कानपुर, [अंकुश शुक्ल]। राधा-माधव के मनोहारी रूप व हरे कृष्ण हरे राम हरिनाम संकीर्तन उच्चारण के लिए देश-दुनिया में चर्चित इस्कॉन मंदिर सामाजिक सरोकारों में भी बढ़कर हिस्सा लेता रहा है। इसका जीवंत उदाहरण मैनावती मार्ग स्थित इस्कॉन मंदिर है, जहां पर ग्रामीणों को हुनरमंद बना स्वरोजगार देने के साथ ही युवाओं को नशे से दूर रख उन्हें शिक्षित किया जा रहा है। मंदिर द्वारा संचालित गोशाला ग्रामीणों के लिए समृद्धि के द्वार खोल रही है।

वर्ष 2014 में मैनावती मार्ग में 15 एकड़ में इस्कॉन मंदिर की स्थापना की गई थी। तब से मंदिर ट्रस्ट सामाजिक सरोकारों में अपना योगदान दे रहा है। पिछले दिनों समाज को गो-धन के मोल से अवगत कराने के लिए मंदिर में संचालित भक्ति वेदांत गोशाला को उन्नाव स्थानांतरित किया गया। गोशाला के विस्तार के साथ ही कई गांवों के लिए समृद्धि के द्वार खुल गए। ग्रामीणों को स्वरोजगार के लिए गोशाला कृषि, पंचगव्य उत्पादन और प्राकृतिक गो आधारित खेती का प्रशिक्षण निश्शुल्क दिया जा रहा है। इस्कॉन ग्रामीण विकास केंद्र गांवों में शिक्षा, स्वच्छता, स्वरोजगार की अलख जला रहा है।

गोशाला मेें मथुरा और वृंदावन से आई कई गाय हैं। इस्कॉन मंदिर के मीडिया प्रभारी कूर्मावतार दास के मुताबिक पर्यावरण संरक्षण के लिए कई गावों के लोगों को जैविक खेती सिखाने और गोमूत्र, फिनायल, साबुन, अगरबत्ती व विभिन्न प्रकार की औषधि बनाने की सीख दी जा रही है, जिससे बने उत्पाद को इस्कान मंदिर में बने स्टॉल में बेचा भी जा रहा है। इससे ग्रामीणों को स्वरोजगार मिल रहा और महिलाएं गो गोबर के कंडे व होम क्राफ्ट बनाकर स्वावलंबी बन रहीं हैं।

युवा पीढ़ी को नशा मुक्त बनाने का अभियान

मंदिर ट्रस्ट द्वारा युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ध्यान, लीडरशिप, मैनेजमेंट, कंप्यूटर ट्रेङ्क्षनग दी जाती है। विशेषज्ञों द्वारा युवाओं को शिक्षित भी किया जा रहा है। बड़ी संख्या में शहरी युवा इस अभियान से जुड़कर जीवन को संवार रहे हैं।

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