कानपुर : ACC और अंबुजा की डीलरशिप लेकर बना रहे थे नकली सीमेंट, एयरपोर्ट और सड़कों के निर्माण में की सप्लाई
कानपुर में अदाणी ग्रुप की डीलरशिप की आड़ में नकली सीमेंट बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। आरोपी लखनऊ ...और पढ़ें

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HighLights
अदाणी डीलरशिप की आड़ में नकली सीमेंट फैक्ट्री।
लखनऊ एयरपोर्ट, सीएम ग्रिड सड़कों में सप्लाई।
एक्सपायरी सीमेंट को रीपैकेज कर बेचते थे।
जागरण संवाददाता, कानपुर। नकली सीमेंट बरामद होने के मामले में नया राजफाश हुआ है। पता चला कि आरोपित अदाणी ग्रुप की एसीसी व अंबुजा कंपनी की डीलरशिप लेकर उसकी आड़ में नकली सीमेंट बनाने वाली फैक्ट्री संचालित कर रहे थे। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि अदाणी ग्रुप के अधिकारियों का आरोप है कि फैक्ट्री संचालकों ने डीलरशिप लेकर लखनऊ एयरपोर्ट, सीएम ग्रिड की सड़कों व मकानों के निर्माण कार्य में नकली सीमेंट सप्लाई की।
एयरपोर्ट पर नकली सीमेंट मिलने की जानकारी पर जांच शुरू कराई गई थी। पुलिस की छापेमारी में फैक्ट्री से 1000 से अधिक सीमेंट से भरी व 3000 से ज्यादा खाली बोरियां बरामद हुई थीं। गिरोह प्रति माह 30 हजार से अधिक नकली सीमेंट की बोरियां सप्लाई करते थे। पुलिस ने फैक्ट्री से एक मुंशी को गिरफ्तार कर गुरुवार को जेल भेजा है, जबकि फैक्ट्री संचालक दो भाई समेत चार साझेदारों की तलाश की जा रही है।
बिक्री के लिए अधिकृत किया था माल
अदाणी ग्रुप के कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक ने बताया कि उनकी बिजनेस टीम को पनकी के इस्पात नगर की एक फैक्ट्री में ब्रांड एसीसी और अंबुजा सीमेंट का नकली माल बना बेचने की जानकारी मिली थी। इसकी पुलिस आयुक्त से शिकायत की थी। पुलिस आयुक्त ने बताया कि कानपुर में सीमेंट के तीन बड़े डीलरों में नीरज गुप्ता व उसके भाई धीरज गुप्ता को तीन साल पहले पांच टन, अन्य दो को 15 व 25 टन माल बिक्री के लिए अधिकृत किया गया था।
इसमें एक जिला-एक उत्पाद व्यवस्था लागू की गई थी। कानपुर में एसीसी की बाजार है और अंबुजा का फतेहपुर में, लेकिन आरोपित नीरज व धीरज ने अंबुजा के नाम से नकली सीमेंट बनाकर सप्लाई शुरू कर दी थी। आरोपितों के मुंशी राहुल को गिरफ्तार किया गया है। मुंशी ने बताया कि फैक्ट्री नीरज व धीरज अपने साथी मेरठ के सुनील मित्तल व निशांत मित्तल के साथ चलाते हैं।
वह एक्सपायरी सीमेंट झांसी व ललितपुर समेत आसपास के सीमेंट गोदामों से नीलामी में कौड़ियों के दाम खरीदते हैं। ऐसी सीमेंट प्रति बोरी 10 से 20 रुपये के हिसाब से मिल जाती थी, जिसे लाकर आरोपित मिक्सर मशीन में पिसवाकर बोरियों में भरते व आठ से 10 जिलों में खपाते थे।
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नामी कंपनियों की सीमेंट की बोरियो की प्रिंटिंग एक प्रिंटिंग प्रेस से कराते थे। एक सादी बोरी की खरीद व प्रिंटिंग में करीब छह रुपये खर्च आता है, जबकि एक तैयार सीमेंट की बोरी 250 से लेकर 280 रुपये तक में बेचते थे। सीएम ग्रिड की सड़कों व एयरपोर्ट के अलावा बड़े ठेकेदार भी संपर्क में रहते मिले हैं।
