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ब्रेक लगाते ही खुद चार्ज होगी आपकी कार, IIT कानपुर के रिसर्चरों ने डेवलप की सुपरकैपेसिटर टेक्नोलॉजी

By Akhilesh TiwariEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Sat, 17 Oct 2026 05:13 AM (IST)Updated: Sat, 17 Oct 2026 05:42 AM (IST)

आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक नई सुपरकैपेसिटर तकनीक विकसित की है। यह तकनीक ब्रेक लगाने ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. आईआईटी कानपुर ने नई ईवी सुपरकैपेसिटर तकनीक विकसित की।

  2. ब्रेक लगाने पर ऊर्जा बैटरी में संग्रहीत होगी, चार्जिंग तेज।

  3. एक मिनट चार्ज पर तीन मिनट तक ऊर्जा मिलेगी।

अखिलेश तिवारी, कानपुर। अब वह दिन दूर नहीं जब यथाशीघ्र हमारा इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) ब्रेक लगाने पर निकली ऊर्जा को भी बैटरी में संग्रहीत करेगा। एक मिनट चार्ज होने पर तीन मिनट तक ऊर्जा मिल सकेगी। ईवी की चार्जिंग तेज करने व बैटरी पर पड़ने वाला दबाव कम करने की दिशा में आइआइटी कानपुर की शोध टीम ने यह महत्वपूर्ण नवाचार किया है।

संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने सुपरकैपेसिटर के लिए एक विशेष हाइब्रिड इलेक्ट्रोड सामग्री विकसित की है, जिसको भारत सरकार से इसी साल पेटेंट भी मिल चुका है। इस तकनीक को रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. प्रकाश चंद्र मंडल, शोध छात्रा नेहा सिंह व प्रियंका मक्कड़ ने विकसित किया है। इसमें कापर फेराइट के सूक्ष्म कणों की सतह पर विशेष कार्बनिक अणुओं को रासायनिक बंधों के जरिए जोड़ा गया है। इससे इलेक्ट्रोड के भीतर इलेक्ट्रानों के प्रवाह को बढ़ाना संभव हो गया है।

अधिक शक्ति उपलब्ध कराना संभव

ऊर्जा को तेजी से ग्रहण करने व छोड़ने की क्षमता के कारण इस सुपरकैपेसिटर को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए उपयोगी बना दिया है। इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लीथियम-आयन बैटरियों में ऊर्जा संग्रहीत होती है, लेकिन उन्हें चार्ज करने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है। सुपरकैपेसिटर की मदद से कम समय में ऊर्जा ग्रहण करना व अधिक शक्ति उपलब्ध कराना संभव होगा।

इस अनुसंधान से विकसित नई इलेक्ट्रोड सामग्री से सुपरकैपेसिटर का प्रदर्शन बेहतर हो जाएगा। भविष्य में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल बैटरी के साथ किया जा सकता है। इससे वाहन को तेजी से ऊर्जा उपलब्ध कराने, एकदम बढ़ने वाली बिजली की मांग संभालने व ब्रेक लगाने के दौरान पैदा होने वाली ऊर्जा को दोबारा संचित करने में मदद मिल सकती है।

शोध टीम ने दो इलेक्ट्रोड वाला एक प्रोटोटाइप उपकरण तैयार किया है। इसमें पोटेशियम हाइड्राक्साइड के घोल को इलेक्ट्रोलाइट व फिल्टर पेपर को विभाजक के रूप में इस्तेमाल किया गया। परीक्षण के दौरान उपकरण को 60 सेकंड चार्ज करने के बाद एक हरे एलईडी बल्ब को 180 सेकंड तक जलाए रखने में सफलता मिली।

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प्रो. प्रकाश चंद्र ने बताया कि ऊर्जा भंडारण क्षमता और तीव्र चार्जिंग का यह शुरुआती प्रदर्शन है। इससे भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग को कुछ ही मिनट में कर सकेंगे। सुपर चार्जर को बनाना पहली बार भारत में संभव हो सकेगा।