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Kanpur: बर्फीले इलाकों में अब स्वदेशी दस्ताने पहनेंगे सेना के जवान, यूरोपीय देशों से खत्म होगी निर्भरता

सियाचिन व ग्लेशियर पर माइनस 50 डिग्री तक के तापमान में सरहद की सुरक्षा में तैनात सैनिक अब स्वदेशी माड्यूलर दस्ताने पहन कर हथियारों पर पकड़ और मजबूत रख पाएंगे। एक साल से चल रहे अनुसंधान के बाद कंपनी के इंजीनियरों को उत्पाद विकसित करने में सफलता मिली है।

By Jagran NewsEdited By: Abhishek PandeyPublished: Mon, 27 Mar 2023 04:11 PM (IST)Updated: Mon, 27 Mar 2023 04:11 PM (IST)
1 साल के अनुसंधान के बाद मिली कामयाबी

विवेक मिश्र, कानपुर। सियाचिन व ग्लेशियर पर माइनस 50 डिग्री तक के तापमान में सरहद की सुरक्षा में तैनात सैनिक अब स्वदेशी माड्यूलर दस्ताने पहन कर हथियारों पर पकड़ और मजबूत रख पाएंगे। दुश्मनों पर गोली चलाते समय उन्हें सर्द हवा के थपेड़े परेशान नहीं करेंगे। रक्षा मंत्रालय के डीपीएसयू ट्रूप कंफर्ट्स लिमिटेड कंपनी (टीसीएल) ने आयुध निर्माणी में अनुसंधान कराकर स्वदेशी उत्पाद निर्मित कराया है।

1 साल के अनुसंधान के बाद मिली कामयाबी

एक साल से चल रहे अनुसंधान के बाद कंपनी के इंजीनियरों को उत्पाद विकसित करने में सफलता मिली है। कंपनी ने सेना के अधिकारियों को दस्ताने परीक्षण के लिए दिए हैं। नए वित्तीय वर्ष से इसकी आपूर्ति शुरू करने की तैयारी है। टीसीएल के सीएमडी एसके सिन्हा के निर्देशन में विशेषज्ञों ने आयुध निर्माणी में तैयार हुआ स्वदेशी माड्यूलर दस्ताने की बाहरी परत चमड़े के साथ नायलान की है तो अंदर के हिस्से को नायलान व पतले कपड़े से बनाया गया है।

सेना कर रही दस्तानों का परीक्षण

दस्तानों के सैंपल की टेस्टिंग महाराष्ट्र में वूल रिसर्च एसोसिएशन की टेक्सटाइल टेस्टिंग लैब में कराई गई। विशेषज्ञों ने माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तापमान और 40 किमी प्रति घंटा के वायु दबाव में इसका परीक्षण करके गुणवत्ता की कसौटी पर खरा पाया। सेना स्वदेशी दस्तानों का परीक्षण कर रही है। आर्डर मिलने के बाद आपूर्ति शुरू की जाएगी।

नेपाल से आर्डर मिलने की खुली राह

टीसीएल के अफसरों ने नेपाल के सैन्य और पुलिस के उच्चाधिकारियों को सैन्य उत्पादों की विशेषताओं व तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। नेपाल के अधिकारियों ने सैन्य उत्पादों को काफी पसंद किया। टीसीएल को नेपाल से आर्डर मिलने की राह खुल गई है। यूरोपीय देशों पर से खत्म होगी निर्भरता अधिकारी बताते हैं कि सेना को अभी तक सैन्य साजो सामान के लिए यूरोपीय देशों पर निर्भर रहना पड़ता था।

यूरोपीय देशों से खत्म होगी निर्भरता

आयुध उपस्कर में बूट क्रैम्पन, बूट मल्टीपर्पस, बर्फीले क्षेत्रों के लिए वर्दी सहित अन्य सामान के लिए यूरोपीय देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मुहिम के तहत अब देश में अनुसंधान करके उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं।

आयुध निर्माणियों में लगातार अनुसंधान व विकास पर काम हो रहा है। सैनिकों के लिए माड्यूलर ग्लव्स, बूट क्रैम्पन, बूट मल्टीपर्पज, सात लेयर का हिमवीर सूट सहित नए उत्पाद तैयार किए हैं। सेना इनका विषम परिस्थितियों में परीक्षण कर रही है। जल्द आपूर्ति शुरू होने की संभावना है। राजीव शर्मा, महाप्रबंधक (परिचालन), टीसीएल, कानपुर


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