कानपुर, जेएनएन। बारिश की हर बूंद को सहेजने के लिए शासन ने केडीए को आदेश दिए हैं कि तय क्षेत्रफल वाले भूखंडों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू कराया जाए। पहले चरण में पांच हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चेक करने के आदेश दिए हैं।

इस बाबत प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार ने बुधवार को केडीए के अफसरों के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग की। उन्होंने बरसात से पहले इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू कराने को कहा। उन्होंने कहा कि हर हाल में पांच हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बने निर्माण में वर्षा जल संचयन की जांच कराई जाए। जिन इमारतों में न हो, उसमें व्यवस्था कराई जाए। तीन सौ वर्ग मीटर क्षेत्रफल से ज्यादा की इमारत में रेन वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम लागू होना चाहिए। इसी के आधार पर नक्शा पास किया जाता है।

यह व्यवस्था करने के दिए आदेश

नई योजना बनाने से पूर्व क्षेत्र का जियोलॉजिकल व हाइड्रोलॉजिकल सर्वेक्षण करा भूजल की रीचार्जिंग के लिए उपयुक्त पद्धति को अपनाया जाए।

- दस एकड़ से अधिक क्षेत्रफल की योजनाओं के लेआउट में पार्क और खुले क्षेत्र के लिए प्रस्तावित भूमि के तहत वर्षा जल संरक्षण का निर्माण किया जाएगा।

-पार्क व खुले क्षेत्र के एक कोने में रीचार्ज पिट बनाया जाए।

-पार्क में पक्का निर्माण पांच फीसद से ज्यादा नहीं किया जाए।

- पौधारोपण में ऐसे पौधे लगाए जाएं जो कम पानी में ही गर्मी में हरे भरे रहें।

- योजनाओं में वर्षा जल संचयन का निर्माण कराया जाए।

-तीन सौ वर्ग मीटर क्षेत्रफल में रीचार्ज सिस्टम लागू कराया जाए।

-तालाब और जलाशय साफ करा जीआइएस मैङ्क्षपग कराई जाए।

-14 अप्रैल और 15 अगस्त को जल संरक्षण पर गोष्ठी कराई जाए।

-नए जलाशयों का निर्माण कराया जाए।

लोगों ने कही ये बात

  • दैनिक जागरण के सहेज लो हर बूंद अभियान से प्रेरणा लेते हुए वाटर प्यूरीफायर से रोज शुद्ध पानी के साथ बहने वाले पानी को बचाना शुरू कर दिया। इस पानी का प्रयोग घरेलू कामों में करते हैं। -हाजी फरहत हुसैन, सिविल लाइंस
  • हर व्यक्ति को पानी के प्रति जागरूक होना होगा। बारिश के पानी को बचाने के लिए सभी को सजग होना होगा। हर घर में बारिश के पानी को बचाने की व्यवस्था हो जाए तो लाखों लीटर पानी बच जाएगा। -सौरभ मिश्र, शास्त्री नगर
  • हर सरकारी इमारत और पार्कों में वर्षा जल संचयन व्यवस्था हो जाए तो कई लाख लीटर बारिश का पानी बचाया जा सकता है। साथ ही भूगर्भ जल की बर्बादी लोग न करें। पानी का मोल समझ जाएंगे तो बर्बाद नहीं करेंगे। -तिन पाल, गड़रियनपुरवा

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