कानपुर, जेएनएन। उत्तर प्रदेश की प्रावधिक शिक्षा मंत्री कमलरानी वरुण की कोरोना से मौत के बाद उनके समर्थकों में शोक की लहर है। अपने सेवाभाव के कारण वह हर दिल अजीज बन गईं थीं और उनका लोगों से दिली जुड़ाव था। वह हमेशा जातीय राजनीति से परे रहीं। वह लोगों के दुख दर्द में शरीक होकर चूल्हा चौका तक पहुंचने में नहीं हिचकती थीं। क्षेत्र के लोगों की वह भोली-भाली बहन जी थीं, जो गलती पर लड़ती भी थीं और खुद की गलती पर डांट भी सुनती थीं। युवाओं के बीच वह बुआ जी के तौर पर प्रिय थीं।

पांच जुलाई को आखिरी बार आई थीं घाटमपुर

कमलरानी वरुण वन विभाग की ओर धरमपुर बंबा पर आयोजित वन महोत्सव कार्यक्रम में भाग लेने पांच जुलाई को आखिरी बार घाटमपुर क्षेत्र आई थीं। कोरोना प्रकोप के बावजूद वह सड़क हादसे में मरने वाले जहांगीराबाद व रहमपुर के लोगों के घरों तक जाकर सांत्वना देने में हिचकिचाई नहीं थीं। रविवार का दिन होने के बाद भी तहसील में एसडीएम कक्ष में करीब दो घंटे तक बैठ कर अपनों से मिलकर समस्याएं सुनने के बाद ही लौटी थीं।

कुछ यूं रही जीवन यात्रा

  • 03 मई 1958 : लखनऊ में जन्म हुआ।
  • 25 मई 1975 : विवाह हुआ किशनलाल वरुण से।
  • 1977 : पहली बूथ मतदाता पर्ची काटने के साथ राजनीति में प्रवेश।
  • 1989 : पहली बार कानपुर नगर निगम में सभासद बनीं।
  • 1995 : दूसरी बार कानपुर नगर निगम में सभासद बनीं।
  • 1996 : घाटमपुर लोकसभा क्षेत्र से विजयी हुईं।
  • 1998 : घाटमपुर लोकसभा क्षेत्र से दोबारा जीतीं।
  • 1999 : घाटमपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव हार गईं।
  • 2004 : घाटमपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव में मात मिली।
  • 2012 : रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव में पराजित हुईं।
  • 2015 : पति किशनलाल वरुण का निधन।
  • 2017 : घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतीं।
  • 21 अगस्त 2019 : प्रदेश सरकार में प्राविधिक शिक्षा मंत्री बनीं।
  • 02 अगस्त 2020 : लखनऊ स्थित पीजीआइ में निधन।

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