कानपुर, जागरण संवाददाता। कानपुर लिटरेचर सोसायटी की ओर से चार व पांच दिसंबर को दो दिवसीय कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन चार व पांच दिसंबर को गौर हरि सिंघानिया इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च में किया जा रहा है। इसमें प्रख्यात कवि, साहित्यकार, गायक, अभिनेता और फिल्म डायरेक्टर अपनी कृतियों से लोगों को रूबरू कराएंगे। साथ ही साहित्य के क्षेत्र में उन्नति को लेकर विचार विमर्श करेंगे।

फेस्टिवल का आयोजन पहली बार वर्ष 2018 में हुआ था। उसमें सोनीपत स्थित अशोका विवि के कुलपति प्रो. रुद्रांशु मुखर्जी ने सन 1857 की क्रांति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी थी। साथ ही गायक पीयूष मिश्रा, पौराणिक विज्ञानी उत्कर्ष पटेल ने सीता पर व्याख्यान दिया था। वर्ष 2019 में तुषार गांधी ने बा और बाबू पर वक्तव्य दिया और मशहूर अभिनेता आशुतोष राणा और लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने भी शिरकत की थी। पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते उत्सव का आयोजन नहीं हुआ था, लेकिन इस बार आजादी के अमृत महोत्सव को ध्यान में रखते हुए उत्सव को बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। सोसायटी की कन्वीनर डा. अंजली तिवारी ने बताया कि इस वर्ष दो दिन का कार्यक्रम हो रहा है। चार दिसंबर को मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह पर बनी दो घंटे की फिल्म का प्रदर्शन होगा। इसमें मुंबई से फिल्म के डायरेक्टर ब्रह्मानंद सिंह भी मौजूद होंगे। इसके बाद आजादी के अमृत महोत्सव के तहत जिन्हें नाज है हिंद पर वो यहां हैं कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें कानपुर के क्रांतिकारियों की कहानी बताई जाएगी। यही नहीं, आजादी के दौर की जिन नजमों को अंग्रेजों ने जब्त कर लिया था, उन्हें भी पेश किया जाएगा।

मशहूर अभिनेता व कवि राजेंद्र गुप्ता भी अपनी कविता पढ़ेंगे। पंडित बिपिन मिश्रा शंख और डमरू पर शिवस्त्रोत गायन करेंगे। पांच दिसंबर को कानपुर की नवोदित प्रतिभाएं भी कविता व अन्य कार्यक्रमों को प्रस्तुत करेंगे। नेशनल आर्काइव आफ इंडिया के डायरेक्टर रहे डा. संजय गर्ग सिक्कों के जरिए ङ्क्षहदुस्तान का इतिहास बताएंगे। चाणक्य धारावाहिक के निर्माता और अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म पृथ्वीराज के निर्देश डा. चंद्र प्रकाश द्विवेदी और वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डा. आलोक बाजपेयी कृष्णा इन अवर माइंड कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। यही नहीं, गैंग सिस्टर्स नाम से विख्यात पांच कवयित्रियां और मशहूर शास्त्रीय गायिका कलापिनी कोमकली भी कार्यक्रम पेश करेंगी।

Edited By: Shaswat Gupta