, सांसद

सीवर और पेयजल हैं शहर की बड़ी समस्या
विधायक बनने के बाद हमें जनता की जिन समस्याओं के समाधान के लिए जूझना पड़ रहा है, उनमें सबसे ज्यादा सीवर और पेयजल की हैं। बर्रा क्षेत्र में तो सीवर जाम की समस्या इतनी विकराल है कि जनता का जीना दुश्वार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ईमानदारी से काम कर रहे हैं। जब तक सरकारी खजाने की लूट बंद नहीं होगी, तब तक सुधार नहीं आएगा। व्यवस्था पारदर्शी हो और जनसंख्या नियंत्रण पर भी ध्यान दें।
- महेश त्रिवेदी, विधायक, किदवई नगर

मजबूत करने होंगे नगर निगम के संसाधन
कूड़ा शहर की बड़ी समस्या है। निस्तारण करने वाली निजी कंपनी भागने के बाद नगर निगम उसे संभाल नहीं पा रहा है। पर्याप्त डंपिंग स्टेशन तक नहीं हैं। अव्यवस्था से गंदगी और प्रदूषण बढ़ रहा है। निजी कंपनी के भरोसे रहने की बजाए नगर निगम के संसाधन दुरुस्त किए जाएं। साथ ही पौधरोपण को गंभीरता से लेते हुए कटान भी रोकी जाए। विकास नियंत्रित होना चाहिए।
- सतीश निगम, पूर्व विधायक, कल्याणपुर

सख्ती से कराना होगा अधिकारियों से काम
जनता हमें इसलिए चुनती है कि हम उनकी आवाज उठाएं। हम इसका प्रयास भी करते हैं, लेकिन अधिकारी बहुत लापरवाही करते हैं। सीसामऊ नाले का काम चल रहा है। वहां का अतिक्रमण अधिकारी चाहें तो थोड़ा सख्त प्रयास कर हटा सकते हैं। पूरे कानपुर की मलिन बस्तियों में नाला चोक की समस्या है। सपा शासन में हमने लड़कियों के लिए स्कूल बनवा दिया। वहां समय से किताबें और ड्रेस तो सरकार को अधिकारियों से ही समय से बंटवानी चाहिए।
- इरफान सोलंकी, विधायक, सीसामऊ

बिना सर्जन किस काम का कैंसर अस्पताल
कानपुर में समस्याओं के साथ संभावनाएं भी बहुत हैं। कैंसर अस्पताल है, लेकिन सर्जन न होने से मरीज की सर्जरी नहीं हो सकती। किडनी का कोई सरकारी अस्पताल यहां नहीं है। यह इंतजाम करने के साथ ही कार्डियोलॉजी में संसाधन बढऩे चाहिए। गरीब छात्रों के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसद सीटें आरक्षित हैं। इसका सख्ती से पालन कराना चाहिए।
- अमिताभ बाजपेयी, विधायक, आर्यनगर

जल्द सामने होंगे सकारात्मक परिणाम
नमामि गंगे और अमृत योजना से जोन-1, जोन-2 के करीब 60 फीसद सीवर लाइन के काम हो चुके हैं। 68 एमओयू और छोटे उद्यमियों को लोन से कानपुर में औद्योगिक विकास भी धरातल पर आएगा। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बन रहे हैं, जरूरत हाउस होल्ड कनेक्शन को रफ्तार देने की है। कूड़ा निस्तारण के लिए दो नए डंपिंग ग्राउंड बन रहे हैं। हम मानते हैं 40 फीसद प्राथमिक स्कूलों की हालत खराब है। 2018-19 में सरकार इन्हें सुधारने की योजना बना चुकी है।
- नीलिमा कटियार, विधायक, कल्याणपुर

खंभे और ट्रांसफॉर्मर हटाकर चौड़ी करें सड़कें
शहर को स्मार्ट सिटी तो घोषित कर दिया गया है, लेकिन काम अभी नजर नहीं आ रहा है। आबादी बोझ बढ़ा है तो संसाधन बढऩे चाहिए, लेकिन पुराने अस्पताल बंद कर दिए गए। कांशीराम अस्पताल बड़ा है, लेकिन सुविधाएं नहीं हैं। पचास लाख की आबादी की जरूरत के हिसाब से व्यवस्थाएं करनी होंगी। जेएनएनयूआरएम में लाइनें पड़ गईं, लेकिन अधिकारियों के पास नक्शा तक नहीं है। मेरा सुझाव है बीच से खंभे और ट्रांसफार्मर हटाकर सड़कें चौड़ी की जाएं।
- सुहैल अंसारी, विधायक, छावनी

