यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 19, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kanpur Weather Update: कोल्ड डे का असर, सर्दी के आगे हार गई धूप; 93 ट्रेनें आईं लेट, ठिठुरते रहे यात्री
UP Weather Update कानपुर में शीत दिवस का असर देखने को मिल रहा है। धूप निकलने के बाद भी कड़ाके ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, कानपुर। शहर में कड़ाके की सर्दी जारी है। बुधवार को अति शीत दिवस का रिकार्ड बनने का असर गुरुवार को भी दिखाई दिया, जब न्यूनतम तापमान ने 1.6 डिग्री का गोता लगाया और रात में 3.4 डिग्री का तापमान सबसे कम रहा। दिन में धूप निकलने के बावजूद शीतलहर जारी रही।
मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को भी दिन में धूप निकलने के आसार हैं लेकिन शीतलहर जारी रहेगी। गुरुवार को शहर में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2.9 डिग्री तक नीचे चला गया। इसका असर दिन में चलने वाली शीतलहर पर पड़ा। सर्द हवा चलने से लोगों ने कड़ाके की सर्दी का अहसास किया।
हवा की औसत रफ्तार कितनी?
हालांकि हवा की औसत रफ्तार एक दिन पहले बुधवार के 3.9 किमी प्रति घंटा के मुकाबले 1.6 किमी प्रति घंटा की गति से कम चली। चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला में दिन में हवा की औसत गति 2.3 किमी प्रति घंटा रही।
मौसम विज्ञानी डा. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि गुरुवार को हवा के बहने की दिशा पूर्व-उत्तर दिशा रही है। मौसम की यही स्थितियां अभी बने रहने के आसार हैं। इससे शुक्रवार को भी सर्दी के साथ शीतलहर भी चलती रहेगी। धूप निकलने के आसार हैं लेकिन शीतलहर चलने के साथ सर्दी का असर अभी दो दिन तक बना रहेगा।
93 ट्रेनें आईं लेट, भूखे-प्यासे यात्री भटके
कोहरे के कारण प्रीमियम और विशेष ट्रेनों की लेटलतीफी से गुरुवार को भी यात्री परेशान हुए। लगभग 93 ट्रेनें देरी से सेंट्रल स्टेशन पहुंचीं। इससे भूखे-प्यासे यात्री प्लेटफार्मों पर दिखाई पड़े। रेलवे के वाणिज्य विभाग ने खानपान के लिए वेंडरों और स्टाल संचालकों को मुस्तैद रखा। लगातार ट्रेनों की लेटलतीफी यात्रियों के लिए और मुश्किल बढ़ा रही है।
यात्री व स्वजन इंतजार के दौरान सर्दी से परेशान हैं। रेलवे के पास कोहरे से निपटने के कोई इंतजाम नहीं हैं। इसलिए यात्रियों को भोजन व खानपान सामग्री मुहैया कराई जा रही है। गुरुवार को श्रमशक्ति, शताब्दी व राजधानी समेत तमाम ट्रेनें देरी से आईं। कुछ ट्रेनें तो सुबह के बजाय शाम को पहुंची, जबकि कई शाम के स्थान पर दूसरे दिन आ पाईं। लंबी दूरी की ट्रेनों में सबसे अधिक समस्या है।
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