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सरकारी नौकरी छोड़ IITian ने शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती, अब गांव में ही रहकर कर रहे मोटी कमाई

Published: Mon, 12 Oct 2026 01:28 PM (IST)

आईआईटी शिक्षित पूर्व एनएचपीसी निदेशक संजीव कुमार यादव ने कानपुर के ककरहिया गांव में ड्रैगन फ्रूट की व्यावसायिक खेती शुरू की है।

खेतों में ड्रैगन की देखरेख करते संजीव कुमार यादव

खेतों में ड्रैगन की देखरेख करते संजीव कुमार यादव

HighLights

  1. आईआईटीयन संजीव यादव ने कानपुर में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की।

  2. आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच से खेती को बनाया लाभदायक।

  3. यह पहल स्थानीय किसानों के लिए प्रेरणा, बढ़ा रही ग्रामीण आय।

जागरण संवाददाता, कानपुर। देश-विदेश की बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं का नेतृत्व करने के बाद आईआईटी शिक्षित पूर्व एनएचपीसी निदेशक संजीव कुमार यादव ने अपनी दूसरी पारी गांव की मिट्टी में शुरू की है।

पतारा ब्लॉक के ककरहिया गांव में उन्होंने अपनी पत्नी शिखा यादव के साथ ड्रैगन फ्रूट की व्यावसायिक खेती कर यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ खेती भी लाभ का बड़ा माध्यम बन सकती है। उनका यह प्रयास आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है।

इलाहाबाद एमएनआईटी से बीटेक और आईआईटी रुड़की से एमटेक करने वाले संजीव यादव बताते हैं कि नौकरी के दौरान भूटान प्रवास में कृषि वैज्ञानिकों से हुई चर्चा ने उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती की ओर आकर्षित किया। तभी उन्होंने तय कर लिया था कि सेवानिवृत्ति के बाद गांव लौटकर इसी क्षेत्र में कुछ नया करेंगे। वर्षों की योजना अब धरातल पर सफल होती दिखाई दे रही है।

1.60 लाख रुपये की मिली सब्सिडी

राज्य सरकार की उद्यान प्रोत्साहन योजना ने इस पहल को गति दी। एक एकड़ क्षेत्र में लगाए गए करीब 1200 पौधों के लिए उन्हें 1.60 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। असम, हरियाणा और उत्तराखंड से मंगाई गई सात किस्मों में से पांच किस्में कानपुर की जलवायु के अनुरूप सफल साबित हुई हैं। कैक्टस प्रजाति का यह पौधा कम पानी में बेहतर उत्पादन देता है और एक बार तैयार होने के बाद 20 से 25 वर्षों तक फल देता रहता है।

अब तक कानपुर की चकरपुर मंडी में ड्रैगन फ्रूट मुख्य रूप से गुजरात और महाराष्ट्र से पहुंचता था। लंबी दूरी के परिवहन के कारण फल की ताजगी प्रभावित होती थी, लेकिन ककरहिया में तैयार फसल से स्थानीय बाजार को ताजा और बेहतर गुणवत्ता का ड्रैगन फ्रूट मिलने लगा है। इस सीजन में अब तक दो क्विंटल से अधिक फल मंडी भेजे जा चुके हैं, जबकि कई पौधों पर नई फसल तैयार हो रही है।

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संजीव और शिखा यादव का उद्देश्य केवल अपनी खेती तक सीमित नहीं है। उन्होंने दो स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार दिया है और आसपास के किसानों को अपने फार्म पर बुलाकर ड्रैगन फ्रूट की वैज्ञानिक खेती, पौधों की देखभाल और विपणन की जानकारी भी दे रहे हैं, ताकि अधिक किसान नकदी फसलों की ओर बढ़ सकें।

ऐसे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ किसानों की आय और रोजगार के अवसर भी बढ़ाएंगे। कानपुर की मिट्टी में ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन पहले किसी ने सोचा भी नहीं था, लेकिन संजीव की मेहनत और अभिनव प्रयोग तारीफ के काबिल है। अन्य किसानों को भी इनसे सबक लेकर खेती के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग करने चाहिए।

                                                                अभिनव जे.जैन, मुख्य विकास अधिकारी