Rain Alert: कानपुर में मौसम विभाग की चेतावनी, 24 घंटे में आंधी-तूफान, आकाशीय बिजली गिरने व भारी बारिश की संभावना
कानपुर में 24 सितंबर से लगातार हो रही भारी बारिश से जलभराव और कच्चे मकान गिरने के बाद, मौसम विभाग ...और पढ़ें

HighLights
कानपुर में दो दिन की भारी बारिश से जलभराव और कच्चे मकान गिरे
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में आंधी-तूफान, तेज वर्षा की चेतावनी दी
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की
जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर में 24 सितंबर से लगातार हो रही बारिश से पूरा शहर जलमग्न हो गया है। कई जगहों पर कच्चे मकान गिर गए जिसमें कई लोग दबकर घायल भी हुए। कानपुर के आसपास के जिलों का भी कुछ ऐसा ही हाल रहा। वहीं अब मौसम विभाग की चेतावनी ने और ज्यादा चिंता में डाल दिया है।
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लगातार हुई भारी वर्षा के बाद अब मौसम में धीरे-धीरे सुधार के आसार हैं। अगले 24 घंटे में शहर में मौसम मुख्य रूप से साफ से आंशिक बादलों वाला रहने का अनुमान है। हालांकि मौसम विभाग ने आंधी-तूफान, तेज वर्षा और बिजली गिरने की संभावना भी जताई है। ऐसे में वर्षा से राहत के बीच मौसम का मिजाज पूरी तरह स्थिर रहने की उम्मीद नहीं है।
मौसम विशेषज्ञ डा. एसएन सुनील पांडेय के अनुसार, रविवार रात आसमान मुख्य रूप से साफ रह सकता है। न्यूनतम तापमान 22 से 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। रात में वर्षा की संभावना बेहद कम रहेगी। सोमवार को दिन में बीच-बीच में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं। अधिकतम तापमान 29 से 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।
पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा से चार से छह मील प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। वातावरण में नमी का स्तर 70 से 95 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। भारी वर्षा के बाद वातावरण में बनी नमी के कारण उमस का असर भी महसूस हो सकता है।
आंधी-वर्षा की चेतावनी से सतर्कता जरूरी
मौसम में सुधार के अनुमान के बावजूद आंधी-तूफान, तेज वर्षा और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए सावधानी जरूरी है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने की अपील की है। प्रशासन ने बहुत जरूरी होने पर ही घर से निकलने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी है।
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धान समेत खरीफ फसलों पर संकट
24 सितंबर से लगातार हो रही भारी बारिश ने खेतों में खड़ी खरीफ फसलों पर संकट खड़ा कर दिया है। धान, गन्ना, मक्का, उर्द, मूंग, तिल और सब्जियों की फसलें बारिश के कारण खेत में गिर गई हैं। सबसे ज्यादा चिंता उन धान की फसलों को लेकर है, जिनमें बालियां निकल चुकी हैं और फसल पकने के कगार पर है। लगातार वर्षा से दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ गिरी फसल में कीट व रोग का प्रकोप बढ़ने की आशंका है।
30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका
चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विजय यादव के अनुसार, फसलों की उपज में 25 से 40 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि पहले बोई गई धान की फसल में 30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है। परिपक्वता के समय लगातार बारिश होने से धान के दानों में अंकुरण शुरू हो सकता है। अधिक लंबाई वाली प्रजातियों के गिरने से नुकसान और बढ़ेगा।
गिरी धान में कीट बढ़ने का खतरा
प्रो. यादव ने बताया कि खेत में गिर चुकी धान की फसल में लगातार नमी रहने से कीट और रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। बालियां निकलने के बाद पकने के कगार पर पहुंची फसल में वर्षा से दानों की गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। लगातार नमी के कारण फसल में हल्दी रोग की संभावना भी बढ़ गई है। जलभराव वाले खेतों में फसल डूबने से उत्पादन मिलना मुश्किल होगा।
गन्ना भी गिरा, दलहनी फसलों को नुकसान
लगातार वर्षा से गन्ने की फसल भी गिर गई है। जिन किसानों ने पहले ही गन्ने की बंधाई कर दी थी, उनकी फसल अपेक्षाकृत कम गिरी, इसलिए नुकसान भी कम होगा। उर्द, मूंग और अरहर जैसी दलहनी फसलों तथा तिल जैसी तिलहनी फसल में भी नुकसान अधिक है। कम अवधि वाली खरीफ फसलें तैयार होने के करीब थीं, इसलिए इनमें नुकसान ज्यादा होने की आशंका है।
मचान और मेड़ पर बोई गई सब्जियों में अपेक्षाकृत कम नुकसान होगा, जबकि फूलों की फसल वर्षा से काफी प्रभावित हुई है। नए रोपित बागों में जलभराव से पौधों के मरने का खतरा है। प्रो. विजय यादव ने किसानों को सलाह दी कि जहां तक संभव हो, खेतों और नए रोपित बागों से अतिरिक्त पानी की निकासी जल्द करें।
