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SC के सख्त आदेश के बाद जागा कानपुर नगर निगम; रूमा में बनेगा आवारा कुत्तों का शेल्टर होम, खूंखार कुत्तों को 'दया-मृत्यु'

Published: Tue, 19 May 2026 09:51 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कानपुर नगर निगम आवारा कुत्तों के प्रबंधन में जुट गया है। रूमा में 5 ...और पढ़ें

ये फोटो एआई जनरेटेड है।

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HighLights

  1. सार्वजनिक स्थान से कुत्ते हटने के बाद संबंधित विभाग की होगी जिम्मेदारी न आए कुत्ते

  2. स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन से पकड़े गए कुत्ते शेल्टर होम में रखे जाएगे

  3. 1.30 लाख कुत्तों में 64 हजार का बंध्याकरण, दो एबीसी सेंटर बने और दो की जरूरत

जागरण संवाददाता, कानपुर। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा व खतरनाक कुत्तों को पकड़ने के साथ ही आदेश दिया है कि लोगों को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे खतरनाक कुत्तों को दया मृत्यु दे सकते है। इसके अलावा स्कूल, अस्पतालों, बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन समेत सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को पकड़ने के साथ ही शेल्टर होम में रखा जाए।

इन जगहों के विभागों के विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी होगी कि एक बार कुत्तों को पकड़े जाने के बाद अंदर न प्रवेश होने दिया जाए। इसको लेकर नगर निगम ने तैयारी शुरू कर दी है। रूमा में पांच एकड़ जमीन पर एक हजार कुत्तों को रखने का शेल्टर होम का प्रस्ताव तैयार किया है। चार करोड़ रुपये से बनने वाले शेल्टर होम का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।

इसके अलावा 1.30 लाख कुत्तों में 64 हजार कुत्तों का बंध्याकरण का दावा किया है। अभी दो एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी)सेंटर है और दो एबीसी सेंटर की जरूर है। इसके बाद ढाई साल में सभी कुत्तों का बंध्याकरण हो जाएगा और जनसंख्या में नियंत्रण होगा।

कुत्तों का हमला दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। रोज कुत्ते के काटे करीब 150 मरीज आ रहे है। अभी नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत जहां से नगर निगम का अमला कुत्तों को पकड़ता था वहीं छोड़ देता था। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, अस्पतालों, बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन समेत सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को पकड़ने के साथ ही शेल्टर होम में रखा जाए। अभी नगर निगम के पास किशनपुर में 50 कुत्तों के रखने का शेल्ट होम है। करीब पांच हजार कुत्तों को रखने के लिए शेल्टर होम की जरूरत है। अभी एक हजार कुत्तों के रखने के लिए शेल्टर होम बनाने का प्रस्ताव दिया है।


नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा आरके निरंजन ने बताया कि एक बार स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के परिसर से कुत्तों को पकड़ने के बाद वहां के विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी होगी कि छह फीट बाउंड्रीवाल का निर्माण कराए। एक नोडल अफसर तैनात किया जाए। गार्ड लगाया जाए। बोर्ड लगे जिसमें नोडल अफसर का नाम दर्ज हो। इसके बाद कुत्तों को प्रवेश न होने दिया जाए। इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

अभी फूलबाग व जाना किशनपुर में स्थित एबीसी सेंटर में रोज 70 कुत्तों का बंध्याकरण हो रहा है। एक माह में 21 सौ कुत्तों का बंध्याकरण किया जा रहा है। दो एबीसी सेंटर और बन जाएगे तो ढाई साल में सभी कुत्तों का बंध्याकरण हो जाएगा। अभी 64 हजार कुत्तों का बंध्याकरण हो चुका है। खतरनाक कुत्तों को मारे जाने (दया मृत्यु) दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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