कानपुर, जेएनएन। पेट के ऑपरेशन के बाद निजी कंपनी के प्रबंधक की मौत के मामले ने तूल पकडऩा शुरू कर दिया है। स्वजन ने उनकी मौत के मामले में अस्पताल के डाक्टरों पर किडनी निकालने समेत कई आरोप लगाए हैं। मामले में अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। मौदहा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम खण्डेह निवासी रामआसरे के 36 वर्षीय पुत्र दयावंत शर्मा नोएडा में मिडलाइफ इंश्योरेंस कंपनी में प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे। स्वजन के मुताबिक, 17 अप्रैल 2020 को उनके पेट में दर्द हुआ। इस पर वह छुट्टी लेकर खण्डेह आ गए। उसके बाद अगली सुबह इलाज के लिए कानपुर के काकादेव क्षेत्र में एक अस्पताल पहुंचे। उनके साले ब्रजेश कुमार ने बताया कि वहां के डाक्टरों ने उन्हें साकेत नगर क्षेत्र में स्थित एक अस्पताल में अपनी जिम्मेदारी पर भेज दिया। वहां उसी शाम को मृतक के पेट का आपरेशन कर दिया गया।

पिता राम आसरे ने बताया कि पहले आपरेशन रात करीब आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक चला था। इसके बाद बेटे को इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में रखा गया। परिवारीजन भोजन करके ग्राउंड फ्लोर में आ गए, जबकि बेटा तीसरी मंजिल पर आईसीयू में ही था। भाई छविराम ने बताया कि देर रात करीब ढाई बजे भाई निर्वस्त्र नीचे आया। कहा कि डाक्टरों ने मेरी किडनी निकाल ली है। मुझे भी मार डालेंगे। इसके बाद तड़पते हुए वहीं पर गिरकर मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन पर किडनी निकालने का आरोप लगाते हुए किदवई नगर पुलिस को जानकारी दी। किदवई नगर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। स्वजन ने पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी की मांग की।

उनसे पांच हजार रुपये शुल्क भी जमा कराया गया था। आरोप है कि पुलिस ने 15 से 20 लाख रुपये लेकर मामले को रफादफा करने का दबाव भी बनाया। आरोप है कि पोस्टमार्टम के दौरान भी तमाम फोन आते रहे, जो शायद अस्पताल के थे। वहीं, थाना प्रभारी किदवई नगर धनेश कुमार ने बताया कि स्वजन ने अस्पताल के डाक्टरों की लापरवाही से मौत होने के आरोप लगाए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट आते ही मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई होगी।   

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