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कानपुर में 10 लाख के लोन का झांसा देकर ऑटो चालक के नाम 80 लाख का फ्रॉड, इंडियन बैंक के AGM और मैनेजर समेत 9 पर FIR

Published: Tue, 15 Sep 2026 12:59 AM (IST)

कानपुर में एक ऑटो चालक को 10 लाख के ऋण का झांसा देकर उसके नाम पर 80 लाख का फर्जी ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. ऑटो चालक को 10 लाख के ऋण का झांसा दिया गया।

  2. उसके नाम पर 80 लाख का फर्जी ऋण लिया गया।

  3. इंडियन बैंक के एजीएम, मैनेजर समेत नौ पर FIR।

जागरण संवाददाता, कानपुर। खुद को सीए बता सरकारी योजना के तहत 10 लाख का ऋण कराने का झांसा देकर आटो चालक के नाम 80 लाख का ऋण कराकर रुपये हड़प लिए गए। किस्त नहीं जमा होने का बैंक से पीड़ित के पास नोटिस आया तो फर्जीवाड़ा खुला। आरोप है कि चालक के नाम पर फर्जी फर्म बना जीएसटी पंजीकरण करा दस्तावेज इंडियन बैंक में लगाए थे। उसकी मृत मां को भी जीवित दर्शाया गया।

प्राथमिक जांच में सामने आया कि गिरोह करीब 250 करोड़ रुपये का घोटाला ऐसे ही कर चुका है। मामले में बैंक के एजीएम, ब्रांच मैनेजर, महिला जीएसटी अधिकारी समेत नौ आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज बनाने, धमकी समेत धाराओं में कल्याणपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस बैंक मैनेजर से पूछताछ करने बैंक पहुंची, लेकिन वह नहीं मिले। तीन आरोपितों को पकड़ा गया है।

आटो चालक शिवम शुक्ला ने बताया कि सितंबर, 2024 में बिहार के सिवान जिले के राहुल ओझा व उन्नाव के ज्ञानेंद्र से मुलाकात हुई। दोनों ने खुद को चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बताते हुए अपने आफिस में 12 हजार रुपये वेतन पर काम करने का प्रस्ताव दिया। वह तैयार हो गए, कुछ दिन बाद उन लोगों ने 10 लाख का लोन पीएमएफएमई योजना (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना) व सीएम युवा योजना के तहत कराने का आश्वासन दिया।

इंडियन बैंक शाखा में मैनेजर कुमार पवन से मिलवाया तो लालच में आकर खाता खुलवा दिया। इसके बाद एजीएम आनंद गौरव से मिलवाया। आरोपितों ने पांच साल पहले मृत मां को जीवित दर्शाकर जीएसटी अधिकारी वंदना मिश्रा को 5000 रुपये देकर पंजीकरण कराया।

आठ माह पहले बैंक से नोटिस आने पर पता चला कि फ्लोर मिल खोलना दर्शा 80 लाख रुपये का ऋण लिया गया। आरोपितों ने धमकाते हुए कहा कि किस्त भर दो, वरना जेल जाओगे। इस्पात नगर के व्यापार नगर स्थित हेटल इंजीनियरिंग कंपनी से प्रवीण कुशवाहा, शिवानी, अंकित शुक्ला, रक्षा गुप्ता, राहुल ओझा, ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा समेत आरोपितों ने ऋण की रकम से मशीन खरीदना दिखा उसका कोटेशन बनवाया पर मशीन नहीं खरीदी।

वहीं, इंडियन बैंक के जोनल मैनेजर संजय मिश्रा ने बताया कि अब तक ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। मंगलवार को बैंक के संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानकार आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आयुक्त ने बताया कि आरोपित राहुल, ज्ञानेंद्र व एक अन्य आरोपित से पूछताछ की जा रही है।

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