निकाह से पहले युवक-युवतियों की काउंसिलिंग को यूपी में बनेंगे 75 सेंटर, चार माह का टारगेट, कानपुर में शुरू हुआ
जमीयत उलमा-ए-हिंद उत्तर प्रदेश में 75 परामर्श केंद्र स्थापित करेगा, ताकि विवाह से पहले मुस्लिम युवाओं को वैवाहिक जीवन की ...और पढ़ें

जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से आयोजित तरबियत जौजेन कार्यशाला में जानकरी देते विशेषज्ञ मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह। संगठन
HighLights
जमीयत उलमा-ए-हिंद यूपी में 75 काउंसिलिंग सेंटर बनाएगा
विवाह से पहले युवाओं को वैवाहिक जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाएगा
पारिवारिक विवाद कम करने, खुशहाल जीवन बनाने में मदद मिलेगी
मोहम्मद दाऊद खान, कानपुर। निकाल के बाद पति-पत्नी के संबंधों में मिठास बनी रहे, नासमझी व गैरजिम्मेदारी की वजह से खटास न पड़े, इसे लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद प्रदेश भर में 75 काउंसिलिंग सेंटर बनाएगा। इसमें शादी के बाद की जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए युवक-युवतियों का मार्गदर्शन किया जाएगा।
पति-पत्नी के बीच झगड़ों को खत्म कराने के भी प्रयास किए जाएंगे। संगठन के प्रदेश महासचिव मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह ने बताया कि कानपुर में अस्थायी सेंटर शुरू हो चुका है, जिसे जल्द नियमित कर दिया जाएगा। अगले चार माह में प्रदेश भर में केंद्र बन जाएंगे।
दारुल कजा यानी शरई पंचायत में आने वाले विवादों के अतिरिक्त जमीयत उलमा-ए-हिंद युवक-युवतियों की शादी से पहले काउंसिलिंग कर उनको खुशहाल जिंदगी बिताने की जानकारी देगा। शादी के बाद घरेलू जिम्मेदारी उठाने के लिए उनको मानसिक रूप से तैयार किया जाएगा।
संगठन ने महकमा-ए-शरिया की ओर से हाल ही में पति-पत्नी के लिए तरबियत-ए-जौजेन यानी दंपतियों को संस्कार विषय पर कार्यशाला आयोजित की थी। इसमें उनको खुशहाल शादीशुदा जिंदगी गुजारने के तरीके बताए गए। इसके साथ पारिवारिक सदस्यों को भी प्रशिक्षित किया जाना जरूरी है।
पारिवारिक समस्याओं के समय पर समाधान व खुशहाल पारिवारिक व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए महकमा-ए-शरिया दारुल कजा निकाह काउंसिलिंग की स्थायी व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश महासचिव ने बताया कि काउंसिलिंग की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि शादी के बाद समन्वय स्थापित नहीं होने, एक दूसरे को समझ न पाने, दो परिवारों के बीच रहन-सहन व दिनचर्या का अंतर होने से विवाद की स्थिति बन रही थी।
मामले शरई पंचायतों तक पहुंच रहे हैं। युवक-युवतियों की काउंसिलिंग कर उनको पहले से ही शादी के बाद की जिंदगी के तौर-तरीके सिखाए जाएंगे। जिनकी शादी हो चुकी है, उनकी काउंसिलिंग कर बेहतर जिंदगी जीने का तरीका बताया जाएगा। इससे उनमें आपसी समझ बढ़ेगी और शादी के बाद होने वाले विवादों में कमी आएगी।
फैमिली फर्स्ट गाइडेंस का सहयोग
काउंसिलिंग के लिए महाराष्ट्र की फैमिली फर्स्ट गाइडेंस संस्था का सहयोग जमीयत उलमा-ए-हिंद लेगा। इसके संस्थापक मुफ्ती अशफाक काजी पारिवारिक मामलों के विशेषज्ञ हैं। कानपुर की कार्यशाला में उन्होंने युवक-युवतियों का अच्छा मार्गदर्शन किया था। उनका कहना है कि अच्छे व्यवहार, आपसी समझ, धैर्य, सहनशीलता, एक-दूसरे की गलतियों को क्षमा करने से वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाया जा सकता है।
