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Kanpur Economy: यूपी की बड़ी अर्थव्यवस्था वाला कानपुर छठवें पायदान पर लुढ़का, प्रति व्यक्ति आमदनी भी घटी, MSME पर जोर

Published: Fri, 04 Sep 2026 07:03 PM (IST)

कानपुर उत्तर प्रदेश की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले जनपदों में छठवें स्थान पर आ गया है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय भी ...और पढ़ें

यह तस्वीर प्रतीकात्मक है।

यह तस्वीर प्रतीकात्मक है।

HighLights

  1. कानपुर यूपी की अर्थव्यवस्था में छठवें स्थान पर खिसका

  2. प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम हुई

  3. एमएसएमई और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर

अमन तिवारी, कानपुर। उत्तर प्रदेश की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले जनपदों की सूची में शुमार पर रहने वाला कानपुर अपने ग्राफ से लुढ़क कर छठवें पायदान पर आ पहुंचा है। अर्थव्यवस्था में आई इस गिरावट के आंकड़ों ने पूरे सरकारी तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। सरकारी मशीनरी तेजी से गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए रोज नए नुस्खे निकालने में जुटी हुई है लेकिन हालात फिलहाल तो संभलते नजर नहीं आ रहे हैं।

बीते माह वन ट्रिलियन सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की समीक्षा में यह खुलासा हुआ है। जिसमें पहले स्थान पर गौतमबुद्ध नगर, दूसरे पर लखनऊ, तीसरे पर गाजियाबाद, चौथे पर प्रयागराज, पांचवें पर आगरा और छठवें स्थान पर कानपुर आ गया है। जनपद की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय का औसत 1,47,443 है, जो राष्ट्रीय औसत 2,0,5324 से कम है। जो कम व्यक्तिगत उत्पादकता और कृषि मजदूरों को ज्यादा मूल्य वाले मैन्युफैक्चरिंग कामों में बदलने में नाकामी को दर्शाता है।

समीक्षा के दौरान कानपुर के गिरते वित्तीय ढ़ाचे को सुधारने के लिए एमएसएमइ और मैन्युफक्चरिंग ढांचे को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। फिलहाल जनपद में ये आलम है कि निर्माण से 35.30 प्रतिशत आउटपुट मिलता है लेकिन इसमें कुल वर्कफोर्स का सिर्फ 3.33 प्रतिशत हिस्सा ही लगा है। वहीं खेतीबाड़ी पर 43.10 प्रतिशत लोग निर्भर हैं, जिससे उस पर बहुत ज्यादा बोझ है। बड़े पैमाने पर जो एमओयू कानपुर के लिए तय हुए वह अभी तक कागजो में ही कैद हैं, जमीन पर नहीं उतर सके।

जीएसडीपी के गिरने के पीछे के कारणों पर जाएं तो इस तरह के प्रमुख तथ्य सामने आए हैं

  • खेती में एनपीके के असंतुलित अनुपात यानी 4:2:1 के स्थान पर 27:8:1 की खपत होना।
  • क्रेडिट के सही इस्तेमाल न होने मसलन कुल बैंक क्रेडिट मंे 11.65 प्रतिशत की तुलना में इंडस्ट्री क्रेडिट के लिए मामूली 6.95 प्रतिशत की वजह से ग्रोथ रुकी हुई है।
  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजदूरों की संख्या कम होना।
  • श्रम के ढांचे में भारी असंतुलन है। निर्माण क्षेत्र से 35.30 प्रतिशत आउटपुट मिलता है लेकिन इसमें कुल वर्कफोर्स का सिर्फ 3.33 प्रतिशत हिस्सा ही लगा है। वहीं खेती-बाड़ी पर 43.10 फीसदी लोग निर्भर हैं। जिससे उस पर बोझ बहुत ज्यादा है।
  • औद्योगिक क्षेत्र में एमओयू को जमीन पर उतरने में देरी। कानपुर नगर के लिए 40 हजार करोड़ से ज्यादा कीमत के 521 एमओयू के सापेक्ष छह हजार करोड़ रुपए के 142 यूनिट का ही निवेश हुआ है।
  • यूपीएसआइसी में अभी भी 108 यूनिट तुरंत प्रयोग के लिए खाली पड़ी हैं। लेकिन उनका प्रयोग नहीं हो रहा।
  • 11 एकड़ के गर्ग इंडस्ट्रियल पार्क पीएसआइटी के पीछे और 14 एकड़ के सोम इंडस्ट्रियल पार्क एनएच टू रिंग रोड अलाइनमेंट तय हो चुका है। पर अभी तक काम शुरु नहीं हुआ।


