बैडमिंटन के लिए अब बनेगी बेहतर सिंथेटिक शटलकॉक, कानपुर IIT के विज्ञानियों की खोज से बदलेगा खेल का रोमांच
आईआईटी कानपुर के विज्ञानियों ने बैडमिंटन के लिए एक बेहतर सिंथेटिक शटलकॉक विकसित करने की राह खोजी है। यह नई ...और पढ़ें

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
आईआईटी कानपुर ने सिंथेटिक शटलकॉक डिजाइन में नई राह खोजी।
तेज प्रहार और हवा में भी शटलकॉक रहेगी अधिक स्थिर।
खेल उपकरण निर्माताओं को मिलेगी टिकाऊ शटलकॉक बनाने में मदद।
जागरण संवाददाता, कानपुर। बैडमिंटन खेलने वालों को जल्द ऐसी सिंथेटिक शटलकॉक मिल सकती है, जो तेज प्रहार और हवा के दबाव में भी बेहतर स्थिरता बनाए रखे और जल्दी खराब न हो। आईआईटी के विज्ञानियों ने शटलकॉक की उड़ान के दौरान होने वाले आटो रोटेशन यानी स्वतः घूर्णन (अपने आप घूमना) और उसके आकार में बदलाव के बीच संबंध को समझकर इसके बेहतर डिजाइन की राह खोजी है।
आईआईटी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. संजय मित्तल और छात्र मुकुल कुमार कंसारा ने पंखों वाली तथा सिंथेटिक शटलकॉक का विंड टनल में अलग-अलग वायु गति पर परीक्षण किया।
शोध का उद्देश्य यह समझना था कि तेज गति से उड़ने के दौरान शटलकॉक अपनी उड़ान में हवा के दबाव का सामना कैसे करती है । अपनी स्थिरता को बनाए रखने में शटलकॉक की डिजाइन की भूमिका क्या है।
प्रो. मित्तल ने बताया कि शोध में सामने आया कि तेज शाट के बाद हवा के खिंचाव के कारण शटलकॉक अपने आप घूमने लगती है। हवा की गति बढ़ने के साथ उसका घूर्णन यानी घूमना भी बढ़ता है। यही ऑटो रोटेशन उड़ान के दौरान शटलकॉक को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सिंथेटिक शटलकॉक में टूटने-मुड़ने की चुनौती
तेज हवा के दबाव में शटलकॉक का स्कर्ट यानी गोल घेरा सिकुड़ता है। सिंथेटिक शटलकॉक में यह बदलाव अपेक्षाकृत अधिक होता है और एक सीमा के बाद उसके मुड़ने यानी बकलिंग का खतरा अधिक रहता है। शोध में पाया गया कि आटोरोटेशन ही इस खामी को नियंत्रित करने में मदद करता है। इससे शटलकॉक तेज गति में भी अनियंत्रित होने से बचती है।
प्रो. मित्तल के अनुसार हवा का प्रवाह, शटलकॉक का घूर्णन और उसकी संरचना एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। यह द्रव-संरचना अंतःक्रिया का उदाहरण है। इस प्रक्रिया की बेहतर समझ से ऐसी सिंथेटिक शटलकॉक डिजाइन की जा सकती हैं, जिनकी संरचना हवा के दबाव के अनुरूप बेहतर प्रतिक्रिया दे।
इस शोध से खेल उपकरण निर्माताओं को शटलकॉक के आकार, स्कर्ट की संरचना और सामग्री में बदलाव के लिए वैज्ञानिक आधार मिल सकता है। इससे अधिक टिकाऊ, स्थिर और बेहतर प्रदर्शन वाली सिंथेटिक शटलकॉक बनाई जा सकेगी। खेल सामान निर्माताओं के साथ साझेदारी कर इसे तैयार किया जा सकेगा।
