विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बांस-कागज नहीं, यहां सीमेंट से बने रावण का होता है वध; यूपी के कानपुर में 400 सालों से चली आ रही अनोखी परंपरा

Published: Tue, 20 Oct 2026 10:56 AM (IST)

Happy Dussehra: कानपुर के नर्वल स्थित मंधना-पाली में 404 साल पुरानी रामलीला का मंचन हो रहा है, जिसकी शुरुआत मुगलकाल में जहांगीर के शासनकाल में हुई थी। करते हैं।

नर्वल के मंधना में स्थापित रावण की प्रतिमा

नर्वल के मंधना में स्थापित रावण की प्रतिमा

HighLights

  1. कानपुर के मंधना-पाली में 404 साल पुरानी रामलीला।

  2. रावण का पुतला नहीं, सीमेंट की प्रतिमा का वध।

  3. मुगलकाल में जहांगीर के शासनकाल से शुरू हुई परंपरा।

जागरण संवाददाता, कानपुर। नर्वल के मंधना-पाली में 404वें वर्ष रामलीला मंचन चल रहा है। सीमित संसाधनों के बीच अभिनय के माध्यम से कलाकार मानस के मर्म को जीवंत कर मंचन में सजीवता ला देते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि मुगलकाल में जहांगीर के शासनकाल से यहां की लीला की शुरुआत हुई थी।

यहां रावण का पुतला बने न जले। बल्कि सीमेंट की विशालकाय रावण की प्रतिमा स्थापित है। दशहरा वाले दिन श्रीराम व लक्ष्मण काठ के घोड़े पर सवार होकर रावण की प्रतिमा के पास पहुंचते हैं। इसके बाद राम-रावण का युद्ध होता है। रावण का वध होते ही प्रभु राम की जय-जयकार होने लगती है। इसी दिन गांव में मेला भी लगता है।

मंधना निवासी बुजुर्ग सुशील कुमार दीक्षित 'दद्दा' बताते हैं कि वर्ष 1623 में मुगल शासन काल में लीला की शुरुआत की गई थी। गांव व क्षेत्रीय लोग ही मंचन में अभिनय करते हैं। काठ के घोड़े लगभग 150 वर्ष से अधिक प्राचीन हैं। युवा प्रतीक दीक्षित ने बताया नवमी वाले दिन मां काली की मनोहर झांकी के दर्शन होते हैं।

भाजपा प्रदेश कार्यालय प्रभारी भी आते लीला में, बचपन में बनते थे हनुमान

मंधना गांव निवासी व वर्तमान में लखनऊ स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय के प्रभारी, वरिष्ठ भाजपा नेता भारत दीक्षित हर साल नवमी से लेकर लीला के समापन तक गांव में रुकते हैं और लीला में सहभागी बनते हैं। भारत दीक्षित बचपन में यहां की रामलीला में हनुमान बनते थे और भगवान शिव का अद्भुत शृंगार करते थे। उनका शिव शृंगार बहुत प्रसिद्ध था।

यह भी पढ़ें- कानपुर में 35 साल पुराने फर्जी मुठभेड़ केस में 12 पुलिसवालों पर FIR, CBCID जांच में खुलासा; पढ़ें पूरा मामला