कानपुर, जागरण संवाददाता। कोरोना संक्रमितों को दवा व खानपान का सामान पहुंचाने वाले व्यक्ति को संक्रमण से बचाने के लिए राजकीय पालीटेक्निक कालेज के छात्र-छात्राओं ने रोबोट कार तैयार की है। यह कार मोबाइल फोन से संचालित होगी और इसमें सामान रखकर मरीज तक पहुंचाया जा सकता है। शुक्रवार को पालीटेक्निक में संस्थान और डीएमएसआरडीई की ओर से आयोजित टेक इवेंटो प्रदर्शनी में इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग के विद्यार्थी सुमित गुप्ता और स्मृति कुशवाहा ने यह कार प्रदर्शित की। उन्होंने बताया कि कार में माइक्रो कंट्रोलर, पीसी मोटर, ब्लूटूथ, मोटर ड्राइवर व आइसी लगी है। इसका संचालन ब्लूटूथ से हो सकता है। 

राजकीय पालीटेक्निक में सुमित गुप्ता व स्मृति की ही तरह प्रदर्शनी में करीब 100 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का विभिन्न उपकरण बनाकर प्रदर्शन किया। डीएमएसआरडीई ने भी अपने अत्याधुनिक रक्षा उत्पादों को प्रदर्शित किया, जिन्हें देखकर छात्र रोमांचित हो गए।

प्रदर्शनी का उद्घाटन डीएमएसआरडीई के अपर निदेशक डा. डीएम त्रिपाठी और संस्थान के प्रधानाचार्य मुकेश चंद्र आनंद ने किया। प्रदर्शनी में केमिकल इंजीनियरिंग की छात्रा शिवानी, अनुष्का शुक्ला, प्रिया ने मिलकर हाइड्रो डिस्टिलेशन प्रोसेज के जरिये गुलाब के तेल का निष्कर्षण किया। छात्र आशीष और अर्पित कुमार ने भी स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक (छड़ी) बनाकर उसे प्रदर्शित किया। छात्रों ने बताया कि यह छड़ी  अंधेरा व पानी होने पर दृष्टिहीन व्यक्ति को बीप की आवाज के साथ संकेत देगी। इसमें आर्डिनो नैनो विथ अल्ट्रासोनिक सेंसर, स्पीकर, डार्कनेस सेंसर, वाटर सेंसर और एलडीआर लगाया गया है। छात्रा साक्षी पाल ने स्पीड डिटेक्शन डिवाइस प्रदर्शित किया। यह सड़क पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार के बारे में पता करेगी। इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की छात्रा स्मृति मिश्रा, शिवानी मिश्रा व नेहा ने आटोमैटिक स्ट्रीट लाइट माडल बनाया। इससे अंधेरा होने पर स्ट्रीट लाइट खुद ही जल जाएंगी और रोशनी होने पर बंद हो जाएंगी। छात्र घनश्याम, गौरव, आयुष ने साइकिल चलाकर खाद्यान्न पीसने की मशीन प्रदर्शित की तो अजय कुमार, संदीप व रमाकांत ने हवा से बिजली उत्पादन की तकनीकी बताई। 

डीएमएसआरडीई के एंटी माइन्स बूट व बुलेटप्रूफ जैकेट ने किया आकर्षित

डीएमएसआरडीई ने भी अपने रक्षा उत्पादों को पेश किया। इसमें बार्डर पर जवानों को दुश्मन की माइंस से बचाने के लिए बनाए गए बूट एंटीमाइन इंफेंट्री और गोलियों से बचाने के लिए बनाई गई नौ किलोग्राम वजन की बुलेटप्रूफ जैकेट ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कई शिक्षकों ने जैकेट व बूट पहनकर भी देखे और फोटो खिंचवाई। डीएमएसआरडीई के अपर निदेशक डा. डीएम त्रिपाठी ने बताया कि यह बूट एनबीसी प्रोडक्ट से बनाया गया है। इसमें वाल डाले गए हैं। जवान का पैर जैसे ही माइंस पर पड़ेगा, वैसे ही वह हल्की सी उछाल लेगा। इससे जवान को गंभीर चोट नहीं आएगी। दोनों पैरों के जूतों का वजन करीब तीन किलोग्राम है। यही नहीं, नौ किलो की बुलेटप्रूफ जैकेट अब तक की सबसे हल्की जैकेट है। इससे पूर्व 14 व 10 किलो की जैकेट बनी थी। सुनहरे रंग की पन्नी सा प्रतीत होने वाला सर्वाइवल ब्लैंकेट भी लोगों ने ओढ़कर देखा। विशेषज्ञों ने बताया कि ग्लेशियर में जहां तापमान शून्य से 30-35 डिग्री नीचे होता है, वहां यह ब्लैंकेट घायल जवानों को आराम देगा। इसे लपेटने से शरीर का तापमान नियंत्रित होगा। इसके साथ ही ब्लास्ट प्रोटेक्शन सूट, बैलेस्टिक हेलमेट आदि उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए। 

Edited By: Abhishek Verma