कानपुर के 52 गुरुद्वारों में GEN-Z और जेन-Alpha को पढ़ाया जाएगा भारतीय संस्कृति का पाठ
कानपुर में सिख समाज जेन जी और जेन अल्फा को अपनी संस्कृति, इतिहास और गुरुमुखी भाषा से जोड़ने की पहल कर रहा है।
-1792837140765_m.webp)
एआई जनरेटेड तस्वीर।
HighLights
जेन जी, जेन अल्फा को संस्कृति, संस्कार और इतिहास से जोड़ना।
कानपुर के 52 गुरुद्वारों में गुरुमुखी, भारतीय संस्कृति का प्रशिक्षण।
सिख समाज महिला विंग की नई पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण पहल।
जागरण संवाददाता, कानपुर। बदलते परिवेश के बीच सिख समाज के जेन जी (1997 से 2010 के बीच जन्मे बच्चे) और जेन अल्फा (2010 के बाद पैदा हुए बच्चे) को संस्कार, संस्कृति से जोड़ने की पहल शुरू की गई है। इसमें बड़ों को भी भौतिकवादी सोच छोड़कर जड़ों से जुड़े रहने की सीख दी जा रही है।
जिले के 52 गुरुद्वारों में इसके लिए सिख समाज महिला विंग प्रतिदिन 30 से 50 के बैच को मातृभाषा गुरुमुखी पढ़ने-लिखने, भारतीय संस्कृति के मर्म को समझाने का काम शुरू करने जा रही है। 15 दिन के विशेष प्रशिक्षण से उन्हें इसमें पारंगत किया जाएगा।
सिख समाज में गुरुमुखी लिखने व पढ़ने वाले बच्चों व युवाओं की संख्या भी घट रही है। इसको लेकर सिख समाज चिंतित है। सिखों को अपने इतिहास व संस्कृति से जोड़े रखने के लिए जेन जी व जेन अल्फा का चयन किया गया है। सिख समाज महिला विंग की अध्यक्ष जसबीर कौर ने बताया कि इसका उद्देश्य बच्चों की नींव को मजबूत करना, गुरुमुखी को घर-घर पहुंचाना है।
बच्चों को सिखों के इतिहास से अवगत कराना है। उन्होंने बताया कि स्कूलों में भी जाकर बच्चों को शिक्षा देंगे।नए साल तक इसे प्रदेश के साथ ही देश स्तर पर सिख संगठनों के साथ मिलकर प्रारंभ कर दिया जाएगा।
यह भी पढ़ें- 'हम हैं भारत के असली जेन अल्फा और जेन जी...' का मेरठ में उद्घोष; युवा पीढ़ी से गुमराह न होने की अपील
