कानपुर दवा कारोबारी हत्याकांड: फ्लैट की DVR बंद करते दिखा सुब्रत, डिलीट चैट और कैमरे में कैद फुटेज से हुआ बेनकाब
कानपुर दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस जांच में बेटे सुब्रत की भूमिका उजागर हुई। डीवीआर बंद करते हुए ...और पढ़ें

दवा कारोबारी का बेटा सुब्रत।
HighLights
बेटे सुब्रत को डीवीआर बंद करते हुए फुटेज में देखा गया।
संपत्ति विवाद और पिता के चरित्र पर हत्या की साजिश रची।
विशाल गौतम और राजकिशोर ने मिलकर विनीत मिनोचा की हत्या की।
जागरण संवाददाता, कानपुर। दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस की जांच जैसे-जैसे बढ़ी, वैसे-वैसे सुब्रत जांच के घेरे में आता गया। पुलिस को पहली बार तक सुब्रत पर शक गहराया, जबकि फ्लैट के अंदर लगे कैमरों की डीवीआर घटना के दौरान की बंद मिली, लेकिन कैमरों की पुरानी रिकॉर्डिंग देखी गई तो सुब्रत डीवीआर खुद ही बंद करते उसमें दिखा। इस फुटेज ने पुलिस की जांच को नई दिशा दे दी।
इसके बाद पड़ोसी के फ्लैट के बाहर लगे कैमरे जांचे गए तो उसमें दो युवक घटना के बाद बाहर जाते दिखे। सुब्रत को फुटेज दिखाई तब भी उसने पहचाने से इन्कार कर दिया, जबकि उसकी पत्नी शालू ने दोनों में से एक को शुभम नाम से उसे पहचान लिया। शुभम का नाम विशाल भी है।
पूछताछ में जब पुलिस को पता चला कि विशाल विनीत मिनोचा के मेडिकल स्टोर में 12 साल नौकरी कर चुका और चोरी के आरोप में उसे हटाया गया तो शक और गहरा गया। इसके बाद जांच आगे बढ़ती गई और कानून का शिकंजा सुब्रत के गले तक पहुंच गया।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि शुरुआती जांच में पुलिस ने हत्यारोपित विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर व विशाल के बयान के आधार व अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर शालू को जेल भले ही भेज दिया था, पर हत्याकांड का राजफाश कहीं न कहीं अधूरा लग रहा था। इस पर जांच को आगे बढ़ाया गया।
पार्टी के लिए प्लैट से निकलता था सुब्रत
सीसी कैमरे खंगाले गए तो पता चला कि वारदात से पहले 9:38 जबे उस रात सुब्रत शालू व बच्चे श्रीजय को लेकर किटी पार्टी में जाने के लिए फ्लैट से निकला था। उनके जाने के बाद 9:46 बजे विशाल और राज किशोर फ्लैट में प्रवेश करते दिखे, जबकि विनीत मिनोचा ने 10:58 बजे फ्लैट के अंदर प्रवेश किया। इसके बाद 11:28 बजे दोनों फ्लैट से बाहर निकले थे।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि इससे अनुमान है कि लगभग 11:15 बजे के बीच दोनों आरोपितों ने विनीत मिनोचा की हत्या कर दी थी। सुबह 4:23 बजे सुब्रत-शालू फ्लैट में पहुंचे तो पिता का रक्तरंजीत शव देखा। 4:32 बजे सिक्योरिटी गार्डों का इंचार्ज फ्लैट में पहुंचा और उसके बाद कल्याणपुर थाना पुलिस समेत फोर्स व अधिकारी पहुंच गए। जांच के दौरान फ्लै के अंदर चार कैमरे लगे मिले, लेकिन उनका डीवीआर बंद था।
