नई कंपनी का नाम रखना हुआ मुश्किल, मिलते-जुलते नाम पर आवेदन होगा रद, कानपुर के उद्यमियों की बढ़ी परेशानी
कानपुर में कंपनी या एलएलपी नाम पंजीकरण अब मुश्किल हो गया है, जहां हर माह 1000 आवेदन में से अधिकांश ...और पढ़ें

सीएस वृंदा अग्रवाल व सीएस वैभव अग्निहोत्री, पूर्व अध्यक्ष भारतीय कंपनी सचिव संस्थान कानपुर । स्वयं
HighLights
सीआरसी की सख्ती से कंपनी नाम आवेदन रद्द हो रहे।
ट्रेडमार्क व अन्य दस्तावेजों की जांच अब अनिवार्य।
योग्य कंपनी सचिव से परामर्श कर आवेदन करें।
जागरण संवाददाता, कानपुर। नया कारोबार शुरू करने के लिए कंपनी या सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी) का नाम चुनना अब उद्यमियों के लिए पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। कानपुर और आसपास के जिलों से हर माह करीब 1000 कंपनी-एलएलपी नाम आवेदन दाखिल किए जा रहे हैं लेकिन दस्तावेज के अभाव में ज्यादातर रद हो रहे हैं। केंद्रीय पंजीकरण केंद्र (सीआरसी) की ओर से नामों की समानता और अन्य नियमों की सख्त व्याख्या ने उद्यमियों, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट पेशेवरों की चिंता बढ़ा दी है।
कारपोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) की नई एडवाइजरी में कंपनी अधिनियम, 2013 और एलएलपी नियम, 2009 के तहत नाम चयन, मौजूदा कंपनी या एलएलपी से समानता, ट्रेडमार्क, पंजीकृत कार्यालय के प्रमाण और अन्य शर्तों को अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। मौजूदा कंपनी या एलएलपी से मिलते-जुलते नाम को अलग दिखाने के लिए केवल वर्तनी में मामूली बदलाव, एकवचन को बहुवचन करना या शब्दों का क्रम बदलना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
कंपनी मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार पहले इस्तेमाल किए जा चुके कंपनी या एलएलपी नामों को दोबारा अपनाने पर भी समय सीमा लागू की गई है। अब भंग कंपनी का नाम भी दो वर्ष तक किसी दूसरे को नहीं मिल सकेगा।
इसी तरह से रजिस्ट्रार आफ कंपनीज के आधिकारिक रजिस्टर से किसी कंपनी का नाम हटाने के बाद भी 20 वर्ष तक वह नाम कोई अन्य नहीं ले सकेगा। इसी तरह एलएलपी के नाम पर भी पांच वर्ष की रोक रहेगी। कंपनी का नाम बदलने के बाद पुराना नाम तीन वर्ष तक दोबारा आरक्षित नहीं किया जा सकेगा।
प्रस्तावित नाम में बैंक, इंश्योरेंस, आर्किटेक्ट, कंपनी सेक्रेटरीज, कास्ट अकाउंटेंट्स या चार्टर्ड अकाउंटेंट्स जैसे विनियमित क्षेत्रों से जुड़े शब्द हैं तो संबंधित नियामक या पेशेवर संस्था से सैद्धांतिक अनुमति अथवा एनओसी की जरूरत पड़ सकती है।
इसी तरह किसी विदेशी देश या शहर के नाम को कंपनी के नाम में शामिल करने पर संबंधित देश या संस्था से कारोबारी संबंध, समझौते या सहयोग का प्रमाण मांगा जा सकता है।
कंपनी या एलएलपी का नाम आवेदन करने से पहले संबंधित ट्रेडमार्क की स्थिति जांचना भी जरूरी है। संबंधित एनआइसी कोड के अनुरूप ट्रेडमार्क वर्ग में यदि समान या भ्रामक रूप से मिलता-जुलता पंजीकृत ट्रेडमार्क मौजूद है तो संबंधित ट्रेडमार्क स्वामी की एनओसी की आवश्यकता हो सकती है।
एनओसी में डिजिटल हस्ताक्षर के साथ ट्रेडमार्क वर्ग और आवेदन संख्या जैसी आवश्यक जानकारी भी देनी पड़ सकती है। एलएलपी, सेक्शन-8 कंपनी और वन पर्सन कंपनी (ओपीसी) के लिए प्रस्तावित कारोबार की गतिविधियों को लेकर भी नियमों का पालन जरूरी है। कुछ वित्तीय गतिविधियां निर्धारित ढांचे में प्रतिबंधित हैं।
कंपनी के नाम में किया गया मामूली बदलाव भी कानूनी रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। यहां तक कि नाम से हाइफन हटाने जैसे बदलाव को भी नाम परिवर्तन की श्रेणी में माना जा सकता है।
भारतीय कंपनी सचिव संस्थान के कानपुर चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष एवं कारपोरेट विशेषज्ञ सीएस वैभव अग्निहोत्री ने बताया कि कानपुर में हर माह बड़ी संख्या में उद्यमी कंपनी या एलएलपी के रूप में कारोबार शुरू करने के लिए आवेदन कर रहे हैं। करीब 1000 नाम आवेदन प्रतिमाह दाखिल होना कारोबारी गतिविधियों का संकेत है। ऐसे में नाम चयन में छोटी सी गलती से भी आवेदन रद हो रहे हैं।
सीएस वृंदा अग्रवाल ने कहा कि निगमन या नाम परिवर्तन से पहले प्रस्तावित नाम की समानता, ट्रेडमार्क की स्थिति और जरूरी दस्तावेजों की जांच किसी योग्य कंपनी सचिव से करा लेना बेहतर है। इससे आवेदन रद होने की आशंका और प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम किया जा सकता है।