महिलाओं के लिए हों अलग टॉयलेट
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में जगह-जगह टॉयलेट बनाए गए हैं। इन्हें बनाने के पहले एक बात का ध्यान रखना चाहिए था। महिलाओं के लिए अलग टॉयलेट बनाने चाहिए। साथ ही इनके संचालन के लिए वहां महिला कर्मचारी ही तैनात की जाएं। यह सुनने में छोटी, लेकिन वाकई बड़ी समस्या है, जिसमें सुधार की जरूरत है।
- अनिल सिंह, समाजसेवी

बड़ा मुद्दा: मंधना-अनवरगंज रेलवे ट्रैक
मंधना से अनवरगंज तक रेलवे ट्रैक को हटाकर लाइन से मंधना से सीधे पनकी जोडऩे के लिए रेलवे द्वारा सर्वे शुरू कर दिया गया है। जीटी रोड पर लगने वाले जाम से राहत को उठाए जा रहे इस कदम को लेकर भी जनप्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी बात रखी। सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने बताया कि ट्रैक हटाने का सर्वे हो रहा है। साथ ही सर्वे बेहतर विकल्प पर भी हो रहा है।

अभी इस ट्रैक पर मालगाड़ियों का लोड बहुत है। पनकी लाइन जुड़ने के बाद कुछ वहां शिफ्ट हो जाएंगी, फिर जब डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर बन जाएगा तो सारा भार वहां चला जाएगा। वहीं, विधायक अमिताभ बाजपेयी का सुझाव था कि शार्ट टर्म प्रपोजल पर काम करना चाहिए।

बेहतर हो कि पहले कुछ मालगाड़ियों को फ्रेट कॉरीडोर पर शिफ्ट कर दिया जाए। फिर फ्लाईओवर या अंडरपास बनाकर जाम से राहत दे दी जाए। सांसद भोले ने कहा कि अनवरगंज से मंधना तक जब ट्रैक शिफ्ट हो जाएगा तो इस पर मेट्रो भी चलाई जा सकती है।

शहर का बड़ा दर्द: आवारा जानवर
जनप्रतिनिधियों ने आवारा जानवर का मुद्दा भी उठाया। सभी कहना था कि शहर में हर जगह आवारा कुत्ते, सूअर और गायों के झुंड खड़े रहते हैं। यह न सिर्फ आवागमन बाधित करते हैं, बल्कि कई दफा राहगीरों को नुकसान भी पहुंचाते हैं। इस समस्या पर सभी को सामूहिक रूप से विचार कर समाधान कराना चाहिए।

बड़ा सुझाव- एक देश, एक शिक्षा
पूर्व विधायक सतीश निगम का सुझाव था कि एक देश, एक कर की तरह ही एक देश, एक शिक्षा प्रणाली लागू होनी चाहिए। सभी बोर्ड भंग कर सेंट्रल बोर्ड गठित कर दिया जाए। इससे शिक्षा का भेदभाव खत्म हो जाएगा।

बड़ा सवाल
एक ही वक्त में कानपुर स्वच्छता ऐप में नंबर वन और प्रदूषण में भी नंबर वन कैसे हो गया। स्वच्छता सुधरी तो प्रदूषण क्यों बढ़ा। सरकार की आंखों में धूल झोंकने वाले अधिकारी दंडित होने चाहिए।

बात पते की
- पेड़ों की कटान रोकने के लिए विद्युत शवदाह के प्रति लोगों को जागरूक किया जाए।
- दक्षिण क्षेत्र की कनेक्टिविटी अभी कम है। कुछ नए फ्लाईओवर बनाए जाने चाहिए। गोविंदनगर धर्म कांटे से अफीमकोठी तक और मंधना से रामादेवी तक फ्लाईओवर की जरूरत है।
- झकरकटी और फजलगंज बस अड्डे को शहर के बाहरी क्षेत्र में शिफ्ट करना ज्यादा राहतकारी होगा।
- सभी शहरों में बाजार पार्किंग सुविधा बेहतर कर बाजारों को व्यवस्थित किया जाए।
- स्वच्छ भारत मिशन के तहत जनप्रतिनिधियों से पूछकर जरूरत के हिसाब से शौचालय बनाते तो वह उपयोगी साबित होते। अधिकारी मनमानी करते रहे।

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By Nandlal Sharma