Nagar Nigam Tender Scam: कानपुर में कूड़ा निस्तारण में भी बड़ा खेल, प्रभावी नेता के दबाव में आगरा के ठेकेदार को मिला था काम
कानपुर नगर निगम में कूड़ा निस्तारण ठेकों में भी भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। आगरा के ठेकेदार रवि लवानिया को ...और पढ़ें

HighLights
कूड़ा निस्तारण ठेकों में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ
आगरा के रवि लवानिया को नियम विरुद्ध ठेका
प्रभावी नेता के दबाव में मिली दोगुनी दरें
जागरण संवाददाता, कानपुर। नगर निगम के विकास कार्यों से जुड़े ठेकों में ही केवल भ्रष्टाचार नहीं हुआ, बल्कि कूड़ा निस्तारण से जुड़े ठेकों में भी खूब लूट हुई। पुलिस की जांच में आगरा के ही एक और दागी ठेकेदार रवि लवानिया का नाम सामने आया है। उसकी फर्म को टेंडर देने के लिए जिम्मेदारों ने नियम-कायदों को ताख पर रख दिया था।
ठेकेदारों के सिंडिकेट का फरार सरगना गोविंद शर्मा ही उसे लाया था। बड़ी बात यह है कि एक प्रभावी नेता के दबाव में उसे लगातार ठेके दिए गए और आननफानन भुगतान भी कराया गया। पुलिस की स्थानीय खुफिया इकाई एलआइयू को जनवरी में ही इसकी भनक लग चुकी थी और वह लगातार नजर भी रखे थी।
अब पुलिस आयुक्त ने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर जांच करने को कहा है। नगर निगम में सात बड़े ठेकेदारों की फर्में ब्लैक लिस्टेड किए जाने के साथ ही ठेकेदारों के सिंडीकेट के सरगना आगरा निवासी गोविंद कुमार शर्मा के अलावा संदीप जैन, रज्जन बाजपेई, दिलीप बाजपेई, अजय बाजपेई, प्रार्थना शुक्ला के खिलाफ स्वरूप नगर में पांच व फजलगंज थाने में एक मुकदमा दर्ज कराया गया था। रज्जन और संदीप जैन जेल भेजे जा चुके हैं, गोविंद फरार है।
प्रकरण में एसआइटी जांच कर रही है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया रवि लवानिया की फर्म एनवायरमेंटल टेक्नो फर्म को सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का टेंडर दिलाने के लिए दबाव की बात सामने आई थी। रवि लवानिया पर टेंडर डालने वाले अन्य लोगों को धमकाने का भी आरोप है।
पिछले दिनों एक शिकायत मिली, जिसमें आरोप लगा कि रवि की फर्म को 400 रुपये प्रति टन कूड़ा निस्तारण के हिसाब से मिलने वाला टेंडर 800 रुपये प्रति टन के हिसाब से दिया गया। टेंडर मिलने के बाद आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों को वहां से हटा दिया गया।
आरोप है कि एक प्रभावी नेता ने नगर निगम अधिकारियों पर दबाव डाला। वहीं, नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि जो पुराना कूड़ा है, उसके निस्तारण के लिए करीब 400 रुपये मीट्रिक टन के हिसाब से भुगतान दिया जाता है, जबकि रोज निकलने वाले कूड़े के लिए 891 रुपये के हिसाब से दिया जा रहा है।
पहले यहां 90 आउटसोर्सिंग कर्मी काम रहे थे। उन्हें दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने की बात कही जा रही है। एनवायरनमेंटल टेक्नो कंपनी के तकनीकी सलाहकार अनिल वर्मा ने बताया कि ये भ्रामक जानकारी है। पीपीपी के तहत काम कराया जा रहा है। जो दस्तावेज मांगे जाएंगे, वह दिए जाएंगे।
