कानपुर उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा शहर है और देश में इसका आठवां स्थान है। यूपी के सबसे बड़े कमर्शियल शहर के तौर पर भी इसकी पहचान है। कानपुर का चमड़ा विश्व भर में प्रसिद्ध है। यहां की कनुपरिया बोली के क्या कहने, एक बार आप सुनेंगे तो बोलने की कोशिश अपने आप ही करने लगेंगे। गाल पर लगने वाला तमाचा यानि कनुपरिया भाषा में ‘कंटाप’ तो अब बोलचाल में कई मेट्रो शहरों में भी पॉपुलर हो चुका है।

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कानपुर के लोगों का बोलने का अंदाज भी ऐसा लगता है कि कंटाप भी अपना ही है, क्यों न इसे संभाल कर रख लिया जाए। यही कारण है कि अनूठी बोलचाल की शैली अब केवल कानपुर तक ही सीमित ही नहीं रही है। अब तो इस लहजे पर सीरियल भी बनने लगे हैं।

बात जब खानपान की हो तो कानुपर भला कैसे पीछे रह सकता है। यहां स्थित ठग्गू के लड्डू की दुकान और बदनाम कुल्फी का जायका तो पूरे देश भर में प्रसिद्ध है। खोया, रवा और काजू के लड्डू बनाने वाली इस दुकान का साइन बोर्ड इसे और खास बना देता है। बोर्ड पर लिखा है कि “ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको हमने ठगा नहीं”। यहां की यह दुकान 5 दशक पुरानी है।

ऐसा माना जाता है कि कानपुर की स्थापना सचेंदी राज्य के हिन्दू ने की थी। कानपुर को पहले कान्हापुर के नाम से जाना जाता था। कानपुर में ही 1773 से 1801 के बीच यहां अवध के नवाब अलमास अली का शासन रहा था। वहीं, ब्रिटिश राज्य के दौरान कानपुर अंग्रेजों का सबसे बड़ा गढ़ था। कानुपर 1857 में नाना साहिब पेशवा के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम के पहले आंदोलन का केंद्र भी था। देश के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी कानुपर से हैं।

कानपुर आईआईटी, छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी, ग्रीन पार्क स्टे‍डियम की वजह से कानपुर की अलग पहचान है। यहां हरकोर्ट बटलर प्रौद्योगिकी संस्थान भी इंजीनियरिंग के लिए छात्रों की पहली पसंद के रूप में शुमार रहता है। प्रसिद्ध पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी का कार्यक्षेत्र कानपुर ही रहा था। उनके नाम पर ही कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज भी है। कानपुर यूपी के उन शहरों में भी शामिल है, जहां आने वाले दिनों में मेट्रो भी फर्राटा मारती नजर आएगी।

कानपुर के खास स्थान

जाजमऊ : जाजमऊ में सिद्धनाथ और सिद्ध देवी का मंदिर है। यहां सूफी संत शाह अलाउल हक का मकबरा भी है। इस मकबरे को 1358 में फिरोज शाह तुगलक ने बनवाया था।

श्री राधाकृष्ण मंदिर
यह मंदिर जे. के. मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है। राधा कृष्ण को समर्पित यह मंदिर कानपुर आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहता है।

जैन ग्लास मंदिर
जैन ग्लास मंदिर वर्तमान में कानपुर आने वाले पर्यटकों के लिए बेहद खास है। मंदिर में कांच से सुंदर सजावट की गई है।

कानपुर मेमोरियल चर्च
1875 में बना यह चर्च लोम्बामर्डिक गोथिक शैली में बना है। यह चर्च उन अंग्रेजों के लिए बनाया गया है, जिनकी 1857 के स्वथतंत्रता संग्राम में मौत हो गई थी।

एलेन फॉरेस्ट जू

1971 में स्थापित चिड़ियाघर देश के खास चिड़ियाघरों में से एक है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह देश का तीसरा सबसे बड़ा चिड़ियाघर है।

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By Nandlal Sharma