कानपुर, जेएनएन। कोरोना संक्रमण की पहली लहर से घर में रहकर पढ़ रहे आइआइटी के स्नातक (यूजी) छात्रों ने अब संस्थान में आने के लिए मुहिम छेड़ दी है। ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर संदेश लिखे जा रहे हैं। यही नहीं आनलाइन कक्षाओं में छात्रों ने कैंपस फार यूजी और ब्रिंग यूजीस बैक टू कैंपस की प्रोफाइल लगाकर जुड़ रहे हैं। स्नातक छात्रों की मांग पर संस्थान के अधिकारियों ने बैच को बुलाने पर प्लानिंग शुरू कर दी है। अभी पीएचडी, एमटेक और मास्टर आफ साइंस बाई रिसर्च के छात्र अलग-अलग समूहों में आ रहे हैं। उनसे कोरोना टीकाकरण का प्रमाणपत्र लिया जा रहा है। संस्थान में आने पर आरटीपीसीआर रिपोर्ट भी देखी जा रही है।

आइआइटी में नए सत्र की पढ़ाई अगस्त के पहले हफ्ते से शुरू हो गई है। विषम सेमेस्टर की कक्षाएं लग रही हैं। पीएचडी और एमटेक छात्रों की संस्थागत, जबकि बीटेक के दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष की कक्षाएं आनलाइन हो रही है। बीटेक छात्रों के लैब कार्य वर्चुअल तरीके से कराए जा रहे हैं। उन्हेंं कई टूल्स दिए गए हैं, जिनसे वे सभी आभासी तरीके से लैब का कार्य कर सकें। पिछले सम सेमेस्टर में छात्रों का इसका आभास कराया गया था। संस्थान की ओर से तीसरी लहर को देखते हुए एहतियात बरती जा रही है। कोविड प्रोटोकाल का पालन कराया जा रहा है। छात्रों की आनलाइन और आफलाइन दोनों तरीके से मदद हो रही है।

वहीं, बीटेक छात्रों का कहना है कि उन्हेंं लैब कार्य की सही जानकारी नहीं हो रही है। उनका अभ्यास नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे छात्रों को इंटरनेट की दिक्कत आ रही है। संस्थान के अधिकारी ने बताया कि बीटेक छात्रों को बुलाने की तैयारी चल रही है। अभी संक्रमण की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जिन छात्रों को समस्या हो रही है, उनको बुलाया जा सकता है।

स्टूडेंट सीनेट में उठी मांग : पिछले महीने स्टूडेंट सीनेट का आनलाइन आयोजन हुआ, जिसमें स्नातक, परास्नातक और पीएचडी के सीनेटर शामिल हुए। इसमें वाई-18, 19 और 20 बैच ने संस्थान में आने की मांग रखी। कोरोना वैक्सीन लगवा चुके छात्रों का डेटा प्रस्तुत किया गया।

Edited By: Abhishek Agnihotri