कानपुर में दोषमुक्त होने के बाद भी 3 साल जेल में रहा दिव्यांग पप्पू, गंवाई आंख की रोशनी
कानपुर में जेल प्रशासन की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहां दोषमुक्त होने के बावजूद पप्पू को तीन साल तक जेल में रहना पड़ा।

अब वकील कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
HighLights
पप्पू को दोषमुक्त होने के बाद भी तीन साल जेल में रखा गया।
जेल में रहने के दौरान उसने एक आंख की रोशनी खो दी।
वकील लापरवाही के लिए कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की मांग करेंगे।
जागरण संवाददाता, कानपुर। दुष्कर्म और हत्या के एक 38 साल पुराने मामले में जेल प्रशासन की बेहद गंभीर और अमानवीय लापरवाही सामने आई है। करीब तीन साल पहले हाई कोर्ट से दोषमुक्त किए जाने के बावजूद आरोपित पप्पू को तीन साल तक जेल की सलाखों के पीछे गुजारना पड़ा।
वह तो भला हो दो संवेदनशील अधिवक्ताओं का, जिनके कारण आखिरकार उसे जेल से रिहाई मिल सकी। हालांकि, इस दौरान जेल प्रशासन की लापरवाही के चलते पप्पू ने एक आंख की रोशनी खो दी। वह पहले से पैर से दिव्यांग था और दूसरा पैर भी खराब हो गया।
अपनी तरह के विरलतम माने जाने वाले इस मामले में अब दोनों अधिवक्ता विधिक कार्यवाही शुरू करने जा रहे हैं, ताकि उस दोषी का पता चल सके, जिसकी वजह से पप्पू को तीन साल तक अवैध हिरासत में जेल में रहना पड़ा। वे उसके लिए आर्थिक मुआवजे की मांग भी करेंगे।
पप्पू की रिहाई में निर्णायक भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता आयुष अग्रवाल और तान्या दीक्षित के मुताबिक, मामला वर्ष 1988 का है। चकेरी के शिव कटरा में 10 साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। बच्ची के पिता की तहरीर के अनुसार, उनका बेटा और बेटी पानी की टंकी के पास खेल रहे थे। तभी सांवले रंग का एक लड़का आया और अपना नाम ‘पप्पू’ बताया।
वह खरगोश पकड़वाने के बहाने बच्ची और उसके साथ खेल रहे अन्य बच्चों को मिलिट्री फार्म के पास एक सुनसान घर ले गया। उसने पूछा कि खरगोश पहले कौन लेगा। बच्ची के हाथ उठाने पर वह उसे अंदर ले गया। कुछ देर बाद चीखने और रोने की आवाजें आईं। परिवार के लोग पहुंचे तो बच्ची मृत मिली। उसकी दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई थी।
इस मामले में पुलिस ने पप्पू को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वर्ष 1991 में अपर सत्र न्यायाधीश-सात की अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई। नौ फरवरी 1993 को हाई कोर्ट के आदेश पर वह जमानत पर रिहा हुआ। बाद में दो दशकों तक अदालत में पैरवी के लिए न पहुंचने पर उसके खिलाफ जमानती वारंट जारी हुआ।
पुलिस को पता चला कि वह घर बेचकर कहीं चला गया है। फिर गैर-जमानती वारंट जारी हुआ और गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेज दिया गया। इधर, अदालत ने उसकी पैरवी के लिए न्याय मित्र नियुक्त किया। 22 अगस्त 2023 को न्यायमूर्ति सैयद आफताब हुसैन रिजवी और न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने निचली अदालत का आदेश पलटकर पप्पू को दोषमुक्त करते हुए रिहाई का आदेश दिया। लेकिन यह आदेश कहां खो गया, किसी को पता नहीं चला।
शिव कटरा निवासी पप्पू के एक पड़ोसी ने जब मिलाई के लिए दोनों अधिवक्ताओं से संपर्क किया, तब मामला सामने आया। तमाम विधिक कार्यवाहियों के बाद दो नवंबर को वह जेल से रिहा हो सका।
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