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Kanpur Widow Pension: पति की मौत के बाद पेंशन के लिए कलेक्ट्रेट के चक्कर, तीन साल से इंतजार में महिलाएं

Published: Tue, 15 Sep 2026 07:30 PM (IST)

कानपुर में सैकड़ों विधवाएं अपनी पेंशन के लिए महिला कल्याण विभाग और कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रही हैं, कई महिलाओं ...और पढ़ें

कलेक्ट्रेट में जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय के बाहर दस्तावेज साथ लेकर खड़ी महिलाएं। जागरण

कलेक्ट्रेट में जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय के बाहर दस्तावेज साथ लेकर खड़ी महिलाएं। जागरण

HighLights

  1. कानपुर में विधवाएं पेंशन के लिए महिला कल्याण विभाग के चक्कर काट रही हैं

  2. कई महिलाओं की पेंशन एक से तीन साल से रुकी हुई है

  3. तकनीकी खराबी के कारण 14-15 हजार महिलाओं की पेंशन रुकी है

जागरण संवाददाता, कानपुर। महिला कल्याण विभाग से विधवा पेंशन ले पाना आसान नहीं है। यहां कोई महिला तीन साल से तो कोई डेढ़-दो साल से कलेक्ट्रेट की दौड़ लगा रही है। ऐसे ही अन्य दिनों की तरह मंगलवार को भी कलेक्ट्रेट में जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय के बाहर कई महिलाएं पुराने दस्तावेज लेकर खड़ी अपनी बेबसी का दर्द बयां कर रही थीं। इसमें कोई नौबस्ता तो कोई बर्रा से आने वाली महिलाएं शामिल थीं।

जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय के बाहर बैठीं आशा देवी निषाद ने बताया कि वह रामादेवी बाबानगर की रहने वाली हैं। उनकी पेंशन तीन साल से रुकी है, क्यों रोका गया है कार्यालय में ये उन्हें कोई कुछ बता नहीं रहा है। बताया कि वह कलेक्ट्रेट के चक्कर लगाते-लगाते परेशान हो चुकी हैं। ढाई-तीन हजार रुपये किराया-भाड़ा भी खर्च हो चुका है, पर पेंशन मिलना शुरू नहीं हो पाया है। इनके साथ ही बैठीं माया ने बताया कि उनकी पेंशन एक साल से रुकी है। बर्रा बाईपास की

विजय लक्ष्मी ने बताया कि उनकी पेंशन वर्ष 2022 में आनी बंद हो गई थी, तब से वह लगातार जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय आ रही हैं। कई बार फार्म भी आनलाइन कराया, लेकिन उनकी पेंशन दोबारा चालू नहीं हो पाई। बताया कि बर्रा से कलेक्ट्रेट आने में भी 200 रुपये खर्च हो जाते हैं और गरीबी में ये रुपये उनके लिए बहुत कीमत रखते हैं। पेंशन की उम्मीद में वह बार-बार कलेक्ट्रेट आ रही हैं।

रेल बाजार की सायदा खातून और दर्शनपुरवा की शशि पांडेय ने बताया कि फरवरी से पेंशन आनी बंद हो गई है। झकरकटी की राजरानी ने बताया कि उनकी पेंशन मार्च के बाद से नहीं आई है।

कलावती ने बताया कि पेंशन बंद हुए भी छह महीने हो गए हैं। तिलकनगर की कमलादेवी ने बताया कि छह महीने से पेंशन नहीं आई।

सत्यापन में अपात्र मिल चुकी हैं 268 महिलाएं

बताया जा रहा है कि अप्रैल-मई में हुए सत्यापन में 268 महिला पेंशनर अपात्र मिली थीं। इसमें सबसे अधिक 252 पात्र महिलाएं मृतक पाई गई थीं। इसके अलावा 16 अपात्र महिलाएं पेंशनर थीं। जिनके विरुद्ध वसूली की कार्रवाई भी चल रही है। वर्तमान में करीब 81 हजार महिलाओं को पेंशन मिल रही है। विभाग का दावा है कि ये सभी पात्र महिलाएं हैं, जिन्हें पेंशनराशि दी जा रही है।


ये भी जानें

  • 81,006 महिला पेंशनर हैं।
  • 268 मिल चुके हैं अपात्र।
  • 15000 से अधिक महिलाएं पेंशन के लिए भटक रहीं।


जुलाई में पेंशन गई थी। ट्रांजेक्शन के दौरान साफ्टवेयर में कुछ तकनीकी दिक्कत आ गई थी तो 14-15 हजार महिलाओं की पेंशन रुकी है। उम्मीद है कि इसी महीने की 24 या 25 तारीख को पेंशन जारी हो जाएगी। पूर्व में 60-62 हजार महिलाओं को पेंशन मिल चुकी है।
- विकास सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी

 

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