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कानपुर एचबीटीयू में पीएचडी डिग्री का नया प्रारूप, एआई-एमएल सहित दो नए कोर्स शुरू

Published: Sat, 16 May 2026 08:04 PM (IST)

हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) ने पीएचडी डिग्री के प्रारूप में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, अब उपाधि पर केवल शोध का शीर्षक अंकित होगा।

हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी।

हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी।

HighLights

  1. पीएचडी डिग्री पर अब केवल शोध का शीर्षक होगा

  2. बीटेक एआई-एमएल और फॉरेंसिक बायो एनालिटिक्स कोर्स शुरू

  3. पारिवारिक दुखद घटना पर छूटी परीक्षा का दोबारा मौका

जागरण संवाददाता , कानपुर। हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) में आगामी शैक्षणिक सत्र से कई महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं। विश्वविद्यालय की एकेडमिक कौंसिल में छात्र हित और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को ध्यान में रखते हुए कई अहम फैसले लिए गए हैं। इसके तहत अब पीएचडी का डिग्री फार्मेट ही बदल गया है। अब शोधार्थियों के विभाग के बजाय शोध विषय का उल्लेख उपाधि पर किया जाएगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत मल्टी-डिसिप्लिनरी (बहु-विषयक) शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय ने आईआईटी और एनआईटी की तर्ज पर पीएचडी डिग्री के फार्मेट को बदलने का निर्णय लिया है। अब डिग्री पर केवल शोध का 'टाइटल' लिखा जाएगा, न कि विशिष्ट विभाग का नाम। इस बदलाव से उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी जो साइंसेज (जैसे केमिस्ट्री) से होने के बावजूद इंजीनियरिंग विधाओं (जैसे केमिकल इंजीनियरिंग) में शोध करते हैं। इससे उन्हें भविष्य में यूजीसी नियमों के तहत डिग्री कालेजों में अध्यापन (टीचिंग) के लिए आवेदन करते समय विषयों की बाध्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा और उनके लिए रोजगार के विकल्प बढ़ेंगे। यह नया फार्मेट आगामी दीक्षा समारोह से लागू कर दिया जाएगा।

कुलपति प्रो. समशेर की अध्यक्षता में हुई बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस व मशीन लर्निंग पर आधारित नए पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव भी लाया गया। जिस पर बीटेक कंप्यूटर साइंस एआइ-एमएल को अनुमति दी गई है। इस कोर्स में 60 सीटों पर नए सत्र से प्रवेश दिया जाएगा। इसके अलावा बीटेक एमएससी इन फारेंसिक बायो एनालिटिक्स का विशेष कोर्स 18 सीटों की क्षमता के साथ शुरू किया जा रहा है।

विपरीत परिस्थितियों में परीक्षा के लिए विशेष प्रावधान

डीन एकेडमिक प्रो. वंदना दीक्षित ने बताया कि छात्र हित में एक बेहद संवेदनशील फैसला लेते हुए विश्वविद्यालय ने मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं के नियमों में ढील दी है। यदि किसी छात्र के परिवार में (रक्त संबंधों में) किसी दुखद घटना या मृत्यु के कारण उसकी मिड-सेम परीक्षा छूट जाती है, तो उसके लिए विशेष परीक्षा की व्यवस्था की जाएगी। डीन एकेडमिक अफेयर्स द्वारा प्रामाणिकता की जांच के बाद, संबंधित विभाग प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए निर्धारित एक हफ्ते के स्लाट के दौरान अपने स्तर पर छात्र की परीक्षा सुनिश्चित कराएगा ताकि छात्र के ग्रेड्स पर कोई असर न पड़े।

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