कानपुर पहुंचे वायु सेना अध्यक्ष ने कहा, थिएटराइजेशन के खिलाफ नहीं है भारतीय वायु सेना
वायु सेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कानपुर में कहा कि भारतीय वायुसेना थिएटराइजेशन के खिलाफ नहीं है, ...और पढ़ें

मेमोरी आफ लीजेंड एयर वाइस मार्शल हरजिन्दर सिंह पत्रिका का विमोचन करते वायु सेना अध्यक्ष एपी सिंह(मध्य में ) एयर मार्शल (वेटरन) जगजीत सिंह,(बाएं से दूसरे ) ग्रुप कैप्टन (वेटरन) आरके यादव(दाएं ) एयर वाइस मार्शल एल्ला उमेश (बाएं )। एएफए
HighLights
वायुसेना थिएटराइजेशन के खिलाफ नहीं, न्यूनतम व्यवधान चाहती है
भारत की जरूरतों के अनुसार चरणबद्ध सुधारों पर जोर
सैन्य आयात घटाने, आधुनिक तकनीक अपनाने का समर्थन
जागरण संवाददाता, कानपुर। भारतीय वायुसेना (आइएएफ) थिएटराइजेशन के खिलाफ नहीं है और वह किसी भी नई पहल के लिए तैयार है, ताकि मौजूदा ढांचे में कम से कम रुकावट आए। यह बात शनिवार को वायु सेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कही। थिएटराइजेशन योजना में हर थिएटर कमांड में सेना, नौसेना और वायु सेना की यूनिट्स होंगी और वे सभी एक इकाई के रूप में काम करेंगी, जो किसी खास भौगोलिक क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों को संभालेंगी। अभी सेना, नौसेना और वायु सेना के कमांड अलग-अलग हैं।
चकेरी स्थित वायुसेना स्टेशन के सारंग सभागार में आयोजित हरजिन्दर सिंह के प्रथम स्मृति व्याख्यान व पत्रिका विमोचन समारोह में उन्होंने कहा कि मौजूदा सिस्टम में बड़ी उथल-पुथल न की जाए और किसी दूसरे देश की नकल करने के बजाय भारत की सैन्य ताकत को और बढ़ाने के लिए आंतरिक रूप से सुधार किया जाए।
उन्होंने कहा, सरकार ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2019 में थिएटराइजेशन योजना की घोषणा की थी। हालांकि, इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इस माडल के तहत सरकार सेना, वायु सेना और नौसेना की क्षमताओं को एकीकृत करना चाहती है। युद्धों व अभियानों के लिए उनके संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि लोगों को भरोसा दिला सकता हूं कि वायु सेना थिएटराइजेशन के उस तरह से ख़िलाफ नहीं है, जैसा कि मीडिया में दिखाया जाता है। उन्होंने भारत की जरूरतों पर आधारित ढांचा तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा कि हम इसे चरण-दर-चरण तरीके से लागू करें, ताकि कम से कम व्यवधान हो और सिस्टम में कोई उथल-पुथल न मचे। खासकर ऐसे समय में जब हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि आपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। हमें उसी के अनुसार तैयार रहने की जरूरत है।
एयर चीफ मार्शल ने मिलिट्री हार्डवेयर के आयात पर निर्भरता कम करने की सरकार की पहल का भी समर्थन किया। साथ ही कहा कि भारतीय प्राइवेट सेक्टर प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए विदेशी मैन्युफ़ैक्चरर्स के साथ मिलकर काम कर सकता है, क्योंकि कभी-कभी भारतीय कंपनियां समय पर सब कुछ तैयार नहीं कर पाती हैं, क्योंकि उनके पास भी काम का बहुत ज्यादा बोझ होता है।
उन्होंने वर्तमान समय में नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीक सीखने को प्राथमिकता देनी होगी, क्योंकि यही समय की मांग है। उत्पादक यानी प्रोडक्टिव एआइ की चर्चा हो रही है, लेकिन हमें यह अनुमान लगाना होगा कि भविष्य में क्या होने के आसार हैं। हम भविष्य की संभावनाओं को समझने के लिए डिजिटल ट्विन्स बना रहे हैं। हमें किसी भी गलती से सीखना होगा और दोहराव न हो, इसका प्रयास करना होगा।
एयरफोर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ग्रुप कैप्टन (वेटरन) आरके यादव ने बताया कि एयर वाइस मार्शल हरजिन्दर सिंह का जन्म 1909 में पंजाब के होशियारपुर जिले में हुआ था। 11 वर्ष की आयु में उनके माता व पिता का निधन हो गया था।
