बैड टच और बुलिंग के खिलाफ बच्चों की आवाज बनीं कानपुर की ज्योति, 9000 से ज्यादा को किया जागरूक
ज्योति कुशवाहा ने बचपन में सांवले रंग के कारण बुलिंग और अनुचित स्पर्श का सामना किया, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने बच्चों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया।

बुलिंग और बैड टच के खिलाफ बच्चों की आवाज बनीं कानपुर की ज्योति।
HighLights
ज्योति ने बचपन में बुलिंग और अनुचित स्पर्श झेला।
नौ हजार से अधिक बच्चों को किया जागरूक।
'बुली फाइटर' और 'कवच' अभियान चला रही हैं।
जागरण संवाददाता, कानपुर। बचपन में सांवले रंग को लेकर ताने सुनना और सहपाठियों की बुलिंग झेलना ज्योति कुशवाहा के लिए किसी पीड़ा से कम नहीं था। कक्षा चार से आठ तक उन्हें अपमान और उपहास का सामना करना पड़ा।
बचपन में अनुचित स्पर्श को लेकर भी मन में कई सवाल थे, लेकिन यह समझ नहीं आता था कि सही और गलत व्यवहार में अंतर कैसे करें और परेशानी होने पर किससे मदद मांगें। इन अनुभवों ने उनके आत्मविश्वास को प्रभावित किया, लेकिन आगे चलकर यही संघर्ष दूसरों की मदद करने की प्रेरणा बना।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में मास्टर आफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) की द्वितीय वर्ष की छात्रा ज्योति अब तक नौ हजार से अधिक बच्चों को बुलिंग और अच्छे-बुरे स्पर्श के प्रति जागरूक कर चुकी हैं।
खुद झेला अपमान, अब बच्चों को कर रहीं जागरूक
ज्योति बताती हैं कि स्कूल में कुछ सहेलियां उनके सांवले रंग को लेकर मजाक उड़ाती थीं। कई बार समूह बनाकर परेशान किया जाता था और अपमानजनक शब्द कहे जाते थे। लगातार ऐसी बातें सुनने से वह खुद पर सवाल उठाने लगीं। लोगों के सामने जाने में डर लगता था और अकेले रहना अच्छा लगता था।
इन अनुभवों से उबरने में उन्हें कई साल लगे। बचपन में अनुचित स्पर्श से जुड़े अनुभवों ने भी उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि बच्चों को कम उम्र से ही अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
इसी सोच के साथ उन्होंने जागरूक पाठशाला फाउंडेशन के माध्यम से बच्चों के लिए काम शुरू किया। पिछले चार वर्षों से वह बुली फाइटर और कवच अभियान के जरिये सरकारी व निजी विद्यालयों, कोचिंग सेंटरों और मलिन बस्तियों में बच्चों तक पहुंच रही हैं।
बुली फाइटर अभियान के तहत बच्चों को समझाया जाता है कि किसी के रंग, शारीरिक बनावट या कमजोरी का मजाक उड़ाना मानसिक परेशानी का कारण बन सकता है। बच्चों को बुलिंग का विरोध करने, प्रभावित साथी का साथ देने और जरूरत पड़ने पर शिक्षक या अभिभावक से मदद लेने के लिए प्रेरित किया जाता है।
वहीं, कवच अभियान के अंतर्गत अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान, शरीर की सुरक्षा और अनुचित व्यवहार की स्थिति में आवाज उठाने के बारे में जानकारी दी जाती है। ज्योति का मानना है कि बच्चों को जागरूक करने के साथ उन्हें ऐसा भरोसेमंद माहौल देना भी जरूरी है, जहां वे बिना डर अपनी परेशानी साझा कर सकें।
टीम के सहयोग से बढ़ रहा कारवां
ज्योति बताती हैं कि उन्होंने यह सफर अकेले शुरू किया था, लेकिन अब कई लोग उनके साथ जुड़कर बच्चों को जागरूक करने में सहयोग कर रहे हैं। हंसपुरम व्यापार मंडल के अध्यक्ष अनुज त्रिपाठी के साथ आयुष, आर्यन, दीपिका, बंधना, कमलेश और इरफान उनकी टीम का हिस्सा हैं।
उनके मेंटर आदित्य भी हर कदम पर मार्गदर्शन और सहयोग देते हैं। ज्योति चाहती हैं कि कोई बच्चा अपने रंग या पहचान के कारण अपमान न सहे और डर या असमंजस में मदद मांगने से पीछे न हटे।
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