कानपुर, जेएनएन। कोविड-19 के संक्रमण काल में आयुध निर्माणियों के कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बगैर प्रतिदिन पीपीई किट, सर्जिकल मास्क, सैनिटाइजर के उत्पादन में लगे हैं। उसके बाद भी सरकार ने निगमीकरण का फरमान जारी कर दिया। इससे रक्षा प्रतिष्ठान कर्मचारी खुद को ठगा और शोषित महसूस कर रहे हैं। यह बातें भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मुकेश सिंह ने प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कहीं। मजदूर संघ के मीडिया प्रभारी अभय मिश्र ने बताया कि सरकार को उद्योगों एवं उद्योगपतियों की चिंता है, कर्मचारियों की नहीं।

काला फीता बांधकर जताएंगे विरोध

भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के मीडिया प्रभारी ने बताया कि मंगलवार की सुबह 7.30 बजे 8.30 बजे तक आवश्यक ड्यूटी के अंतर्गत निर्माणियों में आने वाले कर्मियों संग पदाधिकारी काला फीता बांधकर निगमीकरण का विरोध जताएंगे।

पीएम को ज्ञापन में रखीं ये मांगे

  • आयुधनिर्माणियों का निगमीकरण न किया जाए।
  • थल सेना मुख्यालय के अंतर्गत कार्य कर रहे आर्मी बेस वर्कशॉप में गोको मॉडल ना लागू किया जाए।
  • वायुसेना मुख्यालय के अंतर्गत कार्य कर रही बेस रिपेयर डिपो की संरचना में कोई परिवर्तन न किया जाए।
  • कर्मचारियों एवं पेंशनर्स का महंगाई भत्ता स्थिर न किया जाए।
  • एनपीएस सदस्यों कर्मचारियों को जीपीएफ की सुविधा दी जाए।
  • सेवाकाल के दौरान कोविड-49 बीमारी से मृत्यु होने पर कर्मचारियों को 50 लाख रुपए का बीमा लाभ प्रदान किया जाए।
  • समान कार्य के लिए समान वेतन के तहत ठेका श्रमिक को 48 हजार न्यूनतम वेतन प्रदान किया जाए।

Posted By: Abhishek Agnihotri

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