कानपुर में गड्ढों की मरम्मत पर महंगाई की मार, 6 माह में 57 हजार रुपये प्रतिटन बढ़े बिटुमिन के दाम, आपूर्ति का संकट
कानपुर में सड़क मरम्मत में इस्तेमाल होने वाले बिटुमिन की कीमत छह महीने में लगभग तीन गुना बढ़कर 95 हजार ...और पढ़ें

यह एक प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
मार्च में 38 हजार रुपये प्रतिटन था बिटुमिन, छह माह में 57 हजार रुपये प्रतिटन की बढ़ोत्तरी
मथुरा रिफाईनरी में 15 दिनों की वेटिंग के बाद भी एक टैंकर की नहीं हो पा रही आपूर्ति
बिटुमिन नहीं मिलने से नगर निगम,पीडब्ल्यूडी, एनएचएआइ को पैर्चवर्क का कार्य कराना हो रहा मुश्किल
जागरण संवाददाता, कानपुर। बारिश के बाद शहर की सड़कों पर उभरे गड्ढों को भरने की चुनौती अब और बढ़ सकती है। सड़क निर्माण और पैचवर्क में इस्तेमाल होने वाला बिटुमिन बीजी-30 छह माह में करीब तीन गुना महंगा हो गया है।
मार्च में जहां इसकी कीमत करीब 38 हजार रुपये प्रति टन थी, वहीं अप्रैल में यह 40 हजार रुपये तक पहुंची और अब 95 हजार रुपये प्रति टन के पार हो गई है। बाजार में आपूर्ति का संकट भी बना हुआ है। मथुरा रिफाइनरी से ठेकेदारों को 15 से 20 दिन में एक ट्रक बिटुमिन मिल पा रहा है।
मौजूदा हालात बने रहे तो इस माह इसकी कीमत एक लाख रुपये प्रति टन के रिकार्ड स्तर तक पहुंच सकती है। ऐसे में गड्ढों पर भी महंगाई की मार पड़ रही है, वहीं बिटुमिन नहीं मिलने से पैचवर्क कराना भी विभागों के लिए मुश्किल हो रहा है। पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर बिटुमिन की कीमत में पड़ रहा है।
युद्ध का असर सीधे सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों पर पड़ने लगा है। बारिश के बाद नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती पैचवर्क के लिए पर्याप्त बिटुमिन जुटाने की है। बारिश के बाद शहर में जगह-जगह सड़कें टूट गई हैं और बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।
ऐसे में विभागों के सामने मरम्मत कार्य तेजी से कराने का दबाव है, लेकिन महंगे बिटुमिन और सीमित आपूर्ति ने मुश्किल बढ़ा दी है। छोटे गड्ढों में पैकेट पैच से काम चलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन बड़े पैमाने पर सड़क मरम्मत के लिए यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। बिटुमिन बीजी-30 की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को इस तरह समझा जा सकता है कि मार्च में एक टन की कीमत करीब 38 हजार रुपये थी।
अप्रैल में यह करीब 40 हजार रुपये हुई। इसके बाद कीमतों में तेजी आती गई और अब यह 95 हजार रुपये प्रति टन से अधिक हो चुकी है। यानी कुछ ही महीनों में लागत में असाधारण वृद्धि हुई है। यदि कीमत एक लाख रुपये प्रति टन तक पहुंचती है तो मार्च की तुलना में यह करीब ढाई गुने से अधिक होगी।
ठेकेदारों के सामने बढ़ी चुनौती
ठेकेदारों के सामने केवल कीमत बढ़ने की समस्या नहीं है, बल्कि उपलब्धता भी बड़ा संकट बन गई है। मथुरा रिफाइनरी से पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि कई ठेकेदारों को 15 से 20 दिन में एक ट्रक बिटुमिन ही मिल पा रहा है। इससे सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की समयसीमा प्रभावित होने की आशंका है।
पश्चिम एशिया के संघर्ष से भी जुड़ी है कीमतों की कड़ी
बिटुमिन पेट्रोलियम रिफाइनिंग प्रक्रिया से प्राप्त होने वाला उत्पाद है। इसलिए इसके दाम कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनरी उत्पादन, परिवहन लागत और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति की स्थिति से प्रभावित होते हैं। फरवरी से पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर जोखिम बढ़ने का असर पूरी आपूर्ति शृंखला पर पड़ता है। हालांकि बिटुमिन की स्थानीय कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय संकट से तय नहीं होती।
