कानपुर, [विवेक मिश्र]। एडवांस वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (फील्ड गन फैक्ट्री) की कानपुर इकाई ने एक और उपलब्धि हासिल की है। फैक्ट्री के इंजीनियरों ने स्वदेशी धनुष और सारंग गन (तोप) से उन्नत माउंटेड गन (तोप) तैयार की है। 10 मई को इटारसी में स्थित केंद्रीय प्रमाण प्रतिष्ठान (सेंट्रल प्रूफ इस्टेबिलशमेंट) में माउंटेड गन से गोले दागकर परीक्षण किया। मानकों पर खरा उतरने पर सैन्य अफसरों ने उसको हरी झंडी दे दी। फैक्ट्री की स्वदेशी माउंडेन गन तैयार होने से अब भारतीय सेना को स्वीडन सहित अन्य देशों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।

एडवांस वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (फील्ड गन फैक्ट्री) के महाप्रबंधक तुषार त्रिपाठी व अपर महाप्रबंधक दिनेश सिंह के निर्देशन में इंजीनियरों ने स्वदेशी धनुष व सारंग गन से अधिक एडवांस और फायरिंग रेंज क्षमता वाली गन तैयार करने का लक्ष्य लेकर उसकी डिजायन तैयार की। माउंटेड गन सिस्टम 155 गुणा 52 कैलिबर की स्वदेशी बैरल से तैयार गन को परीक्षण के लिए इटारसी भेजा गया जहां एक के बाद एक कई गोले दागकर परीक्षण किया गया। महज दो माह में तैयार की गई स्वदेशी माउंटेड गन को फौज के मानकों पर परखने के बाद सैन्य अधिकारियों ने उसे परीक्षण में पास कर दिया।

इंजीनियरों ने ऐसे लिया लक्ष्य : धनुष की सात मीटर बैरल से फायर रेंज 38 किमी तक था। फील्ड गन फैक्ट्री के इंजीनियरों ने उससे अधिक रेंज के लिए माउंटेड गन की बैरल को आठ मीटर लंबा किया। बैरल की लंबाई बढ़ाने पर गन (तोप) की फायरिंग रेंज 48 किमी तक पहुंच गई।

सेना की अब स्वीडन पर न होगी निर्भरता : फील्ड गन फैक्ट्री के अधिकारी बताते हैं कि सेना अभी तक माउंटेड गन के लिए स्वीडन सहित दूसरे देशों को आर्डर देती थी। स्वदेशी माउंटेड गन का परीक्षण सफल होने से अब सेना द्वारा कानपुर फील्ड गन फैक्ट्री को आर्डर दिए जाने की संभावना बढ़ी है। महाप्रबंधक तुषार त्रिपाठी के मुताबिक माउंटेड गन को ट्रक से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकेगा।

क्या है माउंटेड गन सिस्टम : जिस तोप को गाड़ी के पीछे लगे हुक में फंसा कर ले जाया जाता उसको टोड गन सिस्टम कहते हैं जिस पर भारतीय सेना की निर्भरता अधिक है। वहीं, जिस तोप को ट्रक से परिवहन किया जा सकता है उसको माउंटेड गन सिस्टम या माउंटेड गन या फिर माउंटेड तोप कहते हैं।

Edited By: Abhishek Agnihotri