सावधान! सस्ती फेस क्रीम कर रही किडनी फेल; IIT कानपुर की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सस्ती फेयरनेस क्रीम में लेड, आर्सेनिक और मरकरी जैसे भारी तत्व ...और पढ़ें

गैर मानक की फेस क्रीम। आईआईटी की जांच रिपोर्ट में लेड की मात्रा अधिक मिली। जागरण
HighLights
किडनी के लिए महंगी साबित हो रही सस्ती क्रीम, आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट में हुई पुष्टि
जांच के लिए भेजी गई बिना ब्रांड वाली फेयरनेस क्रीम में अधिक मात्रा में मिला लेड, आर्सेनिक और मरकरी
क्रीम और कास्मेटिक उत्पाद लगाने वालों की किडनी में नेल वन एंटीबाडी के कारण किडनी की फिल्टर क्षमता हो रही प्रभावित
अंकुश शुक्ल, कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के नेफ्रोलाजी विभाग में हर दिन सामने आ रहे मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी के मामलों की जांच के लिए मार्च माह में आईआईटी कानपुर में बिना ब्रांड वाली क्रीम की जांच कराई गई। इसमें चौकाने वाले भारी तत्व की पुष्टि हुई।
आईआईटी की रिपोर्ट में लेड की मात्रा दो गुणा मिली। जबकि, क्रोमियम, निकिल, आर्सेनिक और कैडमियम की मात्रा क्रीम में मिली। बिना ब्रांड की सस्ती क्रीम के प्रयोग से ही किडनी फेल के मामले सामने आ रहे हैं। गोरे की चाहत में सस्ती फेयरनेस क्रीम और कास्मेटिक उत्पाद का प्रयोग करने वाले मरीज पैर में सूजन, झागदार यूरिन और हमेशा थकान महसूस होने की समस्या के साथ हर दिन पहुंच रहे हैं।
इनमें लेड, आर्सेनिक और मरकरी की अधिक मात्रा किडनी में नेल वन एंटीबाडी का कारण बन रही है। जो किडनी की फिल्डर क्षमता को प्रभावित करने के साथ किडनी में इंजरी और फाइब्रोसिस का कारण भी बन रही है। अब ओपीडी में क्रीम के साथ ही जिम में दिए जाने वाला प्रोटीन पाउडर का भी सैंपल जांच के लिए भेजने की तैयारी है। ओपीडी में युवा वर्ग के पहुंच रहे मरीजों में क्रीम के साथ ही प्रोटीन पाउडर की हिस्ट्री मिल रही है।
किडनी की फिल्टर क्षमता हो रही प्रभावित
नेफ्रोलाजिस्ट डा. युवराज गुलाटी ने बताया कि घटिया फेयरनेस क्रीम में पारे जैसी भारी धातुओं की मात्रा अधिक होती है, जो किडनी में मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी का खतरा बढ़ा रही है। यह एक ऐसी स्थिति है इसमें गुर्दे असामान्य मात्रा में प्रोटीन का रिसाव होने लगता है। रक्त और यूरिन में पारे का स्तर सामान्य से लगभग दस गुना अधिक होने से किडनी की फिल्टर क्षमता बुरी तरह से प्रभावित होती है।
ये भी जानें
कई मामलों की किडनी की बायोप्सी जांच में ग्लोमेरुली (किडनी के फिल्टर) में समस्या और नेल वन एंटीबाडी पाया गया है। उन्होंने बताया कि आईआईटी को भेजे गए क्रीम की जांच रिपोर्ट आ गई है। इसमें सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन के मानक से अधिक भारी तत्व मिले हैं। क्रीम में 20 पीपीएल की मात्रा लेड की होनी चाहिए। जो 42.56551 पीपीएल तक मिली। इसके साथ ही क्रोमियम, निकिल, आर्सेनिक और कैडमियम भी बिना ब्रांड वाली क्रीम में मिला।
फेयरनेस क्रीम में मौजूद पारा किडनी को ऐसे करता डैमेज
जब किडनी की फिल्टर संरचनाओं में पारा जमा हो जाता है, तो यह प्रोटीन से जुड़कर एक एंटीजन बनाता है। इससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली किडनी की संरचनाओं पर हमला करती है और किडनी की कार्य क्षमता प्रभावित होती है। इससे ग्रसित मरीजों के पैरों में सूजन, संक्रमण, थकान, मस्तिष्क और फेफड़ों में रक्ता का थक्का और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डा. डीपी शिवहरे ने बताया कि मरकरी युक्त क्रीम के प्रयोग से किडनी के साथ त्वचा को खतरा हो सकता है। त्वचा पर एलर्जी के साथ लालपन, दाने और खुजली होने की समस्या दिखती है। यह लक्षण कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले में दिखते हैं। मरकरी स्क्रीन के संपर्क में आकर ब्लड में मिलती है और किडनी में जाकर किडनी की क्षमता को प्रभावित करती है।
इन मामलों में गंभीरता मिलने पर कराई गई क्रीम की जांच
मुंबई से फेयरनेस क्रीम मंगवाने वाली 33 वर्षीय महिला ने बताया कि 15 से 20 दिन ही क्रीम का उपयोग किया था और पैर और चेहरे पर सूजन आ गई। जब नेफ्रोलाजिस्ट को दिखाया तो जांच में किडनी की बीमारी निकाली। वहीं, चकेरी की युवती ने बताया कि दिल्ली से आर्डर करके गोरे होने की क्रीम मंगाई थी। कुछ दिन के उपयोग के बार चेहरे पर तो चमक आ गई। परंतु पैरों में सूजन और हमेशा थकान जैसा महसूस होने लगा। ऐसे मामलों में प्रयोग की गई क्रीम की जांच आईआईटी में हुई। जिसकी रिपोर्ट में लेड, आर्सेनिक और मरकरी की अधिक मात्रा मिली।
बचाव के तरीके
- क्रीम खरीदने से पहले लेबल पर मरकरी और क्रीम में उपयोग होने वाले भारी तत्व की जांच करें।
- बिना लेबल वाले उत्पादों से बचें, ऐसी क्रीम का उपयोग न करें जिन पर सामग्री की पूरी जानकारी न हो
- त्वचा विशेषज्ञ की सलाह पर ही क्रीम उपयोग करें।
- गोरापन पाने के बजाय स्वस्थ त्वचा पर ध्यान दें। विटामिन सी सीरम या सनस्क्रीन का उपयोग करना सुरक्षित विकल्प है।
- यदि आप लंबे समय से ऐसी क्रीम का उपयोग कर रहे हैं, तो किडनी फंक्शन टेस्ट और यूरिन टेस्ट कराएं।
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