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कानपुर साइबर ठगी कांड: 18 राज्यों से जुड़ा जाल, बैंक सर्वेयर पर गिरी गाज; संदिग्ध इकलाख के खाते में 180 करोड़ का लेनदेन

Published: Mon, 14 Sep 2026 02:38 AM (IST)

कानपुर में 5600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है, जिसमें 18 राज्यों के लोग प्रभावित हुए हैं ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. कानपुर में 5600 करोड़ की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा।

  2. 18 राज्यों के लोग ठगी का शिकार, बैंक सर्वेयर शामिल।

  3. 77 बैंक खाते सीज करने की प्रक्रिया, करोड़ों का लेनदेन।

जागरण संवाददाता, कानपुर। 18 राज्यों के लोगों से 5600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी में जिस तरह से बोगस फर्मों के नाम और उनके बैंक खातों का पता चला है, उससे पुलिस को आशंका है कि इस खेल में कुछ बैंककर्मी भी शामिल हो सकते हैं। एक बड़े सरकारी बैंक के सर्वेयर का नाम सामने आया है, जिसने गिरोह के सदस्य आरिफ को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 1.75 करोड़ रुपये लोन दिलाया था। इसके बदले 20 लाख रुपये रिश्वत ली थी।

वह इस समय हरदोई में तैनात है। गिरोह के 14 बैंकों के 77 बैंक खाते पता चले हैं, जिन्हें सीज कराने की प्रक्रिया चल रही है। इससे पहले साइबर ठगी के दो बड़े मामलों में बैंकों के कर्मियों के नाम सामने आ चुके हैं। पुलिस ने 19 अगस्त को मोहम्मद शादाब की शिकायत पर ठगी का मुकदमा दर्ज किया था। शादाब का आरोप था कि शाहजेब वारिस, सलमान और आरिफ ने उनसे 25 लाख रुपये ठग लिए।

पुलिस ने करीब दस हजार बैंक खाते खंगाले, इनमें 77 बैंक खाते संदिग्ध मिले। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक इन खातों में करीब 5600 करोड़ रुपया जमा किया गया था। कुछ खातों से नकदी निकालकर हवाला के जरिये इधर-उधर की गई। तीन खातों में 200 करोड़ से ज्यादा, छह खातों में 100 करोड़ से ज्यादा, आठ खातों में 50 से 100 करोड़ और 41 खातों में एक से 50 करोड़ की रकम का जमा की गई।

एक खाते में सर्वाधिक 295.31 करोड़ रुपये हैं, जो एसके इंटरप्राइजेज का है। मोहम्मद अमान नाम से खुले खाते में 279 करोड़ रुपये हैं। हजारों ऐसे खाते हैं, जिनमें एक से लेकर 50 लाख रुपये जमा किए गए। गिरोह अलग-अलग तरीकों से लोगों को ठगता था। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर आई 86 शिकायतों में भी शाहजेब का नाम सामने आया।

उसको हैदराबाद से पकड़ा गया और कानपुर लाने के बाद उसके साथी सलमान को पकड़ा गया। शाहजेब ही गिरोह का सरगना है। उससे पूछताछ में 14 साइबर ठगों के नाम सामने आए। इनमें से दो जेल में बंद हैं। गिरोह का एक सदस्य इकलाखा सेवानिवृत्त दारोगा का बेटा है। उसकी और उसके साथी आरिफ की लोकेशन मुंबई में मिली है। इकलाख ने कानपुर में लीज पर होटल ले रखा था और वहीं से ठगी का नेटवर्क चलाता था।

इसी दौरान शाहजेब से उसका संपर्क हुआ। इकलाख लोगों को लोन दिलाने के बहाने उनके दस्तावेज ले लेता और उन्हीं से बोगस फर्में पंजीकृत कराकर बैंक खाते खुलवाता था। इनमें ठगी की रकम मंगाई जाती थी। उसके पांच खातों में करीब 41 करोड़ रुपये का लेनदेन मिला है। इकलाख का ससुर भी दारोगा है, जो पहले पूर्वी जोन के एक थाने में तैनात रह चुका है।

ससुर की मदद से स्क्रैप व्यापारियों, टेनरी संचालकों और स्लाटर हाउस फर्मों के खाते हासिल करने और उनमें ठगी की रकम मंगवाने की बात भी सामने आई है। इकलाख के बैंक आफ बड़ौदा के खाते से वर्ष 2024 में आठ दिन के अंदर 180 करोड़ का लेनदेन हुआ था। पुलिस ने पूछताछ की तो इकलाख ने जीएसटी और शेयर ट्रेडिंग समेत अन्य व्यापार की जानकारी दी थी। पुलिस ने उसे छोड़ दिया था।

इन राज्यों के लोगों से हुई ठगी
उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, जम्मू कश्मीर, बिहार, केरल, बंगाल, झारखंड, उत्तराखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, हरियाणा।

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