कानपुर, जेएनएन। भारतीय तकनीक का डंका अब विदेशी धरती पर भी बजने लगा है। हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का पहला मेड इन इंडिया विमान मारीशस के आसमान में उड़ान भरने जा रहा है। इसके लिए मारीशस सरकार के साथ एचएएल ने करार किया है। एचएएल अब डोर्नियर विमान का सिविल वर्जन बहुत जल्द मारीशस सरकार को देगा। भारतीय उच्चायुक्त और मारीशस के विदेश मंत्री ने मिलकर सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। यह वायुयान बेहद खास है और अपने क्षेत्र का अत्याधुनिक तकनीक वाला है। एचएएल अबतक मारीशस सरकार को तीन विमान दे चुका है।

छह माह पहले उतारा था सिविल वर्जन

एचएएल ने पिछले माह ही डोर्नियर के सिविल वर्जन को बाजार में उतारा था। इसके लिए डीजीसीए (डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन) ने भी अनुमति लाइसेंस जारी कर दिया था। इसके बाद 19 सीटर इस विमान की मांग मारीशस सरकार की ओर से की गई थी। इसी क्रम में एचएएल कानपुर टीएडी के महाप्रबंधक अपूर्व राय और ओम कुमार दबीदिन, गृह मंत्रालय सचिव व मारीशस सरकार के बीच 10 सितंबर को डोर्नियर की आपूर्ति के लिए समझौता हुआ था। मारीशस में भारतीय उच्चायुक्त नंदिनी के सिंगला और मारीशस के विदेश मंत्री एलन गानू ने सभी औपचारिकताएं पूरी कीं।

अब तक तीन विमान दिए जा चुके हैं : एचएएल अधिकारियों के मुताबिक अभी तक मारीशस सरकार को तीन डीओ-228 वायुयानों की आपूर्ति की जा चुकी है। पहला डीओ वायुयान एमपीसीजी-एक की आपूर्ति 1990 में की गई थी। वर्ष 2004 में दूसरा विमान एमपीसीजी-तीन और वर्ष 2016 में तीसरा विमान एमपीसीजी-चार की आपूर्ति की गई थी।

यह है खूबी : यह पहला मेड इन इंडिया वायुयान है जो अपने क्षेत्र में आधुनिक है। एचएएल अब तक ऐसे 150 विमान बना चुका है, जिन्हें प्रयोग किया जा रहा है। यह 19 सीटर मल्टीरोल यूटिलिटी वायुयान है, जिसका प्रयोग वीआइपी और यात्री परिवहन, एयर एंबुलेंस, फ्लाइट इंस्पेक्शन रोल, क्लाउड सीडिंग, पैरापिंग, हवाई निगरानी, फोटोग्राफी और कार्गो एप्लीकेशन के लिए किया जा सकेगा।

Edited By: Abhishek Agnihotri