सुधार के लिए ये कदम उठाने हैं जरूरी

  • सिविल, रेल और एक्सप्रेसवे जैसे बड़े इंफ्रास्टक्चर का मजबूत होना जरूरी। इस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर, चकेरी एयरपोर्ट के अपग्रेड और कानपुर रिंग रोड नेटवर्क के चल रहे काम के बीच बेहतर मल्टीमाडल कनेक्टीविटी सुनिश्चित होना।
  • शहरी माल ढुलाई के खर्चों को व्यवस्थित रूप से कम करने के लिए एनएचएआइ की एग्जीक्यूशन टीमों को पैकेज एक में 61.21 प्रतिशत फिजिकल प्रोग्रेस, पैकेज टू ए में 49.10 प्रतिशत और पैकेज 4 में 37.65 प्रतिशत पर काम की गति बनाए रखनी होगी।
  • एक्सपोर्ट -ओरिएंटेड कामन फैसिलिटी सेंटर स्थापित करें। वैल्यू एडीशन, क्वालिटी वेरिफिकेशन और स्टैंडर्ड ब्रांडिंग को बेहतर बनाने के लिए सीधे एक्सपोर्ट डेवलपमेंट काउंसिल के साथ साझेदारी करें।
  • जाजमऊ में प्रस्तावित ओडीओपी लेदर क्लस्टर और होजरी क्लस्टर को चालू करना।
  • आइआइटी कानपुर के एसआइआइसी के आर एंड डी बेस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हुए खास एआइ और स्टार्टअप सुविधा केंद्र स्थापित करें, ताकि सर्विस सेक्टर की मांग का स्वरूप पूरी तरह से खेती -बाड़ी पर आधारित जरूरतों से हटकर कुछा और बन सके।
 

 अर्थव्यवस्था के पटल पर इस तरह लुढ़का कानपुर  

 

जनपद जीएसडीपी में हिस्सेदारी
गौतमबुद्ध नगर 11.05 प्रतिशत
लखनऊ 5.56 प्रतिशत
गाजियाबाद 4.75 प्रतिशत
प्रयागराज 3.19 प्रतिशत
आगरा 2.91 प्रतिशत
कानपुर नगर 2.85 प्रतिशत

 

इस तरह से रैकिंग में आया बदलाव

  

वित्तीय वर्ष कुल कीमत (करोड़ रुपये) / राज्य जीडीपी में हिस्सेदारी / प्रदेश में स्थान
2021-22 54640.53 करोड़ रुपये — 2.85 प्रतिशत — सातवां
2022-23 74439.26 करोड़ रुपये — 3.30 प्रतिशत — चौथा
2023-24 79967.97 करोड़ रुपये — 3 प्रतिशत — तीसरा
2024-25 86177.93 करोड़ रुपये — 2.85 प्रतिशत — छठवां

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अर्थव्यवस्था पर सुधार लाने के लिए पंद्रह से अधिक विभागों से सामंजस्य कर उन्हें नए तरह से काम करने के उपाय सुझाए गए हैं। बानगी के तौर पर कृषि विभाग से उन फसलों पर काम करने के लिए कहा गया है, जिनकी उपज जनपद में कम होती जा रही है। इसी तरह अलग-अलग विभागों को काम करने का लक्ष्य दिया गया है।
- ईशा शर्मा, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी।

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