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मिट्टी की सेहत का खुलेगा राज; 22 जिलों में CSA Kanpur करेगा जांच, किसानों को पांच-सात दिन में मिलेगी रिपोर्ट

Published: Thu, 03 Sep 2026 06:47 AM (IST)

चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय (सीएसए) अपने कार्यक्षेत्र के 22 जिलों में मिट्टी की सेहत जांचने का अभियान चलाएगा। किसानों को ...और पढ़ें

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HighLights

  1. गांवों में किसानों को करीब 15 दिन प्रशिक्षण देंगे केवीके वैज्ञानिक, खुद लेंगे मिट्टी के नमूने

  2. पांच से सात दिन में जांच रिपोर्ट, कमी के अनुसार खाद-उर्वरक की मिलेगी सलाह

  3. आइसीएआर-आइसीएमआर की ‘सेहत’ पहल में मिट्टी से मानव स्वास्थ्य तक को जोड़ा जाएगा

जागरण संवाददाता, कानपुर। खेत की मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है और किसकी अधिकता, इसकी जानकारी अब किसानों को अनुमान से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जांच के आधार पर मिलेगी। अपने कार्यक्षेत्र के 22 जिलों में मिट्टी की सेहत जांचने का अभियान चलाएगा। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिक गांवों में किसानों को करीब 15 दिनों तक प्रशिक्षण देंगे। इसमें मिट्टी का नमूना लेने का सही तरीका, स्थान, मात्रा और गहराई बताई जाएगी। प्रशिक्षण के बाद किसान स्वयं खेत से नमूने लेकर संबंधित ब्लाक स्तर पर जमा करेंगे। प्रयोगशाला में जांच के बाद करीब पांच से सात दिन में रिपोर्ट तैयार होगी।

कुलपति डा. संजीव गुप्ता ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की पहल पर ‘सेहत’ कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य मिट्टी, पौधे, पशु, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जोड़कर काम करना है। सीएसए के कार्यक्षेत्र के सभी जिलों में मिट्टी की गुणवत्ता का वैज्ञानिक आकलन कर किसानों को उसके अनुरूप खेती की सलाह दी जाएगी।

रिपोर्ट बताएगी खेत को किस खाद की जरूरत

मिट्टी की जांच में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश समेत प्रमुख व सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति का पता चलेगा। जिस तत्व की कमी होगी, उसी के अनुसार खाद और उर्वरक के इस्तेमाल की सलाह दी जाएगी। इससे जरूरत से अधिक यूरिया और रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को कम करने में मदद मिलेगी। किसानों को संतुलित कीटनाशक इस्तेमाल, प्राकृतिक खेती और एकीकृत कृषि प्रणाली के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।

नमूना लेने की विधि सिखाएंगे वैज्ञानिक

केवीके वैज्ञानिक गांवों में प्रशिक्षण के दौरान बताएंगे कि खेत के किस हिस्से से मिट्टी लेनी है और किस स्थान से नमूना नहीं लेना चाहिए। निर्धारित गहराई से मिट्टी लेकर उसका नमूना तैयार किया जाएगा। किसान स्वयं नमूना ब्लाक स्तर पर पहुंचाएंगे। इसके बाद जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

जलवायु के अनुसार फसल का चयन

कुलपति ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से तापमान और वर्षा के स्वरूप में बदलाव हो रहा है। ऐसे में किसानों को स्थानीय जलवायु के अनुकूल फसलों और किस्मों का चयन करने की जानकारी दी जाएगी। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ सुरक्षित और पौष्टिक खाद्य उत्पादन पर भी जोर रहेगा।

ऐसे लिया जाएगा मिट्टी का नमूना

  • कब लें : फसल कटने के बाद या अगली फसल की तैयारी से पहले नमूना लेना बेहतर होगा।
  • कहां से लें : खेत के अलग-अलग हिस्सों की स्थिति देखकर वैज्ञानी नमूना लेने का स्थान बताएंगे।
  • कैसे लें : केवीके के वैज्ञानी के निगरानी में निर्धारित गहराई से मिट्टी लेकर उसे अच्छी तरह मिलाया जाएगा और निर्धारित मात्रा का नमूना तैयार किया जाएगा।
  • कहां जमा करें : किसान स्वयं नमूना संबंधित ब्लाक स्तर पर निर्धारित केंद्र पर पहुंचाएंगे।
  • रिपोर्ट कब मिलेगी : नमूना प्रयोगशाला पहुंचने के बाद जांच में करीब पांच से सात दिन में रिपोर्ट मिल जाएगी।

इन 22 जिलों में चलेगा अभियान

कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज, औरैया, प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, जालौन, एटा, हाथरस, कासगंज, लखीमपुर खीरी, हरदोई, रायबरेली, उन्नाव, चित्रकूट और हमीरपुर।

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