कानपुर मंडल के 7000 श्रमिकों को बनाया जाएगा कुशल, प्रशिक्षण के दौरान रुपये भी मिलेंगे, विदेश में नौकरी का मौका
कानपुर मंडल के 7000 निर्माण श्रमिकों को कार्यस्थल पर 15 दिन का कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे कुशल श्रेणी ...और पढ़ें

यह एक प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
कानपुर मंडल के 7000 श्रमिकों को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान श्रमिकों को 1341 रुपये भी दिए जाएंगे
प्रमाण पत्र मिलने पर विदेश में नौकरी के अवसर खुलेंगे
जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर मंडल के सात हजार निर्माण श्रमिकों को कार्यस्थल पर ही प्रशिक्षण देकर कुशल बनाया जाएगा। 15 दिन में 120 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक घंटे की थ्योरी और बाकी काम करते समय उसी काम का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इसके साथ ही लाभार्थियों को 1341 रुपये भी दिए जाएंगे। यह राशि सीधे श्रमिक के खाते में जाएगी। प्रमाणपत्र मिलने पर श्रमिक कुशल की श्रेणी में आ जाएगा। उसे विदेश में नौकरी का मौका भी मिलेगा।
उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (यूपी बीओसी) की तरफ से कौशल विकास तकनीकी उन्नयन एवं प्रमाणन योजना के तहत कार्यस्थल पर ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य निर्माण क्षेत्र में पहले से काम कर रहे श्रमिकों के पूर्व अनुभव एवं मौजूदा कौशल को प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन से जोड़ना है।
प्रशिक्षण से श्रमिकों को अपने कौशल की औपचारिक पहचान मिलेगी। यह पहल यूपी बीओसी, दत्तोपंत ठेंगड़ी राष्ट्रीय श्रमिक शिक्षा एवं विकास बोर्ड और निटकान लिमिटेड के समन्वय से शुरू हो रही है। प्रशिक्षण पूरा होने पर स्किल सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इससे उसका पारिश्रमिक बढ़ जाएगा।
कानपुर में अकुशल श्रमिक को 13006, अर्द्धकुशल को 14306 और कुशल को 16025 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। प्रमाणपत्र मिलने के कारण इन्हें विदेश में नौकरी का मौका भी मिल सकता है। कानपुर मंडल में कानपुर, कानपुर देहात, औरैया, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज जिले आते हैं।
अभी यह तय नहीं हुआ है कि किस जिले में कितने श्रमिकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। मंडल स्तर पर सात हजार श्रमिकों को प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा गया है। अपर श्रमायुक्त शमीम अख्तर का कहना है कि प्रयास है कि 10 अक्टूबर तक कानपुर में प्रशिक्षण शुरू करा दिया जाए।
इस तरह मिलता विदेश में नौकरी का मौका
विदेश में मांग के अनुसार राजमिस्त्री, श्रमिक, प्लंबर एजेंसी के माध्यम से भेजे जाते हैं। एजेंसी सेवायोजन दफ्तर और श्रम विभाग की मदद से उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत श्रमिकों को विदेश में नौकरी के लिए भेजती है। इसके लिए संस्था कौशल विकास केंद्र या आईआईटी में स्किल टेस्ट लेती है। अपर श्रमायुक्त शमीम अख्तर ने बताया कि बीओसी जिन श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर प्रमाणपत्र देगी, उन्हें स्किल टेस्ट की आवश्यकता नहीं होगी।
