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अमेरिका में मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च की नई दिशा पर बनेगी रणनीति, कानपुर IIT के विशेषज्ञ भी होंगे शामिल

Published: Mon, 21 Sep 2026 07:23 PM (IST)

आईआईटी कानपुर मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान को प्रयोगशाला से मरीज तक पहुंचाने के लिए अमेरिका में 'फेस 2026' कार्यक्रम में भाग ले रहा है।

आइआइटी में मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान की नई दिशा पर अमेरिका में बनेगी रणनीति।

आइआइटी में मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान की नई दिशा पर अमेरिका में बनेगी रणनीति।

HighLights

  1. आईआईटी कानपुर मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान पर बढ़ा रहा फोकस।

  2. अमेरिका में 'फेस 2026' कार्यक्रम में विशेषज्ञ करेंगे मंथन।

  3. इंजीनियरिंग, एआई से भविष्य की चिकित्सा को मिलेगी नई दिशा।

जागरण संवाददाता, कानपुर। मेडटेक और हेल्थटेक इनोवेशन को प्रयोगशाला से मरीज तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे आईआईटी ने अब मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान पर अपना फोकस बढ़ा दिया है।

इसके लिए आईआईटी निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल की अगुवाई में आईआईटी की टीम अमेरिका पहुंची हैं जहां दुनिया के शीर्ष चिकित्सा एवं तकनीकी विशेषज्ञों के साथ 22 सितंबर को फेस 2026 का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम के फ्यूचर ऑफ मेडिसिन सत्र में आईआईटी समेत वैश्विक संस्थानों के विशेषज्ञ इस बात पर मंथन करेंगे कि मेडिकल साइंस, इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक शोध के मेल से भविष्य की चिकित्सा को किस तरह नई दिशा दी जाए।

फेफड़ों के कैंसर की एआइ आधारित शुरुआती पहचान, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, एन95 मास्क, ब्रेस्ट हेल्थ सेंसर पैच और आइसीयू मानिटरिंग जैसी तकनीकों का विकास पिछले कुछ सालों में आईआईटी के इंजीनियरों और स्टार्टअप इको सिस्टम की मदद से किया गया है।

आईआईटी का गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज और वाधवानी इनाेवेशन सेंटर फार लाइफ साइंसेज एंड मेडिकल टेक्नोलाजीज भी आईआईटी की इंजीनियरिंग शिक्षा केंद्र की पहचान को बदल रहे हैं।

इसी क्रम को विस्तार देते हुए 22 सितंबर को मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, कैम्ब्रिज के वोंग आडिटोरियम में फेस 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसमें आईआईटी के डीन रिसर्च प्रो. जयंधरन जी. राव और गंगवाल स्कूल आफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलाजी के डीन डॉ. अनिल के. लालवानी की भागीदारी खास मानी जा रही है।

उनके साथ हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डॉ. जयेंद्र जगदीसन, कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रो. सुनील के. अग्रवाल, आइसीएमआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव और आर्टोस की मिहिका जैन भी शामिल होंगी।

इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ इस बात पर मंथन करेंगे कि मेडिकल साइंस, इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक शोध के मेल से भविष्य की चिकित्सा को किस तरह नई दिशा दी जाए।

चिकित्सा के बदलते स्वरूप में विज्ञान और तकनीक की भूमिका पर होने वाली चर्चा के साथ विशेषज्ञ इस बात पर विचार करेंगे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, मेडिकल डिवाइस, जीन एवं सेल आधारित तकनीक और डेटा आधारित स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को किस तरह आगे बढ़ाया जा सकता है।

गंगवाल स्कूल आफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के संदर्भ में यह संवाद महत्वपूर्ण है। स्कूल का उद्देश्य इंजीनियरिंग, विज्ञान और चिकित्सा को एक मंच पर लाकर नई मेडिकल तकनीक, शोध और स्वास्थ्य समाधान विकसित करने की दिशा में काम करना है।

आईआईटी निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि अब केवल इंजीनियरिंग शिक्षा तक संस्थान सीमित नहीं है। इंजीनियर और चिकित्सक के मिलने से नए अनुसंधान हुए हैं जो समाज के लिए उपयोगी साबित हुए हैं। उच्च शिक्षा केंद्र के तौर पर अब हमारा फोकस भी दोनों क्षेत्रों को साथ लाने का है।

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