मोबाइल फोन की स्क्रीन पर दिखेगा खतरे का अलर्ट, IIT कानपुर ने बनाई स्मार्टफोन आधारित तकनीक
आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने सड़क पर मोबाइल फोन के उपयोग के दौरान होने वाले हादसों को रोकने के लिए एक नई तकनीक विकसित की है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
आईआईटी कानपुर ने विकसित की नई स्मार्टफोन-आधारित अलर्ट तकनीक।
यह सिस्टम रास्ते की बाधाओं के प्रति उपयोगकर्ता को सचेत करेगा।
स्क्रीन पर दिशा के अनुसार चमक से मिलेगी खतरे की जानकारी।
अखिलेश तिवारी, कानपुर। सड़क पर चलते हुए मोबाइल फोन की स्क्रीन में नजरें गड़ाए रहने से होने वाले हादसों को रोकने के लिए आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने नई तकनीक विकसित की है। यह स्मार्टफोन आधारित विजुअल फीडबैक सिस्टम रास्ते में आने वाली बाधाओं और टकराव के संभावित खतरे के प्रति उपयोगकर्ता को सचेत करेगा।
खास बात यह है कि खतरे की जानकारी देने के लिए स्क्रीन के किनारों पर दिशा के अनुसार चमक दिखाई देगी, जिससे उपयोगकर्ता को बिना बार-बार स्क्रीन से नजर हटाए भी आसपास के खतरे का अहसास हो सकेगा।
आईआईटी में विकसित इस तकनीक का नाम 'रियल-टाइम विजुअल फीडबैक सिस्टम एंड मेथड फार मिनिमाइजिंग द रिस्क आफ जेवाकिंग आर डिस्ट्रैक्टेड वाकिंग' है। यह प्रणाली स्मार्टफोन के ऊपरी हिस्से में लगे डेप्थ कैमरे की मदद से आगे के रास्ते पर नजर रखती है।

रास्ते में जब कोई बाधा आती है तो मोबाइल स्क्रीन के किनारों पर दिशा बताने वाली एक चमक दिखाई देती है। इससे मोबाइल फोन का उपयोग करने वालो को खतरे की दिशा और संभावित टक्कर के समय का अंदाजा मिल जाता है।
अनुसंधानकर्ता टीम के अनुसार आमतौर पर मोबाइल में किसी खतरे की सूचना देने के लिए आवाज या अलग से चेतावनी दिखाई जाती है, लेकिन यह सिस्टम लगातार दृश्य संकेत देता है। इससे उपयोगकर्ता को बार-बार ऊपर देखने की जरूरत कम हो सकती है।
साथ ही, अलार्म की आवाज से होने वाली परेशानी से भी बचा जा सकता है। यह प्रणाली रास्ते में मौजूद स्थिर और गतिशील, दोनों तरह की बाधाओं को पहचानने के लिए तैयार की गई है।
फुटपाथ से रेलवे स्टेशन तक उपयोगी
इस तकनीक का उपयोग शहरों के व्यस्त चौराहों, फुटपाथों, संस्थानों के परिसरों और रेलवे स्टेशनों पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने में किया जा सकता है। मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए काम करने वाले डिलीवरी कर्मियों और फील्ड स्टाफ के लिए भी यह उपयोगी साबित हो सकती है।
इसके अलावा भी इस डिवाइस के कई उपयोग हैं। इसकी मदद से कम दृष्टि वाले लोगों को भी मदद मिलेगी। स्मार्ट सिटी सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों के साथ स्मार्ट चश्मों में इसका संभावित उपयोग किया जा सकता है।
अनुसंधान टीम ( डॉ. गौधाम प्रभाकर, अखिलेश कुमार भगत (डिजाइन विभाग) तथा डा. प्रगति प्रियदर्शिनी बालासुब्रमणि और लाजार टोनी - काग्निटिव साइंस विभाग ) अब इस तकनीक के नए उपयोगों की दिशा में काम कर रही है जिसके तहत भविष्य में इसे स्मार्टफोन के आपरेटिंग सिस्टम में भी जोड़ा जा सकता है।
