कानपुर, जागरण संवाददाता। उत्तर पश्चिमी बर्फीली हवाओं के कारण 18 वर्ष बाद शहर सबसे ठंडा रहा। कड़ाके की सर्दी और शीतलहर के साथ ही गलन के कारण पूरे दिन लोग ठिठुरते रहे। अलाव जलाने के बावजूद लोग कांपते रहे और थोड़ी देर के लिए निकली धूप भी बेअसर साबित हुई। न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 11.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों ने अगले तीन दिन तक तापमान बेहद कम रहने की संभावना जताई है। 

सीएसए विवि के मौसम वैज्ञानिक डा. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि हिमालय के पास एक पश्चिमी विक्षोभ तेजी से अपना असर दिखा रहा है। इसके चलते पहाड़ों पर बर्फबारी हो रही है और उत्तर पश्चिम से आ रही ये बर्फीली हवाएं मैदानी इलाकों में शीतलहर व गलन बढ़ा रही हैं। रविवार को जहां अधिकतम तापमान 16 डिग्री था। वहीं, सोमवार को दिन का तापमान साढ़े चार डिग्री लुढ़ककर पिछले 18 वर्षों में सबसे कम 11.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे पूर्व वर्ष 2003 में अधिकतम तापमान 10.5 डिग्री सेल्सियस रहा था। हालांकि उस दौरान न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस था।

डा. पांडेय ने बताया कि प्रशांत महासागर में ला-नीना प्रभाव के कारण समुद्र के पानी का तापमान सामान्य से ठंडा हो रहा है। इसके साथ ही जेट स्ट्रीम के कारण भी उत्तर पश्चिम से आ रही बर्फीली हवाओं की मात्रा बढ़ती जा रही है। ये दोनों प्रभाव मिलकर कोहरा और गलन बढ़ा रहे हैं। इसके कारण ही शीतलहर और ठिठुरन बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि 21 तारीख के बाद एक और पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखाई देने की उम्मीद है। तब आसमान में बादल छा सकते हैं और तापमान में मामूली इजाफा हो सकता है, लेकिन दिन में शीतलहर व गलन और सुबह कोहरा व धुंध का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं। 

Edited By: Abhishek Verma