सुब्रत ने बताया कि पिता के मोबाइल फोन पर कैमरों का एक्सेस रहता था, लेकिन जब डीवीआर कब्जे में लेकर पुरानी रिकार्डिंग देखी गई तो सबसे अहम सुराग उसी डीवीआर से पुलिस को मिला।
उस रात डीवीआर को बंद करते हुए सुब्रत की फुटेज-वीडियो मिला। बस उसी के बाद से पुलिस को सुब्रत पर शक हो गया कि वह कुछ न कुछ छिपा रहा है। इसके बाद एक-एक कर उसके खिलाफ साक्ष्य मिलने लगे।
इसके बाद बुधवार को हत्याकांड की लिखी पटकथा से पर्दा उठा और हर तरफ से घिरे सुब्रत ने घटना स्वीकार की। उसने बताया कि विशाल ने वर्ष 2010 से 2022 तक पिता के मेडिकल स्टोर पर काम किया, लेकिन वह अपना कर्ज चुकाने के लिए दुकान से विशाल के जरिए ही चोरी करवाते थे।
विशाल के पकड़े जाने पर पिता ने उसे काम से निकॉल दिया, लेकिन विशाल ने उसके लिए चोरी की थी। इसलिए वह उससे घर के काम और अपने निजी काम करवाते और उसे रुपये देते थे।
तीन माह पहले जब उसने विशाल के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची तो विशाल ने ही सड़क दुघर्टना में पिता को मरवाने की बात कही, लेकिन पकड़े जाने के डर से उसे मना कर दिया। फिर उसने तकिया से मुंह दबाकर हत्या करने को कहा, पर उस रात ये प्लान भी फेल हुआ तो विशाल ने पहले से ही बाहर से खरीदे चाकू से उनकी हत्या कर दी।
सुब्रत ने वाट्सएप और कॉल हिस्ट्री कर दी थी डिलीट
पुलिस की जांच में सुब्रत से विशाल की 50 से अधिक वाट्सएप पर चैट मिली थी, जबकि 300 से अधिक बार बातचीत की डिटेल मिली, लेकिन हत्याकांड वाली रात तक उसने कॉल हिस्ट्री, वाट्सएप चैट और यहां तक विशाल का नाम भी फोन से डिलीट कर दिया था।
वहीं, शालू के वाट्सएप व कॉल की डिटेल डिलीट नहीं हुई। इस पर भी पुलिस को सुब्रत पर शक और गहराया। वहीं, वारदात वाली रात दोनों आरोपित जब फ्लैट के अंदर पहुंचे तो ड्रांइग रूम में विशाल और सुब्रत के कमरे में राजकिशोर छिपा। पल पल की खबर के लिए दोनों ने एक दूसरे से उस रात तीन बार आपस में बात भी की थी।
नए सिमकार्ड लेने के बाद विशाल और सुब्रत की दो-दो कॉल निकली
पुलिस आयुक्त ने बताया कि पुलिस ने जब विशाल के मोबाइल फोन नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई तो उसमें पुराने नंबर से एक मई से तीन सितंबर तक 252 बार बार विशाल और सुब्रत के बीच बातचीत निकली, जबकि शालू से उसने 28 बार बात की। तीन सितंबर को विशाल के फोन पर नया सिमकार्ड लगाया गया था।
इस नए नंबर से उसी शाम 6:29 से 6:44 बजे के बीच चार बार कॉल हुई, जिसमें दो बार सुब्रत ने विशाल को और दो बार विशाल ने सुब्रत को की थी। विशाल के नए सिम का नंबर सुब्रत ने शालू को वाट्सएप भी किया था। विशाल का नाम शालू को शुभम बताया था।
नए सिम से कुल् सुब्रत से छह और शालू की सात कॉल हुई, लेकिन शालू के मुताबिक, ये सात कॉल जन्माष्टमी के दिन विशाल से पूजन का व अन्य सामान मंगवाने के लिए की गई थी। इस बात को रिमांड के दौरान विशाल ने भी स्वीकार किया। जबकि, सुब्रत ने साजिश के तहत शालू को फंसाने के लिए विशाल उर्फ शुभम से उसकी बात ज्यादा करवाता था।