वैश्विक संकट का दिख रहा असर
घरेलू रिफाइनरी उत्पादन, उपलब्ध स्टाक, परिवहन, मांग और स्थानीय आपूर्ति की स्थिति भी कीमत को प्रभावित करती है। यही वजह है कि वैश्विक संकट का असर स्थानीय सड़क परियोजनाओं तक दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की लागत बढ़ने पर सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमिन की कीमत भी प्रभावित होती है। इसके अलावा आपूर्ति बाधित होने पर बाजार में उपलब्ध माल कम होने से कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
पीडब्ल्यूडी-केडीए में रेट रिवाइज का रास्ता खुला
बिटुमिन के दाम में असामान्य वृद्धि को देखते हुए पीडब्ल्यूडी और केडीए के कार्यों में रेट रिवाइज के आधार पर भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश प्रमुख सचिव स्तर से दिए गए हैं। इसका उद्देश्य ठेकेदारों को बढ़ी लागत के अनुरूप भुगतान का रास्ता उपलब्ध कराना है, ताकि महंगे बिटुमिन के कारण सड़क परियोजनाएं प्रभावित न हों। हालांकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) और यूपीसीडा के कार्यों में बिटुमिन की बढ़ती कीमतों को लेकर स्पष्ट नीति नहीं होने से स्थिति अलग है। ठेकेदारों का तर्क है कि जिस दर पर काम लिया गया था, उस दर पर मौजूदा कीमत में बिटुमिन खरीदकर कार्य पूरा करना मुश्किल है। इसी कारण कई जगह कार्य रोकने की स्थिति बनी है।
बारिश के बाद बढ़ी जरूरत, संकट गहराने की आशंका
शहर में लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश के बाद तीन सौ से अधिक प्रमुख और संपर्क मार्गों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है। जलभराव वाले स्थानों पर गड्ढों का आकार भी बढ़ा है। ऐसे में इन दिनों में सड़क मरम्मत के लिए बिटुमिन की मांग बढ़ने से दाम में तेजी से उछाल आया है। यदि आपूर्ति सामान्य नहीं हुई और कीमत एक लाख रुपये प्रति टन तक पहुंची तो नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और अन्य कार्यदायी संस्थाओं के लिए मरम्मत का खर्च बढ़ना तय है।
| बिटुमिन की छह माह की कीमतें | |
|---|---|
| माह | कीमत (प्रति टन) |
| मार्च 2026 | ₹40,580 |
| अप्रैल 2026 | ₹77,440 |
| मई 2026 | ₹81,640 |
| जून 2026 | ₹75,070 |
| जुलाई 2026 | ₹83,410 |
| सितंबर 2026 | ₹95,570 |
नोट: यह आंकड़े लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार संघ से बताए आंकड़ों पर आधारित हैं।
बोले अधिकारी
बिटुमिन के रेट लगातार रिवाईज होने के कारण तीन माह में समीक्षा करके भुगतान को सुनिश्चित किया जाता है। वहीं आपूर्ति में परेशानी जरूरी है, लेकिन बहुत ज्यादा कार्य प्रभावित नहीं हैं। समय पर पैचवर्क पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
रविदत्त कुमार, मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग
बिटुमिन की महंगाई और समय पर आपूर्ति नहीं होने से पैचवर्क का कार्य प्रभावित हो रहा है। वेटिंग लंबी होने के कारण समस्या हो रही है। बढ़ते दामों को लेकर पीडब्ल्यूडी की तरह की यूपीसीडा और पीएमजेएसवाई को भी विभागीय स्तर पर रेट रिवाइज करने चाहिए।
बालेन्द्र सिंह भदौरिया, अध्यक्ष, पीडब्ल्यूडी ठेकेदारी संघ
पीएमजेएसवाई में बिटुमिन महंगा होने के कारण प्रदेश में काम रोक दिए गए हैं। रेट रिवाइज को लेकर कई केंद्रीय और राज्य के अधीन विभाग को शिकायत पत्र भेजे गए हैं, लेकिन किसी भी पत्र का संज्ञान नहीं लिया जा रहा है,इसके चलते निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
सिद्धार्थ गुप्ता, ठेकेदार
