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कानपुर में रिटायर्ड टीचर से बड़ी साइबर ठगी, 3 साल तक जाल में फंसाए रखा; खाते से उड़ाए 43 लाख

Published: Sat, 25 Jul 2026 05:00 AM (IST)

कानपुर के गुजैनी में एक सेवानिवृत्त शिक्षक प्रेमदत्त शर्मा साइबर ठगों के झांसे में आकर तीन साल में 43 लाख रुपये गंवा बैठे।

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. सेवानिवृत्त शिक्षक ने साइबर ठगों को दिए 43 लाख रुपये।

  2. बीमा पॉलिसी और बोनस के लालच में फंसाए गए शिक्षक।

  3. बैंक मैनेजर की सतर्कता से ठगी का खुलासा हुआ।

जागरण संवाददाता, कानपुर। गुजैनी में साइबर ठगों ने तीन साल तक सेवानिवृत्त शिक्षक को अपने चंगुल में फंसाकर 43 लाख रुपये हड़प लिए। ठग उन्हें बीमा पॉलिसी लेने और समय पूरा होने पर रकम खाते में ट्रांसफर कराने का झांसा देकर शिकार बनाते रहे। और रुपयों की मांग पर एफडी तुड़वाने के लिए बैंक पहुंचे तो मैनेजर को शंका हुई, जिसके बाद ठगी होने का अहसास हुआ।

अंबेडकर नगर निवासी प्रेमदत्त शर्मा गुमटी स्थित जीएन इंटर कॉलेज से शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हैं। परिवार में पत्नी संतोष और दो बेटे सर्वेश व विवेक हैं। बड़ा बेटा सर्वेश लखनऊ में सरकारी अस्पताल में फॉर्मेसिस्ट के पद पर हैं, जबकि छोटा बेटा विवेक नोएडा में एक मल्टीनेशल कंपनी में इंजीनियर है।

प्रेमदत्त पत्नी के साथ यहां रहते हैं। प्रेमदत्त ने बताया कि उन्होंने पीएनबी मेटलाइफ से एक पॉलिसी ले रखी थी, जो वर्ष 2026 में पूरी होनी थी। वर्ष 2024 में उनके पास एक अंजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताया और कहा कि उन्हें नुकसान से बचने के लिए एजेंट कोड बदलना होगा। तरीका पूछने पर बताया कि 36 हजार रुपये की एक और पालिसी लेते ही कोड बदल जाएगा। इससे उन्हें मोटा लाभांश मिलेगा, जिससे लालच में आकर उन्होंने बताए गए खाते में रकम ट्रांसफर कर दी।

इतना ही नहीं ऑनलाइन उन्हें पॉलिसी के दस्तावेज भी भेज दिए गए। करीब तीन महीने बाद एक युवती ने कॉल की। उसने भी खुद कंपनी प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उनकी पॉलिसी नंबर पर बोनस कार्ड निकला है। अगर, वह दो लाख 75 हजार रुपये जमा करा देंगे तो उनकी पॉलिसी पूरी होने पर उन्हें 69 लाख रुपये मिलेंगे।

उन्होंने सिर्फ एक लाख 65 लाख रुपये खाते में होने की बात कही तो उसने कहा कि बाकी की रकम वह जमा कर देगी, लेकिन किसी को कुछ नहीं पता चले। इसके बाद वह रकम भी बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दी। करीब आठ महीने बाद फिर उसी युवती ने उन्हें कॉल की और कहा कि आपकी पॉलिसी में उसने रकम जमा की थी। इससे उसकी खतरे में पड़ गई है।

किसी ने उनके बीच की बातचीत को रिकॉर्ड करके मैनेजर को भेज दिया है। इससे आपकी पॉलिसी खत्म हो जाएगी और आपकी रकम डूब जाएगी। इसके बाद फोन मैनेजर ने ले लिया और कहा कि आपने गलती की है। बुजुर्ग है, इसलिए डेढ़ लाख रुपये और जमा करने पड़ेंगे। इसके बाद ही आपको पालिसी की रकम मिल पाएगी।

इस पर डर करके उन्होंने बताए गए खाते में रकम ट्रांसफर कर दी। कुछ दिन बाद उसी मैनेजर ने फोन करके बताया कि आपकी पॉलिसी का मामला बीमा विनियामक में चल गया है, जिसका फैसला आने के बाद ही यह तय होगा कि आपको आपकी रकम मिलेगी या नहीं।

बकायदा मई 2026 में नोटिस भेजा गया, जिससे वह घबरा गए और फिर उसने कहने पर 18 जून तक आरोपित टीडीएस आदि जमा करने का झांसा देकर कुल 43.15 लाख रुपये ऐंठ लिए। इसके बाद भी और रुपयों की मांग की तो वह एफडी तुड़वाने के लिए बैंक पहुंचे, जहां मैनेजर के कारण पूछने पर सबकुछ सच बता दिया।

इससे ठगों के चंगुल में फंसे होने का पता चला। गुजैनी थाना प्रभारी राजन शर्मा ने बताया कि काफी समय से ठग सेवानिवृत्त शिक्षक को फंसाकर रुपये ऐंठते रहे हैं। मोबाइल नंबरों के आधार पर आरोपितों की तलाश करने का प्रयास किया जा रहा है।

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